गले के दर्द के लिये 5 आसान आयुर्वेदिक उपचार

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आयुर्वेद के अनुसार मानव शरीर तीन दोषों से मिलकर बना है। ये तीन दोष हैं, कफ़, पित्त और वात। इनकी तुलना वायु, पृथ्वी, अग्नि, पानी और आकाश से की गई है।

प्रत्येक व्यक्ति में किसी एक दोष की प्रधानता होती है जो उसके व्यक्तित्व को दर्शाती है परन्तु आयुर्वेद के सिद्धांत के अनुसार किसी भी बीमारी का कारण इन तीन दोषों में गंभीर असंतुलन होना है।

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आईये कुछ ऐसे आयुर्वेदिक उपचारों के बारे में जानें जो आपको गले के दर्द को दूर करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद के सिद्धांत के अनुसार गले के दर्द को दूर करने के लिए आपको अपने आहार और जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन करने होंगे। गले के दर्द को दूर करने के लिए आपको ठंडे, खट्टे और मसालेदार पदार्थों से परहेज़ करना चाहिए। 

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विभिन्न प्रकार के मसाले जैसे अदरक, मेथी और लहसुन भी गले की खराश को दूर करने में सहायक होते हैं। आज हम आपको प्राचीन औषधि प्रणाली की 5 औषधियों को बनाने की विधि बताएँगे जो गले में होने वाले दर्द को दूर करने में सहायक होगी।

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इलायची: क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में इलायची का प्रयोग गले के दर्द और टॉनसिल्स के उपचार में किया जाता है? इलायची को पानी में भिगोकर गरारे करने से गले की खराश दूर होती है।

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मेथी: मेथी का उपयोग गले के दर्द दूर करने के लिए भी किया जाता है। मेथी के बीजों को कुछ समय के लिए पानी में उबालें। इसे एक निश्चित तापमान तक ठंडा करें, छानें तथा इस पानी से गरारे करें।

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आम की छाल: क्या आप जानते हैं कि आम के पेड़ की छाल का उपयोग गले की खराश के उपचार में किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार आम की छाल गले की खराश को दूर करने का प्रभावी उपचार है। इसे पीसते समय जो तरल पदार्थ निकलता है उसे पानी में मिलाकर उसका उपयोग गरारे करने के लिए किया जा सकता है या उसे प्रभावित जगह पर लगाया जा सकता है।

Triphala

त्रिफला: आयुर्वेद के अनुसार त्रिफला तीन या अधिक जडी बूटियों का मिश्रण है जो इसके पाचन में लाभ, डिटॉक्सीफाइंग गुण और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के गुणों के लिए जाना जाता है। यह गले से संबंधित अन्य समस्याओं के उपचार में सहायक होता है। त्रिफला को गर्म पानी में मिलाएं। दिन में कई बार इस पानी से गरारे करें और आप देखेंगे कि आपकी स्थिति में तुरंत ही सुधार होने लगता है।

Mulethi

मुलैठी: मुलैठी बाज़ार में आसानी से उपलब्ध है तथा गले के उपचार में बहुत प्रभावी होती है। मुलैठी गले को ठंडक पहुंचाती है जिससे गले के संक्रमण को रोकने में सहायता मिलती है। गले की खराश को दूर करने के लिए मुलैठी को पानी में उबालें तथा इसे धीरे धीरे चाय की तरह पीयें। मुलैठी के रोग हरने वाले गुण के कारण इसका उपयोग वैदिक समय से किया जा रहा है तथा इसे आयुर्वेद में भी स्थान मिला है।

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Story first published: Friday, May 20, 2016, 10:10 [IST]
English summary

5 Secret Ayurvedic Remedies For Sore Throat

The best way to treat sore throat is through ayurveda. So, read to know the secret recipe to treat sore throat in ayurveda.
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