पिंक आई, कंजे‍क्‍टिवाइटिस के लिए घरेलू उपाय

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पिंक आई ऐसा संक्रमण है जो शिशुओं, बच्‍चों और वयस्‍को में बहुत सामान्‍य है। पिंक आई को कंजे‍क्‍टिवाइटिस भी कहा जाता है। पिंक आई अगर वायरल अथवा बैक्‍टीरियल संक्रमण के कारण हो, तो संक्रामक भी हो सकती है। तो ऐसे में बड़े बच्‍चों में यह अधिक देखी जाती है। यह कंजेक्टिवा में संक्रमण के कारण होती है। कंजेक्टिवा आंख का एक हिस्‍सा होता है। यह पलकों और आंखों को नम रखता है।

आया मौसम कंजेक्टिवाइटिस का

पिंक आई नुकसानदेह तो नहीं है, लेकिन अगर इसका इलाज न किया जाए तो यह सात से दस दिनों तक परेशानी का सबब जरूर बनता है। आमतौर पर यह एक ही आंख में होता है, लेकिन यह दोनों आंखों में फैल सकता है। इस परेशानी और दर्द को दूर करने के लिए लोग एंटीबायोटिक अथवा एंटी इन्‍फ्लेमेटरी आई ड्रॉप्‍स का इस्‍तेमाल घर पर ही कर सकते हैा। हम आपको पिंक आई सिंड्रोम के कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं।

इस गर्मी में 'आंख आने' से बचिए

पिंक आई मुख्‍यत: तीन प्रकार का होता है। बैक्‍टीरियल कंजेक्टिवायरस, एलर्जिक एंटीवायरस और वायरल कंजेक्टिवायरस। बैक्‍टीयिरल कंजेक्टिवायरस स्‍टेफिलोकोक्‍कल अथवा स्‍ट्रेप्‍टोकोक्‍कल बैक्‍टीरिया के कारण होता है, एलर्जिक कंजेक्टिवायरस धूल और धुएं जैसे एलर्जिक तत्‍वों के कारण होता है और वहीं वायरल कं‍जेक्टिवायरस वायरस के कारण होता है। बैक्‍टीयिरल और वायरल कंजेक्टिवायरस एक व्‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति में तेजी से फैलते हैं। ये दूषित सतह अथवा वस्‍तु के कारण तेजी से फैलते हैं। खासतौर पर अगर आप हाइजीन के कड़े नियमों का पालन न करें, तो इसके फैलने की आशंका और अधिक हो जाती है।

बच्‍चों और वयस्‍को में पिंक आई के लक्षण

  • अत्‍यधिक आंसू आना
  • आंखों में लालिमा, खुजली और सूजन
  • आंखों में लगातार दर्द
  • संक्रमित आंख के पास पपड़ी जम जाना
  • तेज रोशनी से परेशानी होना
  • आंखों से सफेद तरल पदार्थ का स्राव होना (वायरल और एलर्जिक संक्रमण की परिस्थिति में)
  • आंखों से पीलापन और हरे तत्‍व का स्राव (बैक्‍टीरियल संक्रमण के कारण)

आइस पैक

आंखों की सूजन, खुजली और लालिमा कम करने के लिए आइसपैक बेहद मददगार होता है। इस उपाय से संक्रमण का इलाज नहीं होता। इसके लिए एक साफ कपड़े को ठंडे पानी में डुबायें और अतिरिक्‍त पानी को निचोड़ लें। इसके बाद इस कपड़े को आंख के ऊपर रखें। कपड़ा और पानी बदलने के बाद भी इस प्रक्रिया को जारी रखें।

दूध और शहद

गर्म दूध और शहद को बराबर मात्रा में लेकर मिला लें। रूई के फाहे अथवा आई कप की मदद से इस मिश्रण से अपनी आंखें धोयें। आप इस मिश्रण को आई ड्रॉप अथवा कम्‍प्रेस के तौर पर भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इस मिश्रण की कुछ बूंदें आंख में आई ड्रॉप के तौर पर डालें या फिर सिंकाई के लिए कपड़े या रूई को इस मिश्रण में डुबोकर उसे आंखों के ऊपर रखकर सिंकाई करें।

धनिया

अच्‍छी मात्रा में ताजा सूखा धनिया लें और उसे पानी में उबाल लें। छाननी से इस तरल पदार्थ को छान लें और फिर इसे ठंडा होने दें। इस मिश्रण से संक्रमित आंख को धोयें या फिर इससे सिंकाई भी कर सकते हैं। इस उपाय से आंखों की जलन, दर्द और सूजन कम होती है।

 

गर्म सिंकाई

गुलाब, लेवेण्‍डर और कैमोमाइल के तेल से गर्म सिंकाई करने से भी आंख को फायदा होता है। गर्म तेल की कुछ बूंदे एक साफ गर्म कपड़े पर डालें और इसे आंख पर तब तक रखें जब तक कपड़ा ठंडा न हो जाए। इस पांच से दस मिनट तक दिन में तीन-चार बार आजमायें। इस गर्म सिंकाई से परेशानी तो कम होती ही है साथ ही आंखों के संक्रमण को दूर करने में भी मदद मिलती है।

सौंफ

सौंफ को पानी में उबाल लें और पानी को ठंडा होने दें। इसके बाद पानी को निकालकर उससे दिन में दो बार आंख धोयें। इससे दर्द तो कम होगा ही साथ ही लालिमा और जलन भी कम होगी।

सेब का सिरका

एक कप सेब के सिरके में एक कप पानी मिला लें। इस मिश्रण से रूई के फाहे की मदद से संक्रमित आंख को धोयें। सेब का सिरका इस्‍तेमाल करते हुए इस बात का ध्‍यान रखें कि उस पर 'मदर' लिखा हो। मदर सेब का अम्‍ल होता है जो बैक्‍टीरिया से होने वाले संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है।

 

 

शहद

आप शहद को दो प्रकार से इस्‍तेमाल कर सकते हैं। पहला शहद को संक्रमित आंख में डालें। और दूसरा इसका इस्‍तेमाल आंख धोने के लिए करें। इसके लिए तीन चम्‍मच शहद को दो चम्‍मच गर्म पानी में मिलायें। और ठंडा होने पर इस मिश्रण का इस्‍तेमाल करें।

आलू

कच्‍चे आलू का एक टुकड़ा लें और इसके संक्रमित आंख पर लगायें। लगातार तीन रातों तक इस उपाय को आजमायें।

 

हल्‍दी

दो चम्‍मच हल्‍दी पाउडर और एक कप उबला हुआ पानी। इस मिश्रण को गर्म सिंकाई के लिए संक्रमित आंख पर इस्‍तेमाल करें।

 

गेंदा

दो कप गेंदे के फूल के पत्‍तों को एक कप पानी में उबालें और इस मिश्रण को ठंडा होने दें। इस मिश्रण को आंख धोने के लिए इस्‍तेमाल करें। इस मिश्रण को आंख की सिंकाई के लिए भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है। जब मिश्रण गर्म हो उस समय बस एक साफ कपड़े या रूई के फोहे को इस मिश्रण में डुबायें और इससे आंखों पर लगाकर उसकी सिंकाई करें।

एलोवेरा

एलोवेरा का रस आंख धोने और आंखों की सिंकाई दोनों में इस्‍तेमाल हो सकता है। सिंकाई के लिए एक कपड़े अथवा रूई के फोहे को एलोवेरा जूस में डुबायें और इसे संक्रमित आंख पर रख दें। आंख धोने के लिए आधा चम्‍मच एलोवेरा रस को एक कप उबालकर ठंडा किये गये पानी में मिला लें। इसमें आप एक चम्‍मच बोरिक एसिड भी मिला सकते हैं।

आंवला

एक चम्‍मच आंवले का रस और दो चम्‍मच शहद मिलाकर दिन में दो बार पीने से भी पिंक आई में आराम होता है।

 

सब्जियों का रस

कंजेक्टिवायरस में सब्जियों का रस भी बेहद मददगार होता है। 200 मिली पालक के रस को 300 मिली गाजर का रस आपस में मिला लें। इसके अलावा आप 300 मिली गाजर के जूस में 200 मिली अजमोदा का जूस मिलाकर भी पी सकते हैं।

नींबू का रस

नींबू का रस भी कंजेक्टिवायरस में बेहद फायदेमंद होता है। हथेली में नींबू के रस की कुछ बूंदे लें और इसे संक्रमित आंख के बाहरी हिस्‍से पर लगायें। नींबू का रस पांच मिनट तक तो जलन देगा, लेकिन यह पस को बाहर निकालने में मदद करेगा।

नमक

उबलते हुए पानी में थोड़ा सा नमक मिलायें। रूई का फोहे को इस मिश्रण में डुबायें और इसे संक्रमित आंख पर लगायें। यह कंजेक्टिवायरस का सबसे आसान और असरदायक घरेलू उपाय है।

दही

दही भी कंजेक्टिवायरस को दूर करने में मदद करती है। संक्रमित आंख पर दही की पुट्टी लगायें। इससे आपको बहुत आराम होगा।

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English summary

Home Remedy For Pink Eye Conjunctivitis Treatment

Pink eye is an eye infection which is very common among babies, children and adults. Pink eye is also recognized as conjunctivitis. Pink eye is contagious (if it is caused by viral or bacterial infection) so it is common with younger children.
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