आयुर्वेद के अनुसार वजन कम करने के लिए टिप्स

Posted By: Super
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आयुर्वेद अर्थात "लंबी जीविका का विज्ञान" के अनुसार सत्य है कि आयुर्वेदिक उपचार आपको प्रकृति, सरल एवं स्वस्थ जीविका के करीब लाता है। आयुर्वेद में मोटापे का उपचार जीवन शैली की एक बीमारी के रुप में किया जाता है। याद रखें कि आयुर्वेद में कोई शॉर्टकट मार्ग नहीं अपनाया जा सकता।

वजन घटाने के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए इन सिद्धांतों का पालन एक महीने के लिए करें! याद रखें कि सरल व्यंजन और शारीरिक रूप से सक्रिय जीवन शैली फिट व दुबला रहने का रहस्य हैं। ऐसे आयुर्वेदिक उपचार जो असली में काम करते हैं

 1 खान-पान में सादगी:

1 खान-पान में सादगी:

यहां जीने के लिए खाने के वाक्यांश पर जोर दिया गया है। लोगों को कम तेल में ताजा एवं सरल रुप से पकाए गए भोजन को खाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। मेरा विचार है कि खाने के प्रति दृष्टिकोण में परिवर्तन डायट प्रोग्राम का प्रथम कदम है। मानसिक अनुशासन, डायट पर जाने वाले लोगों को अस्वास्थ्यकर भोजन ना खाने की इच्छा शक्ति प्रदान करता है। इसलिए आसानी से हज़म हो जाने वाले व्यंजन जैसे चावल, दलिया, उबली हुई सब्जियां, सब्जियों के सूप व आटे से बने पकवानों के विकल्पों का चयन करें।

2 स्नैक:

2 स्नैक:

तले हुए या चिकने व्यंजनों का सेवन ना करें। इसमें केरल में पारंपरिक रुप से बनाए जाने वाले केले के चिप्स भी शामिल हैं। पापड को तेल में तलने के बजाय तवे पर सेंके।

3 उच्च फाइबर युक्त अनाज:

3 उच्च फाइबर युक्त अनाज:

यावम चावल या उबली हुई सब्जियों के साथ उच्च फाइबर युक्त जौ का सेवन करें। इन खाद्य पदार्थों का सामान्य रुप से सेवन भी तृप्ति प्रदान करता है। इन्हें अनिवार्य रुप से दोपहर या रात के खाने के साथ खाएं। इसके अलावा कभी-कभी जौ एवं दलिये को भी अपने आहार में शामिल करें। अतः बाहर के व्यंजनों का या डिब्बा बंद भोजन का सेवन ना करें।

 4 मिठाई और डेसर्ट:

4 मिठाई और डेसर्ट:

चाय में चीनी के अलावा अन्य किसी भी मिठाई को ना खाएं। चूंकि यावम चावल रक्त में शर्करा को स्थिर बनाए रखता है, जिसके कारण आपके शरीर को ग्लूकोस की कमी महसूस नहीं होती और ना ही आपको भूख लगती है।

 5 प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ:

5 प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ:

अपने शरीर की प्रोटीन की जरुरत को सोया, चने की दाल, कुलथी, हरे चने तथा अन्य दालों के सेवन से पूर्ण करें। आयुर्वेद में मांसाहारी भोजन प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन निश्चित रुप से मुर्गे तथा उसकी अन्य कई नस्लों को खाने की मनाही है। छोटी मछली को तल कर खाने के बजाय करी के रुप में पका कर खाने की अनुमति है।

 6 छाछ तथा पानी:

6 छाछ तथा पानी:

दही के बजाय छाछ का सेवन बेहतर होगा; इसके अलावा चाय व कॉफी का सेवन भी कर सकते हैं। स्वयं को हाइड्रेटड तथा भूख के बचने के लिए हर रोज कम से कम 1500ml गुनगुना पानी पिएं। गुनगुना पानी पेट में लंबे समय तक रहता है, जिसके कारण भूख भी देर से लगती है।

7 अपने पसंदीदा व्यंजनों से परहेज करें:

7 अपने पसंदीदा व्यंजनों से परहेज करें:

अगर आपको चावल पसंद हैं, तो अपने आहार में चावल के बजाय आटे के डोसे को या रोटी को शामिल करें, इस तरह आप स्वभाविक रुप से कम खाएंगे। अगर आप रोटी खाने वालों में से है तो आपके लिए चावल के बने व्यंजन मददगार साबित होंगे।

8 कैलोरी की गणना ना करें:

8 कैलोरी की गणना ना करें:

कैलोरी की गणना करने के बजाय अपने जीवन तथा अपने खान-पान में अनुशासन लाएं। आपके खान-पान की आदतों में तबदीली तथा खाने के प्रति रवैया आपके वजन को बनाए रखने में तथा उसे कम करने में आपकी मदद करेंगे।

इनके अलावा....

इनके अलावा....

इनके अलावा सुबह जल्दी उठना, दिन में ना सोना या देर रात तक टीवी ना देखने जैसे जीवन शैली के नियम भी मददगार सिद्ध होंगे।

English summary

Tips for weight loss according to ayurveda

Being overweight is treated as a lifestyle illness in Ayurveda. Remember, with Ayurveda, there are no shortcuts. Here are tips for weight loss according to ayurveda.
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