रिसर्च: सोना बाथ लो डिमेंशिया और अल्‍जाइमर से दूर रहो

एक रिसर्च में यह बात सामने आई कि सोना बाथ लेने से डिमेंशिया के खतरों के भी टाला जा सकता है।

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सोना बाथ लेने के बाद बहुत ही रिलेक्‍स और ताजगी का अनुभव होता है कुछ लोग वजन कम करने के लिए भी सोना बाथ का आनंद लेते हैंं।

लेकिन हाल ही में हुए एक रिसर्च में यह बात सामने आई कि सोना बाथ लेने से डिमेंशिया के खतरों के भी टाला जा सकता है। इसके अलावा अल्‍जाइमर होने से भी बचा जा सकता है। आइए जानते है कि इस रिसर्च में और क्‍या बाते सामने आई है।

66 फीसदी तक डिमेंशिया का खतरा कम

20 सालों से 2000 से ज्‍यादा व्‍यक्तियों पर किए स्‍टडी में रिसर्चर ने पाया है कि अगर कोई व्‍यक्ति एक हफ्ते में 7-4 बार सोना बाथ लेता है तो इससे 66 फीसदी डिमेंशिया के खतरे को टाला जा सकता है। ज्‍यादा से ज्‍यादा सोना बाथ लेकर डिमेंशिया के खतरों को टाला जा सकता है।

 

कार्डिक अटैक से बच सकते हैं

रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि ज्‍यादा से ज्‍यादा सोना बाथ लेने से सांइ‍टिफिक तरीके से अचानक से कार्डि‍क अटैक आने और उससे मौत होने की सम्‍भावनाओं को कम किया जा सकता है । ये अटैक कोरोनरी धमनी रोग और अन्‍य हृदय बीमारियों की वजह से होता है।

 

याददाश्‍त भी बढ़ाता है

रिसर्च में बताया गया है कि सोना बात न सिर्फ हृदय बल्कि याददाश्‍त को भी मजबूत बनाता है। रिसर्च करने वाले रिसर्चर ने बताया कि जैसा कि सब जानते है कि cardiovascular शरीर के साथ मस्तिष्‍क को भी प्रभावित करती है। नहाने के दौरान तंदुरस्‍ती और रिलेक्‍सेशन का अनुभव होता है। सोना बाथ से मस्तिष्‍क की तंत्रिकाओं को भी सुकून मिलता है। सोना बाथ से अल्‍जाइमर जैसी बीमारियों और इसके दूसरे प्रकार को भी रोका जा सकता है।

तीन ग्रुप में हुआ सर्वे

यह सर्वे तीन अलग-अलग ग्रुप में हुआ था। जिसमें से एक ग्रुप हफ्ते में एक बार, एक ग्रुप हफ्ते में दो से तीन बार और एक ग्रुप जो हफ्ते में चार से सात बार सोना बाथ लेता था।

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Story first published: Saturday, February 25, 2017, 15:48 [IST]
English summary

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