चमकदार दांतों के लिए ऐसे बनाएं घरेलू टूथपेस्‍ट और बचें बीमारियों से

बाज़ार में मिलने वाली अधिकांश टूथपेस्ट केमिकल्‍स, खाने में मिलाएं जाने वाले रंग, स्वीटनर्स और कृत्रिम फ्लेवर्स का मिश्रण होती हैं।

By: Radhika Thakur
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मार्केट में मिलने वाले सभी टूथपेस्ट एक समान तरीके से नहीं बनाई जाती। बल्कि बाज़ार में मिलने वाली अधिकांश टूथपेस्ट सोडियम लॉरयल सल्फेट, फ्लोराइड, प्रोपाइलिन ग्लाइकोल, खाने में मिलाएं जाने वाले रंग, स्वीटनर्स और कृत्रिम फ्लेवर्स का मिश्रण होती हैं।

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ये केमिकल्‍स आपके लिए नुकसानदेय हो सकते हैं। इन सभी केमिकल्स का उपयोग टालने के लिए इस आर्टिकल के जरिए हम आपको होममेड टीथ व्हाइटनिंग पेस्ट बनाने का तरीका बता रहे हैं।

99% हानिकारक तत्‍व

आश्चर्यजनक रूप से सोडियम फ्लोराइड जो अधिकांश टूथपेस्ट में सबसे अधिक सक्रिय तत्व होता है, वह वास्तविक उत्पाद में केवल 1% होता है। टूथपेस्ट में उपस्थित अन्य 99% तत्व वास्तव में स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं। हमें इस बारे में तब जानकारी मिलती है जब हम टूथपेस्ट पर लगा हुआ लेबल देखते हैं, जिस पर लिखा होता है कि आपको इसे निगलना नहीं चाहिए।

रहिए सावधान

आपको सोडियम लॉरयल (एसएलएस) और सोडियम लॉरेट सल्फेट (एसएलईएस) से सावधान रहना चाहिए। ये घटक टूथपेस्ट को झागदार बनाते हैं।

ये साबुन, हैंड क्रीम, शैंपू और माउथवॉश में भी पाए जाते हैं।इनका उपयोग कीट और खरपतवार नियंत्रण उत्पादों, इंजन डिग्रीसर और कार धोने के लिए उपयोग में लाये जाने वाले शैंपू बनाने में किया जाता है। शोध अध्ययनों के अनुसार इसके कुछ दुष्परिणाम इस प्रकार हैं:

- त्वचा और आंखों में जलन
- म्यूटेशन और कैंसर की संभावना
- अंग विषाक्तता
- प्रजनन और विकास विषाक्तता
- एंडोक्राइन बाधा
- बायोमैकेनिकल या कोशिकीय परिवर्तन

अन्य केमिकल्स की तरह अधिक समय तक इनका उपयोग करने से नुकसान होने की संभावना होती है। समय के साथ इन केमिकल्स का शरीर पर प्रभाव दिखने लगता है।

 

कृत्रिम स्वीटनर्स


ये टूथपेस्ट को बहुत आकर्षक, स्वादयुक्त और मीठा बनाते हैं। हालांकि इसमें स्वाद लाने के लिए कृत्रिम स्वीटनर्स मिलाये जाते हैं जो वांछनीय हैं। कृत्रिम स्वीटनर्स में एसपारटेम होता है जो सोडे में पाया जाता है। इससे एलर्जिक रिएक्शन जैसे सिरदर्द और मुंह के उतकों और मसूड़ों में जलन आदि समस्याएं हो सकती हैं।

Blue #1 खाने का रंग


नीला और हरा रंग बनाने के लिए कई टूथपेस्ट खाने के रंग का उपयोग करते हैं। खाने में मिलाये जाने वाले रंग विवाद का विषय हैं और ये कोल टार से बनाये जाते हैं। एक शोध के अनुसार नीला #1 के कारण चूहों में किडनी का ट्यूमर पाया गया था ।

फ्लोराइड

यहां तक कि फ्लोराइड जो दांतों की रक्षा करता है, उस पर भी एफडीए की ओर से चेतावनी का लेबल लगा हुआ होता है जिसके अनुसार, "यदि ब्रश करते समय इसकी आवश्कता से अधिक मात्रा निगल लें तो तुरंत विष नियंत्रण से संपर्क करें या चिकित्सीय सहायता लें। 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को इससे दूर रखें।"

 

व्हाइटनर्स के बारे में


टूथपेस्ट के साथ साथ कई प्रकार के व्हाइटनर्स भी मिलते हैं जो दांतों से दाग धब्बे निकालने का दावा करते हैं। अमेरिका के लोग अपने दांतों को सफ़ेद रखने के लिए प्रतिवर्ष कई लाख रूपये खर्च कर देते हैं।
दुर्भाग्य से इन पदार्थों में बहुत तीव्र ब्लीचिंग पदार्थ होते हैं जिससे मसूड़ों में जलन होती है और दांतों के इनेमल को नुकसान पहुँचता है।

घर में ही नॉन टॉक्सिक टीथ व्हाइटनिंग पेस्ट बनाएं

अनावश्यक केमिकल्स से बचने के लिए घर पर ही टीथ व्हाइटनिंग पेस्ट बनायें। इससे आपके दांत न केवल साफ़ होंगे बल्कि वे सफ़ेद होकर चमकने लगेंगे।

सामग्री:


1/4 कप बेकिंग सोडा
1/3 कप हाइड्रोजन पेरोक्साइड
पेपरमिंट एसेंशियल ऑइल 4 बूँदें
पुदीने का तेल 3 बूँदें

निर्देश:

- सभी सामग्री और जार लें।

- बेकिंग सोडा और हाइड्रोजन पेरोक्साइड को मापें।
- बेकिं सोडा को ध्यान पूर्वक जार में डालें और हाइड्रोजन पेरोक्साइड डालें। अच्छे से मिलाएं।.
- एसेंशियल ऑइल डालें और अच्छे से मिलाएं।

हर बार उपयोग करने से पहले अच्छी तरह हिला लें। इस मिश्रण से सप्ताह में केवल 2 से 3 दिन दांतों को ब्रश करें क्योंकि बेकिंग सोडा बहुत खुरदुरा होता है।

 

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Story first published: Wednesday, February 15, 2017, 12:28 [IST]
English summary

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not all toothpaste is created equal. In fact, most of the commercial brands that can be found on the market are a bit more than a mixture chemicals food dyes, sweeteners, and flavors that are artificial.
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