आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में ऐसे बढ़ाएं शरीर की प्रतिरोधक क्षमता

कई बार आप भीतर से बिलकुल स्वस्थ महसूस कर रहे होते हैं लेकिन थकान के कारण आपकी पूरी शक्ति ख़त्म हो जाती है. इसका मतलब है कि आपके शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कमज़ोर है.

By: Moulshree Kulkarni
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कई बार आप भीतर से बिलकुल स्वस्थ महसूस कर रहे होते हैं लेकिन थकान के कारण आपकी पूरी शक्ति ख़त्म हो जाती है. इसका मतलब है कि आपके शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कमज़ोर है. जब सर्दियाँ आती हैं आपकी प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो जाती है.

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आयुर्वेद के अनुसार यदि आपकी प्रतिरोधक क्षमता कम है तो आपके शरीर में जहरीले पदार्थ (अमा) बढ़ने की सम्भावना अधिक हो जाती है.

अतः बहुत ज़रूरी है कि आप अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढाने के लिए कुछ ज़रूरी कदम उठायें. इस लेख में हम आपको आयुर्वेद से जुड़े कुछ तरीके बताएँगे जो आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढाने में मदद करेंगे. आयुर्वेद के अनुसार प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए सबसे ज़रूरी है सही खान-पान.

यहां आप कुछ तरीके जान सकते हैं जिनसे आप अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं. आयुर्वेद में प्रतिरोधक क्षमता को 'ओजस' कहा जाता है. और यह हमारे शरीर की रक्षा करने के लिए बहुत ही आवश्यक माना जाता है.

साथ ही अमा यानि हानिकारक पदार्थों को शरीर से बहार करना भी आपकी प्रतिरिधक क्षमता के लिए बहुत आवश्यक है. प्रत्येक मौसम में शरीर अलग तरह से व्यव्हार करता है और गर्मियों से सर्दी की ओर बदलते मौसम का आपके पाचन तंत्र (जठराग्नि) पर बहुत गहरा असर पड़ सकता है.

आपको अपने खान-पान और पूरे स्वास्थ का ख़ास ध्यान रखने की आवश्यकता है, ताकि बदलते मौसम की वजह से आप बीमारियों को न्योता ना दे बैठें.

सबसे अच्छा तरीका है वर्षों पुराने आयुर्वेद का पालन. आयुर्वेद के अनुसार सर्दियाँ आपके शरीर को तंदरुस्त बनाने के लिए सबसे अच्छा समय है.

शरीर के बेहतर मेटाबोलिज्म और आयु बढाने के लिए आयुर्वेद सबसे बेहतरीन तरीका है. आपके सभी सवालों के जवाब इस लेख में आपको मिल जायेंगे. जानिये कैसे आप आयुर्वेद से अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं.

1. जीर्णोद्धार करने वाली आयुर्वेदिक जड़ीबूटियाँ:

इन जड़ीबूटियों में अश्वगंधा, आवंला, तुलसी, त्रिफला जैसी बूटियाँ होती हैं. इनको चवनप्राश अथवा चाय के रूप में लिया जा सकता है. इन बूटियों से शरीर में एंटीबॉडी बनती हैं जिससे आपका प्रतिरोध तंत्र मज़बूत होता है.

2. तेल डालकर गुनगुने पानी से स्नान:

आयुर्वेद के अनुसार प्रतिरोधक क्षमता बढाने का एक और तरीका सुबह गुनगुने पानी से स्नान है. इस पानी में आप चाहें तो सुगन्धित तेल जैसे चमेली, गुलाब या तुलसी का तेल इत्यादि डाल सकते हैं

3. सुबह गुनगुने तेल से मालिश:

सुबह नहाने से पहले गुनगुने तेल से अपनी मालिश करने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. सूरजमुखी, तिल अथवा सरसों के तेल से सुबह मालिश करने से मासपेशियाँ मज़बूत होती हैं. साथ ही खून का संचार भी बढ़ता है.

4. खाने में मसालों का प्रयोग:

भोजन में हमेशा प्रतिरोधक क्षमता बढाने वाले मसालों का प्रयोग करना चाहिए. जीरा, हल्दी, धनिया, अदरक और काली मिर्च जैसे मसाले खाने में रोज़ प्रयोग करने चाहिए. इनसे आप साधारण सर्दी जुखाम, और कीटाणुओं से होने वाली बीमारियों से बच सकते हैं.

5. गरम खाना खाएं:

हल्का और गरम भोजन सर्दियों में आपके पाचन तंत्र और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत ज़रूरी है. गरम भोजन कीटाणुओं से लड़ने में मदद करता है.

6. ठंडा भोजन अथवा पेय पदार्थ ना लें:

सर्दियों में ठंडा भोजन आपके पाचन जूस को कम करता है जिससे पेट में कीटाणु पनपने की सम्भावना होती है. अतः उससे परहेज़ करना ही बेहतर है.

7. डिब्बाबंद और तले भोजन से परहेज करें:

सर्दियों में ज़रूरी है कि आप अपनी जीभ पर थोड़ा सा नियंत्रण करें. तले और डिब्बाबंद भोजन से शरीर में ‘अमा' एकत्रित हो सकता है.

8. भरपूर नींद लें:

आयुर्वेद में भरपूर नींद को स्वास्थ के लिए बहुत आवश्यक बताया गया है. सर्दियों में खूब सारी नींद लेना आपको कीटाणुओं से लड़ने में मदद करता है और आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढाता है. इससे आपका शारीरिक और मानसिक तनाव भी कम होता है.

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Story first published: Wednesday, January 11, 2017, 9:32 [IST]
English summary

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