"नो ब्रा डे" पर जानिये ब्रेस्‍ट कैंसर से जुड़ी जरुरी बातें

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आज 13 अक्‍टूबर को दुनिया भर में ब्रेस्‍ट कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिये "नो ब्रा डे" मनाया जा रहा है। इसमें शरम की कोइ बात नहीं है क्‍योंकि भारत में ब्रेस्‍ट कैंसर की बीमारी बड़ी तेजी के साथ पैर पसार रही है और अगर आप इस बात पर चर्चा करने से मुंह मोड़ लेंगी तो यह आपके लिये खतरनाक साबित हो सकता है।

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ब्रेस्‍ट कैंसर की बीमारी ना केवल रोगी बल्‍कि उसकी जिंदगी से जुडे़ घर-परिवार के लोंगो की भी जिंदगी को भी जड़ से उखाड़ फेकती है। बोस्टन के हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अनुसार, 2012 से 2030 तक भारत को ब्रेस्ट कैंसर पर 20 अरब डॉलर खर्च करने की जरूरत है।

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क्‍या आप जानती हैं कि भारत में हर साल ब्रेस्ट कैंसर के 1.3 लाख नए मामले सामने आते हैं। एक दशक पहले तक यह आंकड़ा 54,000 था। आइये इस नो ब्रा डे के दिन हम ब्रेस्‍ट कैंसर के कुछ मुख्‍य बिंदुओं पर चर्चा करेंगे और आप से अनुरोध करेंगे कि अपनी जिंदगी से जुड़ी जितनी भी महिलाएं हैं उन्‍हें ब्रेस्‍ट कैंसर के लक्षणों और बचाव के बारे में जरुर अवगत कराएं।

यंग लड़कियों को भी है ब्रेस्‍ट कैंसर का खतरा

breastcancerindia.net के हालिया अध्ययन के अनुसार यह जानकारी मिली है कि आज कल ब्रेस्‍ट कैंसर की बीमारी 25 से 40 साल की उम्र की महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है। यह काफी चिंता की बात है।

ब्रेस्‍ट कैंसर का मुख्‍य कारण

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर का मुख्य कारण है - बच्चे नहीं पैदा करना, काफी उम्र में बच्चे पैदा करना, स्‍तनपान नहीं कराना, वजन में अत्यधिक वृद्धि और अक्सर शराब का सेवन करना।

बडे़ शहरों की महिलाएं हैं सबसे ज्‍यादा खतरे में

मुंबई, दिल्‍ली, बैंगलोर, भोपाल, चिन्‍नई और अहमदाबाद आदि जैसे महानगरों में ब्रेस्‍ट कैंसर दूसरी सबसे बड़ी और आम बीमारी उभरती नज़र आ रही है।

एंजेलीना जोली और कैंसर की लड़ाई

'माय मेडिकल चॉइस' नाम के इस लेख में एंजेलीना ने बताया है कि उन्होंने कैंसर के डर से अपने ब्रेस्‍ट हटवा दिये। एंजेलीना का कहना है कि पहले वह इस बात को गुप्त रखना चाहती थीं, लेकिन महिलाओं में कैंसर के खतरे को ले कर जागरूकता फैलाने के लिए वह इसे सार्वजनिक कर रही हैं।

महिलाओं में अभी भी है जानकारी की कमी

भारत में अभी भी महिलाओं को डॉक्‍टर दृारा अपने ब्रेस्‍ट की जांच करवाने पर शर्म आती है। इसलिये अधिक्‍तर महिलाएं ब्रेस्‍ट कैंसर के गंभीर विषय को हल्‍के में लेती हैं। महिलाएं तब तक जागरुक नहीं होती जब तक कि उनके परिवार में इस बीमारी का कोई शिकार नहीं होता।

स्‍तन कैंसर से बचने के लिये करें व्‍यायाम

अध्ययन में पता चला है कि स्तन कैंसर के जो मरीज सप्ताह में ढाई घंटे नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम किया करते हैं, उनकी जान का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

मैमोग्राफी (स्तन चित्रण)

महिलाएं अपने ब्रेस्‍ट का परीक्षण, मैमोग्राफी से करवा सकती हैं। इसका उपयोग रोग की पहचान करने और उसका पता लगाने के उपकरण के रूप में किया जाता है। मैमोग्राफी का लक्ष्य स्तन कैंसर का शुरूआती दौर में ही पता लगाना है। इसमें ज्‍यादा खर्च नहीं होता।

स्‍तनपान

स्‍तनपान करवाने से ना केवल बच्‍चे की ही सेहत सुधरती है बल्कि इससे मां को एस्‍ट्रोजेन के लेवल को कम करने में भी मदद मिलती है। रिसर्च के मुताबिक अगर शहरों कि महिलाएं अपने बच्‍चे को स्‍तनपान करवाएं तो उनके ब्रेस्‍ट कैंसर होने का खतरा टल जाता है।

स्‍तन कैंसर के लक्षण

स्‍तन में गांठ होना, निप्‍पल का लाल पड़ना या उसमें से डिस्‍चार्ज होना, ब्रेस्‍ट में सूजन आना, स्‍तन को दबाने में दर्द होना आदि।

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Story first published: Tuesday, October 13, 2015, 16:22 [IST]
English summary

october 13-2015 no bra day

October is also a month which is dedicated to women who suffer from this dreadful disease, breast cancer. Being Breast Cancer Awareness Month, it is a reminder for all women to be screened for cancer, notice the signs and symptoms early and get yourself treated in time.
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