सुंदरकांड के पाठ से ग्रहों के दोष को दूर करके बनाएं बिगड़े काम

Posted By:
Subscribe to Boldsky

हनुमान चालीस और सुंदरकांड का पाठ करवाने से बड़े से बड़े मुश्किलों का हल निकाला जा सकता है। हिन्दू धर्म की प्रसिद्ध मान्यता के अनुसार सुंदरकांड का पाठ करने वाले भक्त की मनोकामना जल्द पूर्ण हो जाती है। सुंदरकांड, गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखी गई रामचरितमानस के सात अध्यायों में से पांचवा अध्याय है।

रामचरित मानस के सभी अध्याय भगवान की भक्ति के लिए हैं, लेकिन सुंदरकांड का महत्व अधिक बताया गया है। जहां एक ओर पूर्ण रामचरितमानस में भगवान के गुणों को दर्शाया गया है, उनकी महिमा बताई गई है लेकिन दूसरी ओर

रामचरितमानस के सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है। इसमें भगवान राम के गुणों की नहीं बल्कि उनके भक्त हनुमान के गुणों और उसकी विजय की बात बताई गई है।

आत्‍मविश्‍वास और मनोबल

आत्‍मविश्‍वास और मनोबल

किसी बड़ी परीक्षा में सफल होना हो तो परीक्षा से पहले सुंदरकांड का पाठ अवश्य करना चाहिए। विद्यार्थियों को सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। यह पाठ उनके भीतर आत्मविश्वास को जगाएगा और उन्हें सफलता के और करीब ले जाएगा।
आपको शायद मालूम ना हो, लेकिन यदि आप सुंदरकांड के पाठ की पंक्तियों के अर्थ जानेंगे तो आपको यह मालूम होगा कि इसमें जीवन की सफलता के सूत्र भी बताए गए हैं।

आत्‍मविश्‍वास और मनोबल

आत्‍मविश्‍वास और मनोबल

किसी बड़ी परीक्षा में सफल होना हो तो परीक्षा से पहले सुंदरकांड का पाठ अवश्य करना चाहिए। विद्यार्थियों को सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। यह पाठ उनके भीतर आत्मविश्वास को जगाएगा और उन्हें सफलता के और करीब ले जाएगा।
आपको शायद मालूम ना हो, लेकिन यदि आप सुंदरकांड के पाठ की पंक्तियों के अर्थ जानेंगे तो आपको यह मालूम होगा कि इसमें जीवन की सफलता के सूत्र भी बताए गए हैं।

इस समय करें सुंदरकांड का पाठ

इस समय करें सुंदरकांड का पाठ


यहां तक कि यह भी कहा जाता है कि जब घर पर रामायण पाठ रखा जाए तो उस पूर्ण पाठ में से सुंदरकांड का पाठ घर के किसी सदस्य को ही करना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक शक्तियों का प्रवाह होता है।

ग्रहों के दोष को करता है दूर

ग्रहों के दोष को करता है दूर

ज्योतिष के नजरिये से यदि देखा जाए तो यह पाठ घर के सभी सदस्यों के ऊपर मंडरा रहे अशुभ ग्रहों छुटकारा दिलाता है। यदि स्वयं यह पाठ ना कर सकें, तो कम से कम घर के सभी सदस्यों को यह पाठ सुनना जरूर चाहिए। अशुभ ग्रहों का दोष दूर करने में लाभकारी है सुंदरकांड का पाठ।

ऐसे करें सुंदर कांड

ऐसे करें सुंदर कांड

सुंदर कांड का पाठ विशेष रुप से शनिवार तथा मंगलवार को करने से सभी संकटों का नाश हो जाता है। परंतु आवश्‍यकता होने पर इसका पाठ कभी भी किया जा सकता है। पाठ करने से पहले भक्‍त को स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के निकट किसी मंदिर घर पर एक चौकी पर हनुमान जी की तस्‍वीर विराजमान कर स्‍वयं एक आसान पर बैठ जाएं।

इसके बाद बजरंग बली की प्रतिमा चित्र को सादर फूल फल तिले चंदन आदि पूजन सामग्री अर्पण करनी चाहिए। यदि किसी हनुमान मंदिर में पाठ कर रहें है तो उसकी हनुमान प्रतिमा को चमेली का तेल मिश्रित सिंदूर भी चढ़ा सकते हैं। देसी घी का दीपक जलाना चाहिए। इसके बाद भगवान श्री गणेश, शंकर पार्वती भगवान राम सीता लक्ष्‍मण तथा हनुमान जी को प्रणाम कर गुरुदेव तथा पितृदेवों का स्‍मरण करें।

तत्‍पश्‍चात हनुमानजी को मन ही मन ध्‍यान करते हुए सुंदरकांड का पाठ आरम्‍भ करें। पूर्ण होने पर हनुमान जी की आरती करें, प्रसाद चढ़ाएं तथा वहां मौजूद सभी लोगों में बांटे। आपके सभी बिगड़े हुए काम तुरंत ही पूरे होंगे।

Read more about: hindu, हिंदू
English summary

importance of reading sunderkand path

The SunderKand which is a chapter in the 'Ram-Charit-Maanas', penned by Goswami Tulsidas is considered to be as auspicious to read.
Please Wait while comments are loading...