मोकुसेन हिकी तम्बा के एक प्रदेश में एक मंदिर में रहता था। उसका एक साथी उसके पास आया और अपनी पत्नी के लोभी स्वाभाव के बारे में शिकायत की। मोकुसेन ने तब अपने साथी की पत्नी से मुलाकात की।
उसने उस औरत के चेहरे के पास अपनी मुट्ठी बांधी और पूछा "अगर मेरी मुट्ठी ऐसी होती तो तुम इससे क्या समझती?"
"यह एक विकलांगता है" औरत ने कहा।
उसने फिर अपना हाथ सपाट उसके चेहरे पर रखते हुए पूछा "अगर ये ऐसा होता?"
"ये अब भी विकलांगता है पर दूसरे तरह की," औरत ने जवाब दिया। तुम एक अच्छी पत्नी हो अगर तुम इतना समझ सकती हो" मोकुसेन इतना कहकर वहां से चला गया। उसके बाद से साथी की पत्नी ने अपने पति के साथ बांटने और बचाने में सहयोग किया।





















