कई मम्मियां शिकायत करती हैं कि उनके बच्चे को दूध पीना बिल्कुल भी पसंद नहीं है। दूध न पीने की वजह से बच्चों में
बच्चों के सिर पर एक्ज़ाम का फीवर फिर से आ धमका है। जितने दिनों के लिए एक्ज़ाम चलता है उतने दिन न केवल बच्चे
माता पिता अपने ज्यादा लाड़-प्यार से बच्चों को बिगाड़ देते हैं क्योंकि बच्चे उस प्यार का नजायज फायदा उठाने लगते हैं। देखने में यह
जिन मां-बाप के दो बच्चे होते हैं उनको अपने दोनों बच्चों पर एक साथ काफी ध्यान देना पड़ता है। पर जब बच्चे आपस में
जब बच्चा दो साल का होता है तो, आप जो महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं उनमें से एक अपने बच्चे के लिए अच्छा प्री-स्कूल चुनना
कई माताएं चिंता करती हैं कि उनके बच्चे कमजोर और देखने में अस्वस्थ्य हैं। साथ ही जब बच्चे बड़े होने लगते हैं तब सही
अगर आपके बच्चे अधिक टीवी देखते हैं तो उन्हें केवल दूर से देखते रहने से कोई फायदा नहीं होगा। अक्सर हर घर में यही
आपके घर में या फिर आपके आस-पडोस में कोई ऐसा बच्चा जरुर होगा जो बात-बात पर हकलाता होगा। बच्चों में हकलाहट सामान्य बात है,
आपके बच्चे को सुबह स्कूल जल्दी जाने के लिए सुबह 6 बजे उठना होता है, जाहिर है उसके लिए बच्चे को रात में जल्दी
लंदन। बढ़ती आबादी को देखते हुए भले ही यह विचार समझदारी भरा नजर न आए लेकिन एक अध्ययन के मुताबिक चार या इससे अधिक
नयी दिल्ली, गोल मटोल बच्चे देखने में भले ही अच्छे लगते हों, लेकिन बचपन में मोटापा आगे जाकर मधुमेह और हदय संबंधी कई बीमारियों