Viral Fever: बारिश और धूप के बीच लगातार बदलते मौसम का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ने लगता है। इसी वजह से इन दिनों मौसमी बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह संक्रमण अक्सर वायरस के कारण होता है और इसमें बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में समय रहते सावधानी बरतना और बचाव के उपाय अपनाना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं मौसमी बुखार होने के कारण और इससे बचने के आसान तरीके।

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मौसमी बुखार क्यों होता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मौसमी बुखार का सबसे बड़ा कारण इन्फ्लूएंजा वायरस होता है। मौसम में बदलाव के दौरान यह वायरस अधिक सक्रिय हो जाता है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से फैल सकता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है। संक्रमण होने पर समय पर लक्षणों की पहचान और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।

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वायरल फीवर के लक्षण

वायरल फीवर या फ्लू होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यदि मौसम बदलने के साथ ये परेशानियां महसूस हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
99°F से 103°F या उससे अधिक बुखार आना
ठंड लगना और कंपकंपी होना
शरीर में दर्द और मांसपेशियों में अकड़न
सिरदर्द और गले में खराश
नाक बहना या बंद होना
कमजोरी और अधिक थकान महसूस होना
ज्यादा पसीना आना
भूख कम लगना
शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होना

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मौसमी बुखार होने पर क्या करें?

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश लोगों में वायरल फीवर कुछ दिनों में आराम, पर्याप्त पानी और सही देखभाल से ठीक हो जाता है। यदि बुखार या शरीर में दर्द ज्यादा हो, तो डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटामोल जैसी दवा ली जा सकती है। इस दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी, सूप या अन्य तरल पदार्थ पीना और भरपूर आराम करना शरीर को जल्दी ठीक होने में मदद करता है। अगर तेज बुखार लंबे समय तक बना रहे या सांस लेने में दिक्कत जैसी गंभीर समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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वायरल फीवर और फ्लू से बचाव के उपाय

विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल और सब्जियां अपने आहार में शामिल करें।
साबुन से नियमित रूप से हाथ धोएं और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें।
भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत पड़ने पर मास्क पहनें।
घर और कार्यस्थल को साफ-सुथरा रखें तथा पर्याप्त हवा आने-जाने की व्यवस्था रखें।
धूल, धुएं और एलर्जी बढ़ाने वाले तत्वों से दूरी बनाए रखें।
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ पीते रहें, ताकि शरीर हाइड्रेट रहे।
पर्याप्त नींद लें और नियमित व्यायाम करें, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।