Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार महीने के लिए योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं, जिसके साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ हो जाता है। इस अवधि में विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते और श्रद्धालु भक्ति, साधना, जप-तप तथा दान-पुण्य पर अधिक ध्यान देते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन पूरे विधि-विधान से व्रत और भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। आइए, जानते हैं देवशयनी एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और भगवान को सुलाने की विधि -
देवशयनी एकादशी 2026 की सही तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9 बजकर 14 मिनट से शुरू होगी और 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 36 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर इस बार देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। वहीं, व्रत रखने वाले श्रद्धालु 26 जुलाई को सुबह 5:38 बजे से 8:22 बजे के बीच पारण कर सकते हैं।
देवशयनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
देवशयनी एकादशी के दिन पूजा-पाठ और भगवान विष्णु की आराधना के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:16 बजे से 4:57 बजे तक रहेगा, जिसे पूजा और ध्यान के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक रहेगा। इसके अलावा संध्या पूजन का शुभ समय शाम 7:17 बजे से रात 8:19 बजे तक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ मुहूर्तों में पूजा और व्रत का पालन करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु को कैसे सुलाएं?
देवशयनी एकादशी के दिन शाम के समय पूजा करने के बाद भगवान विष्णु को विश्राम कराया जाता है। सबसे पहले भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर की विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद एक साफ और सुंदर आसन या छोटी शैया तैयार करें और उस पर भगवान को विराजमान करें। फिर विष्णु मंत्र या भजन गाते हुए भगवान से चार महीने के लिए योगनिद्रा में जाने की प्रार्थना करें। इसके बाद भगवान को तुलसी दल, फल, मेवे और मिष्ठान का भोग लगाएं। कई श्रद्धालु इस अवसर पर भजन-कीर्तन और जागरण भी करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु को इस तरह विश्राम कराने और उनकी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
देवशयनी एकादशी पर व्रत और दान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है। श्रद्धा और नियम के साथ रखा गया यह व्रत मन को शांति देने के साथ जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है। इस दिन पूजा के साथ दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, मौसमी फल, जल से भरा घड़ा या अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा देने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, पीले रंग की वस्तुएं जैसे चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, पीले फल और मिठाई का दान भी शुभ माना जाता है। श्रद्धापूर्वक किए गए इन कार्यों से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
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