National Doctor's Day 2026: कहा जाता है कि डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होते हैं। वे न सिर्फ मरीजों का इलाज करते हैं, बल्कि उसमाज में डॉक्टर्स के महत्वपूर्ण योगदान और सेवा भावना को सम्मान देने के लिए भारत में हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस (National Doctor's Day 2026) मनाया जाता है। यह दिन उन चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर होता है, जो दिन-रात लोगों की सेहत की रक्षा में जुटे रहते हैं। ऐसे में, आइए जानते हैं कि राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस क्यों मनाया जाता है, इसका इतिहास क्या है और इस वर्ष इसकी थीम क्या रखी गई है -

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1 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस?

भारत में हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया जाता है। इस तारीख को चुनने के पीछे एक खास वजह है। दरअसल, यह दिन देश के प्रसिद्ध चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि, दोनों से जुड़ा हुआ है। उनका जन्म 1 जुलाई 1882 को हुआ था, जबकि 1 जुलाई 1962 को उनका निधन हुआ था। डॉ. बी. सी. रॉय ने चिकित्सा और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया था। उन्होंने लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए और अपने जीवन को समाज की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। यही कारण है कि उन्हें भारत के महान चिकित्सकों में गिना जाता है।

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राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस का इतिहास

भारत में राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस पहली बार वर्ष 1991 में मनाया गया था। तब से हर साल 1 जुलाई को डॉक्टरों की मेहनत, सेवा और समाज के प्रति उनके योगदान को सम्मान देने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टरों की भूमिका और महत्व के बारे में भी जागरूक किया जाता है।

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राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस 2026 की थीम क्या है?

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस 2026 की थीम है, "मास्क के पीछे: डॉक्टरों का ख्याल कौन रखता है?"। इस थीम के जरिए लोगों का ध्यान डॉक्टरों की जिंदगी की उन चुनौतियों की ओर दिलाया जा रहा है, जिनका सामना वे रोजाना करते हैं। आमतौर पर डॉक्टर मरीजों की देखभाल में लगे रहते हैं, लेकिन उनकी मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक परेशानियों पर कम चर्चा होती है।

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इस थीम का उद्देश्य क्या है?

इस थीम का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि डॉक्टर भी इंसान हैं और उन्हें भी आराम, सहयोग तथा मानसिक समर्थन की जरूरत होती है। वे अक्सर लंबे समय तक काम करते हैं, कई कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं और मरीजों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेते हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है, जितना मरीजों की देखभाल करना। यही संदेश इस वर्ष की थीम के माध्यम से दिया जा रहा है।