Symptoms Of Prediabetes: 38 वर्षीय अंकित को पिछले कुछ दिनों से रात में पूरी नींद लेने के बावजूद अजीब-सी थकान महसूस हो रही थी। साथ ही, रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ता था, जिसके कारण उनकी नींद डिस्टर्ब हो जाती थी। उन्होंने इसे काम का तनाव और बढ़ती उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर दिया। लेकिन जब कुछ दिनों तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो वे डॉक्टर के पास गए। जब हेल्थ चेकअप के बाद डॉक्टर ने बताया कि वह प्रीडायबिटीज की स्थिति में हैं, तो उन्हें एहसास हुआ कि उनका शरीर काफी समय से उन्हें संकेत दे रहा था।
ऐसी ही स्थिति लाखों भारतीयों की है, जो प्रीडायबिटीज के शुरुआती संकेतों को सामान्य समस्याएं समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय रहते सही कदम न उठाने के कारण प्रीडायबिटीज आगे चलकर डायबिटीज का रूप ले लेती है।
आज दुनियाभर में करोड़ों लोग डायबिटीज की समस्या से जूझ रहे हैं। सबसे चिंता कि बात यह है कि डायबिटीज एक लाइलाज बीमारी है, जिसे सिर्फ दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव से कंट्रोल किया जा सकता है। यदि समय रहते बढ़े हुए ब्लड शुगर को कंट्रोल न किया जाए, तो इसके कारण शरीर के कई प्रमुख अंग डैमेज हो सकते हैं।
'ज्ञान बाय गणेश - मेकिंग इंडिया विन ओवर डायबिटीज' (Gyaan by Ganesh - Making India Win Over Diabetes), सन फार्मा और अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन की एक जागरूकता पहल है। इसका मकसद विशेषज्ञों की जानकारी के ज़रिए भारतीयों को डायबिटीज को बेहतर ढंग से समझने, उससे बचाव करने और उसे मैनेज करने में मदद करना है।
प्रीडायबिटीज क्या है?
"प्री-डायबिटीज एक ऐसी अवस्था है जिसमें ब्लड शुगर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन इतना नहीं कि उसे डायबिटीज कहा जाए। इस दौरान कुछ लोगों में बार-बार प्यास लगना, जल्दी थकान महसूस होना, बार-बार पेशाब आना या गर्दन और बगल की त्वचा का काला पड़ना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। हालांकि कई लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए जोखिम होने पर समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराना बेहद जरूरी है।"
Dr Abuzar Daimay, MBBS MD Medicine, PGCDM, Primâ Care Clinic, Indore
प्रीडायबिटीज को अक्सर 'साइलेंट कंडीशन' कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती लक्षण अक्सर बहुत हल्के होते हैं या दिखाई नहीं देते हैं। यही वजह है कि अधिकांश लोग लंबे समय तक इससे अनजान रहते हैं। लेकिन अगर समय रहते इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो टाइप 2 डायबिटीज को काफी हद तक रोका या टाला जा सकता है। भारत को दुनिया की 'डायबिटीज कैपिटल' कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लाखों भारतीय ऐसे हैं जिन्हें प्रीडायबिटीज है, लेकिन वे इसके बारे में जानते ही नहीं। समस्या यह है कि जब तक स्पष्ट लक्षण सामने आते हैं, तब तक शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक बदलाव काफी बढ़ चुके होते हैं। ऐसे में, इसके शुरुआती संकेतों को समझना बहुत जरूरी हो जाता है। अगर सही खानपान और पर्याप्त नींद लेने के बावजूद आपको हर समय थकान और कमजोरी महसूस होती है, तो यह प्रीडायबिटीज का संकेत हो सकता है। दरअसल, जब शरीर इंसुलिन का सही ढंग से उपयोग नहीं कर पाता, तो रक्त में मौजूद ग्लूकोज कोशिकाओं तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंचता। इसके परिणामस्वरूप शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती और व्यक्ति बिना अधिक शारीरिक मेहनत किए भी थका हुआ महसूस कर सकता है। अक्सर लोग इस थकान को काम का दबाव, तनाव या बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई मामलों में इसके पीछे बढ़ता हुआ रक्त शुगर स्तर कारण हो सकता है। अगर खाना खाने के कुछ समय बाद ही आपको फिर से भूख लग जाती है, तो यह केवल खानपान की आदत नहीं, बल्कि प्रीडायबिटीज का संकेत भी हो सकता है। दरअसल, इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण शरीर भोजन से मिलने वाली ऊर्जा का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता। ऐसे में, दिमाग को बार-बार यह संकेत मिलता है कि शरीर को और ऊर्जा चाहिए। परिणामस्वरूप, व्यक्ति को बार-बार खाने की इच्छा होती है। विशेष रूप से मीठी चीजों और अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों की लालसा बढ़ना प्रीडायबिटीज का एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत माना जाता है। यह लक्षण आमतौर पर मधुमेह से जोड़ा जाता है, लेकिन कई बार प्रीडायबिटीज में भी दिखाई दे सकता है। जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है, तो किडनी अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने की कोशिश करती है। इस प्रक्रिया में शरीर से अधिक पानी निकलता है, जिससे बार-बार पेशाब आता है। इसके कारण शरीर में पानी की कमी होने लगती है और व्यक्ति को अधिक प्यास महसूस होती है। अगर आप सामान्य से अधिक पानी पी रहे हैं और फिर भी बार-बार प्यास लग रही है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर पुरुषों की कमर का साइज 40 इंच से ज्यादा और महिलाओं की कमर का साइज 35 इंच से ज्यादा है, तो यह प्रीडायबिटीज का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कमर के आसपास जमा अतिरिक्त वसा इंसुलिन रेजिस्टेंस से गहराई से जुड़ी होती है। पेट की चर्बी ऐसे हार्मोन और सूजन पैदा करने वाले तत्वों का उत्पादन करती है ,जो शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को कम कर सकते हैं। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ कमर के बढ़ते घेराव को प्रीडायबिटीज़ का महत्वपूर्ण जोखिम कारक मानते हैं। गर्दन, बगल, कोहनी या उंगलियों के जोड़ों पर त्वचा का काला और मोटा होना प्रीडायबिटीज का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में 'एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स (Acanthosis Nigricans)' कहा जाता है। यह अक्सर शरीर में लंबे समय तक बढ़े हुए इंसुलिन स्तर का संकेत माना जाता है।कई लोग इसे गंदगी, धूप या त्वचा संबंधी सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह शरीर में बढ़ती इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है। अगर आपको अचानक कम या धुंधला दिखाई देने लगा है, तो यह प्रीडायबिटीज का संकेत हो सकता है। दरअसल, ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव आंखों के लेंस को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण कुछ लोगों को धुंधला दिखाई देना, फोकस करने में परेशानी होना या पढ़ते समय असुविधा महसूस हो सकती है। कई लोग इसे केवल आंखों की कमजोरी समझते हैं, लेकिन बार-बार ऐसा होना रक्त शुगर जांच कराने का संकेत हो सकता है। यदि छोटी-मोटी चोट, कट या खरोंच को ठीक होने में सामान्य से अधिक समय लग रहा है, तो यह भी प्रीडायबिटीज का एक चेतावनी संकेत हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, निम्नलिखित लोगों में प्रीडायबिटीज का जोखिम अधिक हो सकता है - परिवार में मधुमेह का इतिहास होना प्रीडायबिटीज कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की ओर से मिलने वाली एक चेतावनी है। अच्छी बात यह है कि इस चरण में खानपान में बदलाव और जीवनशैली में सुधार करके टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि आपको लगातार थकान, बार-बार भूख लगना, अधिक प्यास, पेट की चर्बी बढ़ना या त्वचा का काला पड़ना जैसे संकेत दिखाई दें, तो उन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप प्रीडायबिटीज को डायबिटीज में बदलने से रोक सकते हैं। अस्वीकरण (Disclaimer): यह सामग्री केवल रोगी शिक्षा एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रदान की गई है। यह किसी भी प्रकार से चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं है। सन फ़ार्मास्युटिकल्स लेबोरेट्रीज़ लिमिटेड (SPLL) सटीक एवं समयानुकूल जानकारी उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास करता है, लेकिन इसकी पूर्ण सटीकता होने की कोई गारंटी नहीं देता। कृपया अपने स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निर्णय के लिए केवल अपने चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह पर ही भरोसा करें। सन फ़ार्मास्युटिकल्स लेबोरेट्रीज़ लिमिटेड (SPLL) को पूर्व सूचना दिए बिना इस सामग्री के किसी भी भाग को यांत्रिक या इलेक्ट्रॉनिक किसी भी माध्यम से पुनर्प्रकाशित, प्रसारित या संग्रहित नहीं किया जा सकता। SPI-IN-CVD-ZT---07-20260096भारत है 'डायबिटीज कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड'
प्रीडायबिटीज के शुरूआती संकेत
1. लगातार थकान महसूस होना
2. बार-बार भूख लगना
3. ज्यादा प्यास लगना और बार-बार पेशाब आना
4. पेट के आसपास चर्बी बढ़ना
5. त्वचा का काला पड़ना
6. धुंधला दिखाई देना
7. घावों का धीरे-धीरे भरना
बढ़ा हुआ ब्लड शुगर का स्तर रक्त वाहिकाओं और प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है, जिससे शरीर की प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया धीमी हो जाती है। यह समस्या शुरुआत में हल्की होती है लेकिन समय के साथ बढ़ सकती है।किन लोगों को है अधिक सतर्क रहने की जरूरत?
अधिक वजन या मोटापा
शारीरिक गतिविधि की कमी
उच्च रक्तचाप
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)
बेली फैट
अस्वस्थ खानपान और तनावपूर्ण जीवनशैलीजीवनशैली में सुधार से डायबिटीज का खतरा होगा कम