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'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारे में गणेश जी के साथ लिया जाता है भक्त का नाम

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इस साल गणेश प्रतिमा की स्थापना 2 सितंबर को होगी। गणेश चतुर्थी से गणेश विसर्जन तक चारों ओर गणपति बप्पा मोरया का जयकारा सुनाई देगा। "गणपति बप्पा मोरया, मंगळमूर्ती मोरया, पुढ़च्यावर्षी लवकरया" इसका अर्थ है- हे मंगलकारी पिता, अगली बार और जल्दी आना।

हर गणपति भक्त की जुबां पर ये जयकारा होगा। मगर क्या आप गणपति बप्पा मोरया जयकारे से जुड़ी कहानी जानते हैं। क्या आपको मालूम है ये जयकारा कैसे महशूर हुआ और कब से शुरू हुआ।

गणपति बप्पा मोरया है भक्त की आस्था का प्रतीक

गणपति बप्पा मोरया है भक्त की आस्था का प्रतीक

गणपति बप्पा के साथ मोरया क्यों बोला जाता है इसकी जानकारी महाराष्ट्र के कुछ बाशिदों के आलावा बहुत कम ही लोगों को होगी। इस जयकारे के साथ सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि प्रभु को लेकर उसके भक्त की भावना जुड़ी हुई है। उस भक्त ने भगवान गणेश के लिए अपने प्रेम और आस्था का ऐसा परिचय दिया कि सम्मान के तौर पर उनका नाम भी गणपति बप्पा के साथ लिया जाने लगा।

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मोरया गोसावी थे गणेश भक्त

मोरया गोसावी थे गणेश भक्त

गणपति बप्पा के साथ जुड़े मोरया शब्द की कहानी लगभग 600 साल पुरानी है। इसका संबंध महाराष्ट्र के पुणे से 15 किमी दूर बसे चिंचवड़ गांव से है। मोरया गोसावी का जन्म 1375 का माना जाता है और वो भगवान गणेश के परम भक्त थे। गणपति के लिए उनकी आस्था का ये आलम था कि वो हर गणेश चतुर्थी पर चिंचवड़ से करीब 95 किमी दूर बसे मोरपुर जाते थे और वहां मौजूद मयूरेश्वर गणपति मंदिर के दर्शन करते थे।

बुढ़ापे के कारण मयूरेश्वर मंदिर जाना हुआ मुश्किल

बुढ़ापे के कारण मयूरेश्वर मंदिर जाना हुआ मुश्किल

महाराष्ट्र के अष्ट विनायक में से एक है मयूरेश्वर गणेश मंदिर। ऐसा कहा जाता है कि मोरया गोसावी 117 साल की उम्र हो जाने तक मोरपुर जाते थे। मगर बाद में बुढ़ापे और कमजोरी की वजह से ये सिलसिला जारी नहीं रह पाया। इस कारण मोरया गोसावी काफी दुखी रहते थे। एक बार उनके सपने में भगवान गणेश ने दर्शन दिए और उनसे कहा कल जब तुम स्नान करोगे, तब स्नान के बाद मैं तुम्हें दर्शन दूंगा।

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मोरया गोसावी को मिले गणपति

मोरया गोसावी को मिले गणपति

अगले दिन मोरया गोसावी चिंचवड़ के कुंड में नहाने के लिए गए। कुंड से जब डुबकी लगाकर वो बाहर निकले तब उनके हाथ में भगवान गणेश की ही एक छोटी सी मूर्ति थी। गणेश जी ने इस रूप में अपने भक्त को दर्शन दिए। मोरया गोसावी ने इस मूर्ति को मंदिर में स्थापित कर दिया। मोरया जी की समाधि भी यहीं बनाई गई। इसे मोरया गोसावी मंदिर के नाम से जाना जाता है। गणपति के साथ मोरया गोसावी का नाम इस कदर जुड़ गया कि यहां के लोग अकेले गणपति का नाम नहीं लेते, उनके साथ मोरया गोसावी का नाम अवश्य जोड़ते हैं। पुणे के इसी चिंचवाड़ा गांव से गणपति बप्पा मोरया बोलने की शुरुआत हुई, जो आज पूरे देशभर में गूंजती है।

English summary

ganesh chaturthi: story behind the saying ganpati bappa moriya

Every year, as we welcome Lord Ganesha in our lives, we all shout in joy and say, ‘Ganpati Bappa Morya’ but how did this slogan originate? Ever wondered?
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