ज्योतिष दिवस 2018: जब पहली बार सूर्य के प्रकाश से सारे ग्रह-नक्षत्र चमक उठे

Posted By: Rupa Shah
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आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी २० मार्च 2018 को ज्योतिष दिवस मनाया जा रहा। करोड़ों लोग इस विज्ञानं से जुड़े हुए है लेकिन बहुत कम लोग ही इस दिन के महत्व के बारे में जानते है। इस पवित्र अवसर पर हम आपको ज्योतिष शास्त्र और इस दिवस से जुड़ी कुछ ख़ास जानकारी देंगे।

ज्योतिष विद्या एक ऐसी कार्यप्रणाली है जिससे मनुष्य अपने जीवन से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर सकता है। अर्थात ज्योतिष शास्त्र के द्वारा आप अपने भविष्य के बारे में सब कुछ जान सकतें है। किसी जातक की कुंडली में पितृ दोष होता है तो किसी के काल सर्प दोष इस विद्या की सहायता से इन दोषों का उपाय प्राप्त करके जातक अपना आने वाला कल बेहतर बना सकतें है।

- International Astrology Day

प्राचीन काल में हमारे ऋषि मुनि हज़ारों वर्षों तक कठोर तप करके ज्ञान हासिल करते थे और उनका वो ज्ञान आज भी ज्योतिष के माध्यम से हमारा मार्गदर्शन कर रहा है। इतना ही नहीं हमारे आज के वैज्ञानिकों ने भी इस विद्या को सराहा और माना है

आइए जानते है क्या है ज्योतिष दिवस का महत्व।

 क्यों मनाते है ज्योतिष दिवस

क्यों मनाते है ज्योतिष दिवस

शास्त्रों के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को ही ज्योतिष दिवस मनाया जाता है। कहते है आज ही के शुभ दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था और समय का प्रारंभ भी आज ही हुआ था। इस पवित्र दिन पर समस्त देवी देवताओं ने धरती पर आकर अपने भक्तों को दर्शन दिया था।

अगर बात ज्योतिषीय महत्व की करें तो कहते है इस दिन प्रथम बार सूर्य उदय हुआ था जिसके प्रकश से समस्त गृह नक्षत्र और तारे चमक उठे थे अर्थात सूर्योदय के साथ साथ सत्ताईस नक्षत्र, बारह राशियों और नवग्रहों का भी उदय हुआ था। इस अवसर पर ब्रह्माजी के साथ-साथ सूर्य देव , पंचांग और ज्योतिष ग्रंथों की पूजा भी की जाती है। इसके अलावा जगह जगह ज्योतिष सम्बन्धी सभा-संगोष्ठी आदि का भी आयोजन किया जाता है।

 वर्ण और राशियाँ

वर्ण और राशियाँ

प्राचीन काल में विद्वानों ने वर्ण और ग्रहों को भी वर्गीकृत किया था। इसी प्रकार राशियां भी वर्ण के अनुसार विभाजित करने का वर्णन शास्त्रों में है। ब्राह्मण वर्ण की राशियां कर्क, मीन और वृष है तो वहीं क्षत्रिय वर्ग की मेष, सिंह और धनु वैश्य वर्ण की वृश्चिक, कन्या, मकर तथा शूद्र वर्ण की राशियों के रूप में मिथुन, तुला व कुंभ है । गुरु और शुक्र ब्राह्मण वर्ग के ग्रहों के रूप में जाने जातें है तो वहीं क्षत्रिय वर्ण के ग्रह सूर्य तथा मंगल है चन्द्रमा को वैश्य वर्ग का ग्रह माना गया है जबकि शूद्र वर्ण के ग्रहों में बुध, शनि, राहु और केतु आतें है

 नारद पुराण में ज्योतिष शास्त्र

नारद पुराण में ज्योतिष शास्त्र

नारद पुराण में भी ज्योतिषशास्त्र का उल्लेख प्राप्त होता है। इस पुराण के अनुसार स्वयं ब्रह्मा जी से नारद जी को ज्योतिशास्त्र का ज्ञान मिला था जिसके कारण वह सभी देवताओं और असुरों के बीच पूजे जातें।

वैदिक ज्योतिष सबसे प्राचीन

वैदिक ज्योतिष सबसे प्राचीन

वैसे तो कई तरह के ज्योतिषशास्त्र हजारों वर्षों में विकसित हुए है लेकिन उनमे से वैदिक ज्योतिष को सबसे प्राचीन माना जाता है। इसकी उत्पत्ति वेदों से हुई है इसलिए इसे वैदिक ज्योतिष कहते है यह एक ऐसा विज्ञान या शास्त्र है जो सभी ग्रहों के साथ राशियों एवं नक्षत्रों का अध्ययन करता है और इन आकाशीय तत्वों से पृथ्वी एवं मनुष्य किस प्रकार प्रभावित होते हैं उनका विश्लेषण करता है।वैदिक ज्योतिष में गणना के क्रम में राशिचक्र, नवग्रह, जन्म राशि को महत्वपूर्ण तत्व के रूप में देखा जाता है

ज्योतिषशास्त्र का स्वर्ण काल

ज्योतिषशास्त्र का स्वर्ण काल

8300 ई. पू. से 3000 ई. पू. के दौरान ज्योतिषशास्त्र पर कई तरह के शोध किये गए थे और इस काल के अंत तक यह वैज्ञानिक तौर पर काफी विकसित हो चुका था। इतना ही नहीं इस काल को ज्योतिशास्त्र का स्वर्ण काल भी कहा जाता है।

कहते है कि 18 ऋषियों सूर्य, पितामह, व्यास, वशिष्ठ, अत्रि, पराशर कश्यप, नारद, गर्ग, मरिची, मनु, अंगीरा, पुलस्य, लोमश, चवन, यवन, भृगु और शौनक्य ने इस काल में ज्योतिषशास्त्र को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

माना जाता है कि संसार में पहली बार ज्योतिष विद्या द्वारा भविष्य कथन करने वाले भृगु ऋषि थे। इन्होंने गणेश जी की सहायता से 50,0000 अनुमानित कुंडलियों का निर्माण किया था।

English summary

march 20 - International Astrology Day

International Astrology Day (most often observed on either March 20 or March 21) is an annual observance/holiday celebrated by astrologers and astrology enthusiasts.