Navratri 2018: आज है चौथा नवरात्र मां कूष्माण्डा का दिन, इस विधि से करें पूजा

Posted By: Rupa Shah
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ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली मां कुष्मांडा आदिशक्ति देवी दुर्गा का चौथा स्वरुप है। नवरात्री के चौथे दिन माता कुष्मांडा की उपासना की जाती है। कहतें है अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा माता ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थी इसलिए इन्हे कुष्मांडा के नाम से जाना जाता है।

माता का यह स्वरुप सूर्य के समान तेजस्वी माना गया है क्योंकि यह देवी सूर्यमंडल के भीतर के लोक में निवास करतीं है। कहतें है देवी के शरीर की चमक और इनके बढ़ते तेज़ से पूरा ब्रह्माण्ड प्रज्वलित है, अन्य कोई भी देवी देवता इनके तेज़ और प्रभाव की बराबरी नहीं कर सकतें। इसलिए सूर्यमंडल में केवल माता कुष्मांडा ही वास कर सकतीं है।

जब माता कुष्मांडा ने की ब्रह्मांड की रचना

माता की मुस्कान बहुत मधुर है। इतना ही नहीं देवी की यह मीठी मुस्कान सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है और साथ ही मनुष्य को अपने जीवन में आने वाली सभी कठिन परिस्तिथियों का सामना हंस कर करने के लिए प्रेरित करती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर केवल अंधकार था तब देवी कुष्मांडा ने अपनी अपने हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी।

navratri 4th day pooja in hindi

माता का स्वरूप

देवी कुष्मांडा की आठ भुजाएं है इसलिए इन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। माता का वाहन सिंह है। इस देवी को कुम्हड़े की बलि चढ़ाई जाती है। संस्कृत में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते है इसलिए भी माता को कुष्मांडा के रूप में जाना जाता है।

माँ कुष्मांडा पूजन विधि

चौथे दिन देवी कूष्माण्डा की पूजा का विधान उसी प्रकार है जिस प्रकार शक्ति अन्य रुपों को पूजन किया जाता है। ठीक उसी प्रकार चौथे दिन देवी कूष्माण्डा की पूजा का विधान है । इस दिन भी सर्वप्रथम कलश और उसमें उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए। जिसके बाद माता के साथ अन्य देवी देवताओं की पूजा करें ,रोली, सिन्दूर का टीका लगाएं और पुष्प चढ़ाएं। तत्पश्चात हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम करना करें तथा पवित्र मन से देवी का ध्यान करें।

देवी कुष्मांडा को भूरा रंग भी बेहद प्रिय है इसलिए अगर इनकी पूजा भूरे रंग के वस्त्र पहनकर की जाए बहुत ही शुभ होता है। माता को मालपुए बहुत पसंद है, इन्हे मालपुए का भोग विशेष रूप से लगाएं साथ ही अन्य किसी मिष्टान का भी भोग लगा सकतें है।

इस दिन माता को अर्पित किया हुआ भोग किसी ब्राह्मण को दान देने से से हर प्रकार का विघ्न दूर हो जाता है।

माता कुष्मांडा की पूजा से मिलता है यह लाभ

माँ कूष्माण्डा की उपासना मनुष्य को सभी परेशानियों से मुक्ति दिलाती है और उसके जीवन में सुख, समृद्धि और उन्नति लाती है। अतः अपनी लौकिक, पारलौकिक उन्नति चाहने वालों को अवश्य ही सच्चे मन से माता की भक्ति करनी चाहिए।

कहते है इस देवी की पूजा करने से बड़े से बड़े रोगों से छुटकारा मिल जाता है साथ ही आयु, यश और बल भी बढ़ता है।

निम्न मंत्र से करना चाहिए माता का ध्यान

सुरासंपूर्णकलशं, रुधिराप्लुतमेव च।

दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे।।

अर्थात् अमृत से परिपूरित कलश को धारण करने वाली और कमलपुष्प से युक्त तेजोमय मां कूष्मांडा हमें सब कार्यों में शुभदायी सिद्ध हो।

लाभकारी उत्पाद

ऐसी मान्यता है कि इन उत्पादों से देवी कुष्मांडा का आशीर्वाद अवश्य ही प्राप्त होता है।

एक मुखी रुद्राक्ष,

सूर्य यन्त्र,

रुद्राक्ष माला और

माणिक्य

घाटमपुर में माता कुष्मांडा

माता कुष्मांडा देवी पार्वती का ही एक रूप है जो अपने पिछ्ले जन्म में देवी सती थी। जैसा की हम सब जानते है कि देवी सती ने अपने पति भोलेनाथ के अपमान के पश्चात् हवन कुंड में कूद कर खुद को भस्म कर लिया था। कहते है देवी के शरीर के हिस्से नौ स्थानों पर जा कर गिरे जिसमे से उनका चौथा हिस्सा कानपुर के घाटमपुर तहसील में गिरा था वहां मां कुष्मांडा देवी का लगभग 1000 साल पुराना मंदिर है तभी से माता यहां विराजमान है।

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    English summary

    Navratri 2018 4th Day, Maa Kushmanda Puja Vidhi

    On the fourth day of Navratri, Ma Kushmanda is worshipped with ritualistic pujas. This Devi rides on a lion and has eight hands with seven deadly weapons in addition to a rosary.
    Story first published: Wednesday, March 21, 2018, 15:30 [IST]
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