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Pola Festival 2021 : छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र में पोला तिहार की धूम, भगवान श्रीकृष्ण के बालरूप से है इसका संबंध

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आज के समय में भारत ने कई क्षेत्रों में तरक्की की है और दूसरे देशों के मुकाबले में बेहतर स्थान पर भी पहुंचा है। मगर इस देश की नींव खेती-किसानी पर टिकी है। आज भी देश का एक बड़ा तबका कृषि कार्य में संलग्न है। कृषि कार्य को आसान बनाने के लिए मवेशियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहता है। इस देश में माल-मवेशियों को पूजा जाता है। पोला कृषि से संबंधित पर्व है। खरीफ फसल के दूसरे चरण का काम पूरा हो जाने और इस कार्य में मदद के लिए बैलों के प्रति कृतज्ञता जताने के लिए पोला पर्व मनाया जाता है। इस वजह से इसे बैल पोला भी कहा जाता है।

पोला पर्व मनाने की तिथि

पोला पर्व मनाने की तिथि

पोला पर्व भाद्रपद महीने की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है जिसे पिठोरी अमावस्या भी कहा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह अगस्त-सितंबर के महीने में आता है। पोला त्योहार को बैल पोला और छत्तीसगढ़ में पोला को पोरा भी कहते हैं। किसान निंदाई-गुड़ाई का काम हो जाने की ख़ुशी में बैलों का सम्मान करते हैं और उनकी पूजा की जाती है। यह त्योहार दो दिनों तक मनाया जाता है। पहले दिन को मोठा पोला और दूसरे दिन को तनहा पोला के नाम से जाना जाता है।

साल 2021 में पोला पर्व

साल 2021 में पोला पर्व

साल 2021 में बैल पोला पर्व 6 सितंबर, सोमवार के दिन मनाया जाएगा।

बैलों और अन्य मवेशियों की पूजा का यह उत्सव छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, असम राज्यों में भी मनाया जाता है। यह पर्व भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भी मनाया जाता है।

क्यों इस उत्सव को कहा जाता है पोला?

क्यों इस उत्सव को कहा जाता है पोला?

इस पर्व का संबंध भगवान कृष्ण से जुड़ा हुआ है। भगवान विष्णु श्रीकृष्ण का अवतार लेकर धरती पर आए थे। जन्म के बाद से ही उनके मामा कंस कान्हा की जान के पीछे पड़े हुए थे। कंस ने कई बार बाल गोपाल को मारने के लिए असुरों व राक्षसों को भेजा। एक बार वासुदेव-यशोदा के घर कंस ने पोलासुर नामक असुर को भेजा था और कृष्ण ने अपनी लीला से उसका वध कर दिया। माना जाता है कि वो भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि थी। इस वजह से ये दिन पोला के नाम से जाना जाने लगा। यह दिन बच्चों के लिए विशेष महत्व रखता है।

पोला पर्व का महत्व

पोला पर्व का महत्व

इस दिन किसान अपने बैलों और दूसरे मवेशियों को नहलाते हैं। उन्हें सजाया जाता है। फिर उनकी पूजा-आराधना करते हैं। किसान अपने पशुओं का दिल से धन्यवाद करते हैं जिनकी वजह से वो अपने कृषि कार्य को पूरा कर सकें। कई स्थानों पर इस दिन चक्की की भी पूजा की जाती है जो गृहस्थी का प्रतीक है।

वहीं छोटे छोटे बच्चे लकड़ी या मिट्टी के घोड़े व बैल को सजाकर घर घर ले जाते हैं और लोग उन्हें पैसे या तोहफे देते हैं। इस दिन मेले-जुलुस का आयोजन भी किया जाता है।

English summary

Pola Festival 2021: Date, Tradition, Importance and Bail Pola Katha in Hindi

Pola is a thanksgiving festival celebrated by farmers in different states of India. Check out the details of Pola Festival 2021 in Hindi.