पितृपक्ष 2018: जाने क्यों, कैसे और कब होता है पितृदोष

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भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है। लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए इस दौरान श्राद्ध करते हैं। पितृपक्ष पूरे सोलह दिनों तक चलता है। इस बार यह 24 सितंबर से शुरू होकर 8 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगा। पुराणों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि भगवान की पूजा से पहले हमें अपने पितरों की पूजा करनी चाहिए। इससे हमारे पूर्वज तो प्रसन्न होते ही हैं, हमें देवी देवताओं का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कई बार हमारे जीवन में कुछ ऐसी परेशानियां आ जाती हैं जिनसे छुटकारा पाना हमारे लिए थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इसका एक कारण हो सकता है पितृदोष। इस वजह से पितृपक्ष को पितरों की मोक्ष की प्राप्ति का समय माना जाता है और लोग इस दौरान उनके लिए तर्पण और पिंड दान करते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि पितृदोष कब, क्यों और कैसे होता है।

1. नाग हत्या

1. नाग हत्या

यदि आपके हाथों किसी नाग की हत्या हुई है या फिर आप उसकी मौत का कारण बने हैं तो ऐसे में पितृ दोष लगता है।

2. गौ हत्या

2. गौ हत्या

हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना जाता है इसलिए यदि आपके हाथों किसी गाय की हत्या हुई है या फिर आपने गाय का अपमान किया है तो पितृदोष लग जाता है।

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3. कुल देवी या देवता का अपमान करना

3. कुल देवी या देवता का अपमान करना

भूलकर भी अपने कुल देवी, देवता इत्यादि की विस्मृति या अपमान नहीं करना चाहिए।

4. पितरों का श्राद्ध न होना

4. पितरों का श्राद्ध न होना

हिंदू धर्म में मृत्यु के पश्चात श्राद्ध कर्म किया जाता है ताकि दिवगंत आत्मा को शांति मिल सके। यदि पितरों का विधिपूर्वक श्राद्ध न हुआ हो तो उनको मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती और पितृदोष लग जाता है।

5. पवित्र तिथियों पर संभोग करना

5. पवित्र तिथियों पर संभोग करना

पूर्णिमा, अमावस्या या अन्य किसी पवित्र तिथि पर संभोग करने से भी पितृदोष लग जाता है।

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6. गर्भपात करना

6. गर्भपात करना

गर्भपात करना या फिर किसी भी जीव की हत्या करना बहुत ही बड़ा पाप माना जाता है इसलिए यदि आप ऐसा करते हैं तो आप पाप के भागीदार बनते हैं। इससे पितरों के साथ साथ हमारे देवी देवता भी नाराज़ होते हैं।

7. पीपल, वट वृक्ष काटना

7. पीपल, वट वृक्ष काटना

पीपल और वट दोनों ही वृक्ष हिंदू धर्म में पूजनीय माने जाते हैं इसलिए इन्हें भूलकर भी न काटे और न ही कटवाएं। इसके अलावा किसी भी फलों से लदे हुए वृक्ष को भी काटना पाप होता है।

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8. पवित्र स्थान पर गलत कार्य करना

8. पवित्र स्थान पर गलत कार्य करना

अगर आप मंदिर या फिर ऐसी ही किसी पवित्र स्थान पर किसी भी तरह का गलत और अनैतिक कार्य करते हैं तो आप पाप के भागीदार बनते हैं और पितृ दोष लग जाता है।

9. पत्नी के अलावा दूसरी स्त्री से संबंध बनाना

9. पत्नी के अलावा दूसरी स्त्री से संबंध बनाना

विवाहित होने के बावजूद यदि आप के संबंध दूसरी स्त्रियों से हैं और आप अपनी पत्नी को धोखा दे रहे हैं तो ऐसे में पितृ दोष लग जाता है।

10. पवित्रों स्थलों पर मल-मूत्र विसर्जन

10. पवित्रों स्थलों पर मल-मूत्र विसर्जन

यदि आप किसी नदी, कूप, तड़ाग या किसी पवित्र स्थान पर मल मूत्र विसर्जन करते हैं तो इससे हमारे पितृ और देवी देवता नाराज़ होते हैं।

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    English summary

    Shradh 2018: Reasons which can lead to pitru dosh

    The peoples who don’t do the Shradh for their Pitras are the one who suffers from the curse of “Pitra Dosh” as their Pitras got angry and returns to their world. Read on to know more about the other reason for pitru dosh.
    Story first published: Wednesday, September 26, 2018, 14:50 [IST]
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