
अनुसंधानकर्ता इस बात पर तो लंबे समय से सहमत हैं कि लड़कों की तुलना में लड़कियां जल्दी बोलना सीखती हैं। अब एक नए अध्ययन में बताया गया है कि लड़कों का देर से बोलना सीखने का संबंध टेस्टोस्टीरॉन हार्मोन से होता है।
लड़कों का देर से बोलना सीखने का संबंध टेस्टोस्टीरॉन हार्मोन से टेल्थॉन इन्स्टीट्यूट फॉर चाइल्ड हेल्थ रिसर्च की अगुवाई में एक अंतरराष्टीय दल ने दावा किया है। उन्होंने बताया कि लड़के जन्म से पहले, टेस्टोस्टीरॉन हार्मोन की अधिक मात्रा के संपर्क में आते हैं और उनके देर से बोलना शुरू करने का कारण भी यही होता है।
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने गर्भनाल के रक्त की जांच कर उसमें उस अवधि में टेस्टोस्टीरॉन हार्मोन की अधिक मात्रा पाई जब भ्रूण के मस्तिष्क के भाषा संबंधी भागों का विकास होता है। अध्ययन के नतीजे जर्नल ऑफ चाइल्ड साइकोलॉजी एंड साइकाइटी में प्रकाशित हुए हैं।
लड़कों का देर से बोलना सीखने का संबंध टेस्टोस्टीरॉन हार्मोन से टेल्थॉन इन्स्टीट्यूट फॉर चाइल्ड हेल्थ रिसर्च की अगुवाई में एक अंतरराष्टीय दल ने दावा किया है। उन्होंने बताया कि लड़के जन्म से पहले, टेस्टोस्टीरॉन हार्मोन की अधिक मात्रा के संपर्क में आते हैं और उनके देर से बोलना शुरू करने का कारण भी यही होता है।
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने गर्भनाल के रक्त की जांच कर उसमें उस अवधि में टेस्टोस्टीरॉन हार्मोन की अधिक मात्रा पाई जब भ्रूण के मस्तिष्क के भाषा संबंधी भागों का विकास होता है। अध्ययन के नतीजे जर्नल ऑफ चाइल्ड साइकोलॉजी एंड साइकाइटी में प्रकाशित हुए हैं।













