Varalakshmi Vrat 2026: कब रखा जाएगा वरलक्ष्मी व्रत? नोट करें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि


Varalakshmi Vrat 2026: हिंदू धर्म में सावन का महीना व्रत और त्यौहार के लिहाज से बहुत महवत्पूर्ण माना जाता है। सावन में सोमवार को भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित माना गया है। इसी प्रकार सावन में पड़ने वाले वरलक्ष्मी व्रत का भी विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत सावन के अंतिम शुक्रवार को किया जाता है। यह व्रत देवी लक्ष्मी के 'वर' (वरदान देने वाले) रूप को समर्पित है। इस साल यह व्रत 21 अगस्त 2026 को रखा जा रहा है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और घर में सुख-शांति की कामना के लिए व्रत रखती हैं और विधि-विधान के साथ मां वरलक्ष्मी का पूजन करती हैं। इस व्रत को विशेषकर दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से जीवन से सभी प्रकार की आर्थिक समस्याएं समाप्त होती हैं। आइए, जानते हैं इस साल वरलक्ष्मी व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि के बारे में -

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वरलक्ष्मी व्रत की तिथि और शुभ समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार सावन का अंतिम शुक्रवार 21 अगस्त को है। ऐसे में, इसी दिन वरलक्ष्मी व्रत किया जाएगा।

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वरलक्ष्मी व्रतम 2026 शुभ मुहूर्त

सिंह लग्न पूजा मुहूर्त - प्रातः 05:54 से प्रातः 08:11 तक
वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त - दोपहर 12:47 बजे से दोपहर 03:05 बजे तक
कुम्भ लग्न पूजा मुहूर्त - सायं 06:52 से रात्रि 08:20 तक
वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त - रात्रि 11:21 से मध्यरात्रि के बाद 01:17 तक, 22 अगस्त

वरलक्ष्मी व्रत का महत्व

वरलक्ष्मी का व्रत धन-समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन जो भक्त वरलक्ष्मी व्रत का विधि-विधान के साथ पालन करता है उसे माता लक्ष्मी के आशीर्वाद के रूप में कई लाभ मिलते हैं। भक्तों के घर में धन-धान्य के भंडार भर जाते हैं। इस व्रत का पालन पूरी श्रद्धा और पूर्ण विधि-विधान के साथ करें। इस व्रत को करने से जातक को मां लक्ष्मी के साथ मां सरस्वती का भी विशेष आशीर्वाद मिलता है और ज्ञान में वृद्धि होती है। इस व्रत को करने वाले मनुष्य के जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। अधूरे कार्य पूरे हो जाते हैं। स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

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विवाहितों को मिलता है विशेष लाभ

अविवाहित कन्या को यह व्रत नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार वरलक्ष्मी व्रत को केवल विवाहित महिलाएं ही कर सकती हैं। कुंवारी लड़कियों के लिए यह व्रत करना वर्जित माना गया है। अपने परिवार की सुख, शांति और संपन्नता के लिए विवाहित पुरुष भी यह व्रत कर सकते हैं। यदि पति और पत्नि दोनों साथ मिलकर इस व्रत को करते हैं तो दोनो को ही मां लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद मिलेगा। इतना ही नहीं, इस व्रत के प्रभाव से जीवन के सभी आभाव भी दूर हो जाते हैं।

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वरलक्ष्मी व्रत पूजा विधि (Varalakshmi Vrat 2026 Puja Vidhi)

वरलक्ष्मी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
पूजा स्थान पर एक वेदी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां वरलक्ष्मी की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करें।
इसके बाद एक कलश में जल, सुपारी, सिक्का, अक्षत और आम के पत्ते डालकर स्थापित करें।
कलश के ऊपर नारियल रखें।
मां वरलक्ष्मी को कुमकुम, हल्दी, अक्षत, फूल, चंदन और 16 शृंगार की सामग्री अर्पित करें।
भोग में खीर, पूड़ी और सफेद मिठाई अर्पित करें।
वरलक्ष्मी व्रत की कथा सुनें या पढ़ें।
अंत में घी के दीपक से मां वरलक्ष्मी की आरती करें।

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