Latest Updates
-
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम -
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि -
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके
World Pulses Day 2024: आज है विश्व दलहन दिवस, जानें क्यों मनाया जाता है और इससे जुड़ा इतिहास
World Pulses Day 2024 : हर साल फरवरी की 10 तारीख को विश्व दलहन दिवस के रूप में मनाया जाता है। ये एक ऐसा दिन जो हमारी डाइट और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में दालों के महत्वपूर्ण भूमिका को बताने के लिए मनाया जाता है। दालें, जिनमें दाल, छोले, बीन्स और मटर शामिल हैं।

विश्व दलहन दिवस 2024 की थीम
वर्ष 2016 में जब दलहन के लिए अंतर्राष्ट्रीय वर्ष मनाया गया था, तब इसके लिए एक थीम का चुनाव किया गया था और तभी से इस दिन को हर साल एक नई थीम के साथ मनाया जा रहा है। इस साल 2024 में विश्व दलहन दिवस की थीम "दालें: पौष्टिक मिट्टी और लोगों" (Pulses: nourishing soils and people) रखी गई है। इस थीम का मतलब होता हैं स्वस्थ मिट्टी और लोगों की कुंजी के रूप में दालों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
विश्व दलहन दिवस मानने का उद्देश्य
सयुक्त राष्ट्र संघ दालों का उत्पादन बढ़ाकर दुनिया में गरीब कुपोषित देशों को पोषक तत्वों से भरपूर खाना उपलब्ध करवाना चाहता है। क्योंकि दालों में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते है।
विश्व दलहन दिवस का इतिहास
संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा 20 दिसंबर 2013 में प्रस्ताव से अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस मानने का निर्णय लिया गया। 'अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस' पहली बार साल 2016 में मनाया गया था। बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 फरवरी 2019 को विश्व दाल दिवस के रूप में मनाने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। जिसके बाद से 10 फरवरी को दाल दिवस मनाते है।
दालों का इतिहास
भारतीय भोजन की शान और पौष्टिकता और विटामिन से भरपूर दालों का इतिहास काफी प्राचीन है। आयुर्वेद के जनक आचार्य चरक ने मरीजों को दाल और खिचड़ी खाने की सलाह दी थी, बौद्ध या जैन ग्रंथों में दाल का उल्लेख मिल जाता है। ऐसा माना जाता है कि सर्वप्रथम मूंग की दाल भोजन में शामिल की गई थी। इसके बाद ये हर रसोई का हिस्सा बन गया। दालों में विटामिन और प्रोटीन होता है। एक अनुमान के अनुसार दालों में तीन से चार प्रतिशत तक प्रोटीन और विटामिन मिलता है। भारत जैसे देश में दालों से प्राप्त पौष्टिकता एक सामान्य व्यक्ति के लिए जीवन जीने का आधार है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
