Latest Updates
-
नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकते हैं ये 5 योगासन, नियमित अभ्यास से हार्ट डिजीज का खतरा होगा कम -
चेहरे पर नारियल तेल में मिलाकर लगाएं कॉफी पाउडर, स्किन की इन 5 समस्याओं से मिलेगा छुटकारा -
Myth Vs Fact: टाइट ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होता है? डॉक्टर से जानिए ऐसे ही 10 मिथ और उनकी सच्चाई -
Karwa Chauth Kab Hai 2026: करवा चौथ कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और चांद दिखने का सटीक समय -
डायबिटीज में नारियल पानी पिएं या नींबू पानी? जानें शुगर कंट्रोल के लिए क्या है बेहतर -
Papankusha Ekadashi Vrat Katha: पापांकुशा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति -
Papankusha Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की कृपा...पापांकुशा एकादशी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
पार्टी में जल्दी बिगड़ जाता है मेकअप? केकी और पैची लुक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स -
दशहरा के बाद दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 200 के पार पहुंचा AQI, प्रदूषण से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स -
कुल्लू दशहरा में नहीं जलता रावण का पुतला, देवलोक से आते हैं देवी-देवता, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा
Chitragupt Puja 2024: भगवान चित्रगुप्त के वंशज करते हैं यह विशेष पूजा, कायस्थ समाज नोट करें तिथि-शुभ मुहूर्त
Chitragupt Puja 2024: भगवान चित्रगुप्त को धर्मग्रंथों में यमराज के सहायक और मनुष्यों के कर्मों के लेखा-जोखा रखने वाले देवता के रूप में जाना जाता है।
उनकी पूजा दीपावली के दो दिन बाद विशेष रूप से व्यापारी और अकाउंटेंट करते हैं। आइए जानते हैं कि इस वर्ष 2024 में चित्रगुप्त पूजा कब और किस मुहूर्त में होगी, और इसका महत्व क्या है।

चित्रगुप्त पूजा का महत्व
सनातन धर्म के अनुसार, भगवान चित्रगुप्त मनुष्यों के सभी अच्छे और बुरे कर्मों का लेखा रखते हैं। उनकी पूजा करने से जीवन में सरलता, उन्नति, मधुर वाणी, और बुद्धि का विकास होता है। माना जाता है कि चित्रगुप्त पूजा का महत्व कायस्थ समुदाय में विशेष रूप से है, क्योंकि उन्हें भगवान चित्रगुप्त के वंशज यानी 'चित्रांश' माना जाता है।
चित्रगुप्त पूजा 2024: तिथि और मुहूर्त
इस वर्ष चित्रगुप्त पूजा का आयोजन 3 नवंबर, रविवार को होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 2 नवंबर 2024 की रात 8:21 बजे से शुरू होकर 3 नवंबर को रात 10:05 बजे तक रहेगी। पूजा का शुभ मुहूर्त 3 नवंबर को सुबह 7:57 से दोपहर 12:04 बजे तक रहेगा।
कायस्थ समुदाय और चित्रगुप्त का इतिहास
कायस्थ समाज के लोग मानते हैं कि भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी के शरीर से हुई थी। इसलिए उनका एक नाम 'कायस्थ' पड़ा, जिसका अर्थ है "काया से उत्पन्न"। चित्रगुप्त को सदैव कलम और दवात के साथ चित्रित किया जाता है, जो उनके लेखाकार होने का प्रतीक है। यही कारण है कि कायस्थ समुदाय विशेष श्रद्धा और विधि-विधान के साथ इस दिन उनकी पूजा करता है।
क्या है 'कलम दवात' पूजा?
चित्रगुप्त पूजा के दिन व्यापारी और कायस्थ समाज के लोग अपने खाते, नोटबुक और कागजों की पूजा करते हैं, जिसे 'कलम दवात पूजा' कहा जाता है। इस दिन लोग अपने काम की नई शुरुआत करते हैं, खाते में 'श्री' लिखते हैं, और आय-व्यय का लेखा भगवान चित्रगुप्त को समर्पित करते हैं। माना जाता है कि इस पूजा से व्यापार में उन्नति होती है, वाणी में मधुरता आती है, और कार्य में सफलता प्राप्त होती है।
चित्रगुप्त पूजा न केवल कर्मों का लेखा रखने वाले देवता को समर्पित है बल्कि यह सरलता और सफलता का आशीर्वाद भी लेकर आती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
