धनतेरस पर धनिया खरीदने के बाद करें यह एक उपाय, घर में बनी रहेगी बरकत

धनतेरस पर सोना, चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा तो है ही, साथ ही साबुत धनिया खरीदना भी बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जिनके पास सोना-चांदी खरीदने की सामर्थ्य न हो, वे धनिया खरीदकर भी मां लक्ष्मी और कुबेर देव की कृपा पा सकते हैं। आइए जानें कि धनिया क्यों खरीदा जाता है और खरीदने के बाद क्या उपाय किया जाता है।

Dhanteras Remedies

धनतेरस पर धनिया क्यों खरीदते हैं?
धनतेरस और "धन" का नाम एक-दूसरे से जुड़ा है, और धनिया शब्द की ध्वनि भी "धन" से मिलती है। इसलिए इसे धन-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। साबुत धनिया के बीज को बहुत शुभ और बरकत देने वाला समझा जाता है। यह वस्तु सस्ती भी है और हर परिवार की पहुँच में है, इसलिए यह परंपरा आम घरों में खूब निभाई जाती है।

धनिया खरीदने के बाद क्या करें?
प्रचलित मान्यताओं के अनुसार यह उपाय किया जाता है:

1. पूजा में अर्पित करें। धनिया घर लाकर साफ स्थान पर रखें। धनतेरस की संध्या को लक्ष्मी-कुबेर पूजन के समय गणेश जी, मां लक्ष्मी और कुबेर देव के सामने साबुत धनिया रखें।

2. गुड़ के साथ भोग लगाएं। कई परिवारों में साबुत धनिया को गुड़ के साथ मिलाकर प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।

3. तिजोरी या धन-स्थान में रखें। पूजा के बाद थोड़ा धनिया लाल या पीले कपड़े में बाँधकर तिजोरी, अलमारी या उस जगह रखें जहां आप धन रखते हैं। माना जाता है कि इससे धन में वृद्धि होती है।

4. बाकी बीज बगीचे या गमले में बोएं। पूजा के बाद कुछ दाने गमले या बगीचे में बो दें। यह घर में हरियाली और समृद्धि के बढ़ने का प्रतीक माना जाता है।

पूजा का शुभ समय
धनतेरस का पूजन प्रदोष काल में सबसे शुभ माना जाता है, जो सूर्यास्त के बाद शुरू होता है। सही मुहूर्त के लिए अपने शहर का पंचांग देखें या किसी विद्वान पंडित से पूछ लें, क्योंकि समय स्थान के अनुसार थोड़ा बदलता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • धनिया हमेशा साबुत खरीदें, पिसा हुआ नहीं।
  • खरीदने से पहले देख लें कि दाने साफ, सूखे और बिना कीड़े के हों।
  • पूजा से पहले घर की सफाई कर लें, क्योंकि स्वच्छ घर में लक्ष्मी का वास माना जाता है।
  • श्रद्धा और सच्चे मन से किया गया छोटा उपाय भी फलदायी माना जाता है।

धनिया खरीदना एक सरल, सस्ती और श्रद्धा से भरी परंपरा है। यह उपाय आस्था का विषय है और इसे किसी चमत्कारिक गारंटी की तरह नहीं, बल्कि शुभ भावना से जुड़ी रीति के रूप में अपनाना चाहिए। असली समृद्धि मेहनत, बचत और अच्छे संस्कारों से आती है, और पूजा उसमें विश्वास और सकारात्मकता जोड़ती है।

Story first published: Friday, November 6, 2026, 16:37 [IST]
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