Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें जरूरी नियम और पारण का समय

Can We Drink Water In Jitiya Vrat: हिंदू धर्म में जितिया व्रत का खास महत्व माना जाता है। इसे जिउतिया या जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है।यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए रखती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, जितिया व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। जितिया को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें व्रत रखने वाली महिलाएं अन्न के साथ पानी भी ग्रहण नहीं करती हैं। इसी वजह से अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या जितिया व्रत के दौरान पानी पी सकते हैं या नहीं। धार्मिक मान्यताओं में इसे लेकर कुछ नियम बताए गए हैं। आइए, जानते हैं जितिया व्रत में पानी पीने को लेकर क्या नियम हैं -

Jitiya Vrat 2026 Rules

जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं?

जितिया व्रत या जीवित्पुत्रिका व्रत हिंदू धर्म के कठिन व्रतों में गिना जाता है। इसे मुख्य रूप से माताएं अपने पुत्र की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड में यह व्रत विशेष श्रद्धा के साथ रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जितिया व्रत निर्जला रखा जाता है, यानी व्रत वाले दिन पानी भी नहीं पिया जाता। माना जाता है कि इस तरह संयम और तपस्या के साथ व्रत रखने से भगवान जीमूतवाहन प्रसन्न होते हैं और संतान को लंबी उम्र व परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

जितिया व्रत में कब पी सकते हैं पानी?

जितिया व्रत वाले दिन पानी नहीं पिया जाता। व्रत शुरू होने से पहले सूर्योदय से पहले पानी पी सकते हैं। इसके अलावा, एक दिन पहले नहाय-खाय के दौरान भोजन किया जाता है। जिस दिन व्रत रखा जाता है, उस दिन अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। अगले दिन पूजा करने और भगवान सूर्य को जल अर्पित करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इसके बाद ही पानी और अन्न ग्रहण किया जाता है। हालांकि, बीमार और गर्भवती महिलाओं के लिए इस तरह के निर्जला व्रत में छूट मानी जाती है और वे जरूरत के अनुसार पानी पी सकती हैं।

जितिया व्रत के नियम

व्रत से एक दिन पहले व्रती महिलाएं इसकी तैयारी करती हैं और फलाहार करती हैं।
व्रत वाले दिन सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक अन्न और जल का त्याग किया जाता है।
इस दौरान भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है और व्रत की कथा सुनी जाती है।
अगले दिन सुबह व्रत का पारण किया जाता है। इसके बाद ही जल और अन्न ग्रहण किया जाता है।

जितिया व्रत का पारण कब किया जाता है?

इस साल जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को है। ऐसे में, व्रत का पारण अगले दिन यानी 4 अक्टूबर, रविवार को किया जाएगा। व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान और पूजा करने के बाद, स्थानीय पंचांग में बताए गए समय के अनुसार पारण करती हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, जितिया व्रत रखने वाली महिलाएं 4 अक्टूबर, रविवार को सुबह 7:28 बजे के बाद पारण कर सकती हैं। पारण से पहले सूर्य को अर्घ्य देने की भी परंपरा कई जगहों पर मानी जाती है। चूंकि पारण का सही समय शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग का समय देखना बेहतर रहेगा।

Story first published: Saturday, October 3, 2026, 10:47 [IST]
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