Navratri Va Durga Puja: नवरात्रि और दुर्गा पूजा में क्या अंतर है? एक ही देवी, फिर क्यों अलग हैं दोनों पर्व

Navratri Va Durga Puja: शारदीय नवरात्रि का त्योहार पूरे देश में बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि 11, रविवार अक्टूबर से शुरू होगी और इसका समापन 19 अक्टूबर, सोमवार को होगा। पूरे भारत में इस दौरान मां दुर्गा को अलग-अलग तरीके से पूजा जाता है। नवरात्रि में कहीं मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है, तो कहीं भव्य पंडाल सजाकर दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है। हालांकि दोनों ही त्योहार मां दुर्गा को समर्पित हैं, लेकिन इन्हें मनाने का तरीका और धार्मिक परंपराएं अलग-अलग हैं। उत्तर भारत में जहां लोग नवरात्रि के दौरान व्रत और पूजा करते हैं, वहीं पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा जैसे राज्यों में दुर्गा पूजा का खास उत्साह देखने को मिलता है। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि जब देवी एक ही हैं, तो नवरात्रि और दुर्गा पूजा अलग कैसे हैं? आइए, जानते हैं नवरात्रि और दुर्गा पूजा में क्या अंतर है -

Navratri Vs Durga Pooja

नवरात्रि क्या है?

नवरात्रि का अर्थ है नौ रातें। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री से पूजा शुरू होती है और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में भक्त मां का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा के साथ कन्या पूजन का भी विशेष महत्व माना जाता है। वहीं, कई जगहों पर गरबा, डांडिया और रामलीला जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

दुर्गा पूजा क्या है?

दुर्गा पूजा मुख्य रूप से पूर्वी भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। खासकर पश्चिम बंगाल में इस पर्व का अलग ही रंग देखने को मिलता है। यहां कई दिनों तक बड़े-बड़े पंडाल बनाए जाते हैं और उनमें मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है। दुर्गा पूजा में मां दुर्गा को महिषासुर का वध करते हुए दिखाया जाता है। लोग नए कपड़े पहनकर पूजा पंडालों में जाते हैं और मां के दर्शन करते हैं। दुर्गा पूजा के दौरान भोग, मिठाइयों और पारंपरिक पकवानों का भी खास महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी दुर्गा ने महिषासुर का संहार करके बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया था। दुर्गा पूजा के दौरान षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी और विजयादशमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना होती है। दशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इसे मां के अपने मायके से वापस ससुराल जाने की परंपरा से भी जोड़ा जाता है।

मां एक हैं, फिर पूजा का तरीका अलग क्यों?

नवरात्रि और दुर्गा पूजा, दोनों त्योहारों में में दुर्गा मां की पूजा होती है। अंतर सिर्फ इतना है कि अलग-अलग क्षेत्रों में इन त्योहारों को मनाने की परंपराएं अलग हैं। नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा मुख्य रूप से की जाती है। भक्त व्रत, पूजा और साधना के जरिए मां का आशीर्वाद पाने की कामना करते हैं। वहीं, दुर्गा पूजा में मां दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी स्वरूप और महिषासुर पर उनकी विजय को दर्शाया जाता है। दोनों ही परंपराएं हमें यही संदेश देती हैं कि सच्चाई, साहस और धर्म की हमेशा जीत होती है।

Story first published: Wednesday, October 7, 2026, 13:00 [IST]
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