Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि

Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के स्मरण का समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध जैसे कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा से किए गए इन कार्यों से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को आशीर्वाद देते हैं। श्राद्ध के भोजन में कई घरों में मिठाई के रूप में खीर भी बनाई जाती है। लेकिन देवकीनंदन ठाकुर के एक वायरल वीडियो में श्राद्ध के दिन खीर बनाने को लेकर अलग बात कही गई है। उनके अनुसार, इस दिन खीर बनाना अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से न सिर्फ पितर नाराज होते हैं, बल्कि कई तरह के दोष भी लगते हैं। ऐसे में, ऐसे जानते हैं कि क्या सच में पितृपक्ष में खीर बनाना अशुभ माना जाता है -

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वायरल वीडियो में क्या है?

देवकीनंदन ठाकुर के वायरल वीडियो में पितृपक्ष के दौरान खीर बनाने को लेकर एक कथा बताई गई है। उनके अनुसार, जो लोग पितृपक्ष में खीर बनाते हैं, उनसे पितर नाराज हो सकते हैं। कथा में बताया गया है कि पितृपक्ष के समय धर्मराज यमराज अपनी सवारी पर बैठकर पितृलोक पहुंचे। वहां उन्होंने पितरों के देवता वसु आदि को प्रणाम किया। जब उनसे पितृलोक आने की वजह पूछी गई तो यमराज ने बताया कि वह एक निवेदन लेकर आए हैं। कथा के मुताबिक, यमराज से कहा गया कि श्राद्ध के दिन पितरों को खीर न खिलाई जाए। इसकी वजह पूछने पर बताया गया कि यमराज का वाहन भैंसा है और उसकी शिकायत है कि वह यमराज को अपनी पीठ पर लेकर घूमता है, जबकि पितृ भैंस के दूध से बनी खीर खाते हैं।

भैंसे का कहना था कि उसकी मां के दूध को इस तरह ग्रहण करना उचित नहीं है। इसके बाद यमराज ने पितृलोक में मौजूद लोगों से पितरों को भैंस के दूध की खीर न देने की बात कही। कहा जाता है कि वसु आदि ने यमराज की यह बात सभी पितरों तक पहुंचाई और पितरों ने भी इसे स्वीकार कर लिया। इसी मान्यता के आधार पर देवकीनंदन ठाकुर बताते हैं कि पितृपक्ष में गाय के दूध से बनी खीर पितरों को अर्पित की जा सकती है, लेकिन भैंस के दूध की खीर नहीं बनानी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि बाजार की मिठाई देने के बजाय घर पर ही कोई मिठाई बनाकर पितरों को भोग लगाना चाहिए।

सिर्फ गाय के दूध की खीर बनाएं

वीडियो में देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि श्राद्ध में भैंस के दूध की खीर नहीं बनानी चाहिए और न ही बकरी के दूध की। सिर्फ देसी गाय के दूध की खीर होनी चाहिए, जिसे पितरों को अर्पण किया जाए। क्योंकि गाय हमारे धर्म की मूल आधार है। जो गाय के दूध से खीर बनाकर पितरों को अर्पण करते हैं, पितृ उन्हें बहुत आशीर्वाद दे के जाता है। बहुत ज्यादा आशीर्वाद ले के जाता है।

संयम और श्रद्धा का समय है पितृपक्ष

पितृपक्ष को केवल श्राद्ध और तर्पण करने का समय ही नहीं, बल्कि संयम और श्रद्धा से रहने की अवधि भी माना जाता है। इसी वजह से इस दौरान लोग सादा और सात्विक भोजन करने पर ध्यान देते हैं।

Story first published: Thursday, October 1, 2026, 14:30 [IST]
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