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Spinal Muscular Atrophy: क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी? जानें इस बीमारी के कारण, लक्षण और इलाज
Spinal Muscular Atrophy: दुनिया में कई ऐसी गंभीर बीमारियां हैं, जिनका इलाज काफी महंगा होता है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) भी ऐसी ही बीमारी है, जिसके इलाज पर करीब 10 करोड़ रुपये का खर्च आता है। यह बीमारी मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित कर सकती है। इसके कारण बच्चों को बैठने, चलने, निगलने और सांस लेने जैसी गतिविधियों में परेशानी हो सकती है। यह एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें समय पर पहचान और सही इलाज बेहद जरूरी होता है। आइए, इस लेख में गुरुग्राम स्थित नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट (पीडियाट्रिक मेडिसिन, पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर मेडिसिन), डॉ. बिलाल खान से जानते हैं कि स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी क्या है, इसके कारण, लक्षण और इलाज के बारे में -

क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी?
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है, जो मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसों यानी मोटर न्यूरॉन्स को प्रभावित करती है। ये नसें रीढ़ की हड्डी से जुड़ी होती हैं और मांसपेशियों को काम करने के संकेत देती हैं। जब ये नसें ठीक से काम नहीं करतीं, तो मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं।
यह बीमारी मुख्य रूप से SMN1 जीन में बदलाव (म्यूटेशन) के कारण होती है। यह जीन शरीर में SMN प्रोटीन बनाने में मदद करता है, जो मोटर न्यूरॉन्स के सही कामकाज के लिए जरूरी है। इस प्रोटीन की कमी से मांसपेशियों की ताकत कम होने लगती है।
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के क्या कारण हैं?
SMA का मुख्य कारण आनुवंशिक बदलाव है। यह बीमारी आमतौर पर माता-पिता से बच्चे में पहुंच सकती है। यदि माता और पिता दोनों में इस बीमारी से जुड़ा जीन बदलाव मौजूद है, तो बच्चे में SMA होने की आशंका रहती है। इसे ऑटोसोमल रिसेसिव बीमारी कहा जाता है। SMN1 जीन में बदलाव के कारण शरीर में पर्याप्त SMN प्रोटीन नहीं बन पाता। इससे मोटर न्यूरॉन्स प्रभावित होते हैं और मांसपेशियों तक सही संकेत नहीं पहुंच पाते। यह बीमारी संक्रमण, खानपान की कमी या सामान्य शारीरिक गतिविधियों के कारण नहीं होती।
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के लक्षण
SMA के लक्षण हर बच्चे में एक जैसे नहीं दिखते, लेकिन इसमें मांसपेशियों की कमजोरी आम समस्या है। इसके अलावा ये दिक्कतें भी हो सकती हैं -
शरीर में ढीलापन रहना
सिर और गर्दन को संभालने में परेशानी होना
बैठने, खड़े होने या चलने में कठिनाई होना
शरीर का संतुलन बनाए रखने में दिक्कत होना
दूध पीने या खाना निगलने में परेशानी होना।
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी का इलाज
SMA के इलाज के लिए मरीज की उम्र, बीमारी की गंभीरता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखा जाता है। इसके उपचार में दवाओं के साथ सहायक देखभाल भी जरूरी होती है।
जीन थेरेपी: Zolgensma एक जीन थेरेपी है, जिसका इस्तेमाल कुछ पात्र मरीजों में किया जाता है। इसका उद्देश्य SMN1 जीन की कमी से जुड़ी समस्या को दूर करने में मदद करना है।
दवाएं: Nusinersen और Risdiplam जैसी दवाएं शरीर में SMN प्रोटीन के स्तर को बढ़ाने में मदद करती हैं। मरीज के लिए कौन-सा उपचार सही है, इसका फैसला विशेषज्ञ डॉक्टर करते हैं।
फिजियोथेरेपी और देखभाल: फिजियोथेरेपी से मांसपेशियों की गतिविधियों और जोड़ों की लचक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। कुछ मरीजों को सांस लेने, भोजन निगलने और पर्याप्त पोषण पाने के लिए विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
SMA का इलाज महंगा क्यों है?
SMA के इलाज में खास तरह की जीन आधारित दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इन दवाओं का खर्च काफी ज्यादा होता है। इसके अलावा इस बीमारी से जुड़ा इलाज और देखभाल भी महंगी पड़ सकती है। कुछ मामलों में इलाज का खर्च करोड़ों रुपये तक पहुंच जाता है। इसलिए समय पर बीमारी की पहचान और विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह से इलाज शुरू करना महत्वपूर्ण है।



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