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Captain Smit Machchhar: कैप्टन 'स्मित मच्छर' के सरनेम का क्या है मतलब? जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी
Captain Smit Machchhar: भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पिछले चार साल से ज्यादा समय से विमान कंपनी फ्लाईदुबई के लिए उड़ान भर रहे हैं। बीते बुधवार को उन्होंने मुश्किल हालात में हिम्मत और सूझबूझ दिखाते हुए विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाई। बताया जा रहा है कि कॉकपिट में उनके को-पायलट ने उन पर चाकू से हमला किया था, इसके बावजूद उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनकी बहादुरी की चर्चा कर रहे हैं, लेकिन उनके नाम ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। दरअसल, 'मच्छर' सरनेम सुनने में हिंदी के शब्द 'मच्छर' जैसा लगता है, इसलिए कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस सरनेम का मतलब क्या है और इसके पीछे की कहानी क्या है। आइए, जानते हैं -

स्मित मच्छर के सरनेम 'मच्छर' का क्या मतलब है?
कैप्टन स्मित मच्छर का नाम सामने आने के बाद उनके सरनेम को लेकर भी लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है। गुजरात और पश्चिमी भारत से बाहर रहने वाले कई लोगों को 'मच्छर' सुनते ही हिंदी-गुजराती में इस्तेमाल होने वाले 'मच्छर' शब्द की याद आती है। लेकिन 'मच्छर' गुजरात में इस्तेमाल होने वाला एक स्थापित सरनेम है और इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं और व्याख्याएं मिलती हैं।
गुजरात के ब्रह्मक्षत्रिय समुदाय से जुड़ा है सरनेम
'मच्छर' गुजरात में इस्तेमाल होने वाला एक स्थापित सरनेम है। यह नागर ब्राह्मणों और लोहाना समुदाय में भी पाया जाता है। हालांकि, इस सरनेम की शुरुआत ठीक किस तरह हुई, इसे लेकर कोई पक्की जानकारी नहीं है। गुजरात के सरनेम पर हुई पुरानी स्टडी में इसके पीछे कई संभावनाएं बताई गई हैं। इनमें समय के साथ शब्द में बदलाव, किसी जगह के नाम से परिवार की पहचान बनना या किसी उपनाम का आगे चलकर सरनेम बन जाना शामिल है। प्रोफेसर विनोदिनी नीलकंठ ने 1942 में लिखी अपनी किताब 'गुजराती अटकोनो इतिहास' में ऐसे सरनेम पर भी चर्चा की थी, जो मजाकिया या व्यंग्यात्मक उपनामों से बने। उन्होंने बताया था कि कई बार किसी व्यक्ति की खासियत ही आगे चलकर उसके परिवार की पहचान बन जाती है। हालांकि, उन्होंने यह भी सावधानी बरतने की बात कही थी कि किसी सरनेम का जो कारण ऊपर से साफ दिखाई देता है, जरूरी नहीं कि उसकी असली शुरुआत भी वही हो।
'मच्छर' सरनेम के पीछे क्या हैं अलग-अलग मान्यताएं?
'मच्छर' सरनेम की शुरुआत को लेकर कोई एक तय वजह नहीं मिलती। इसके बारे में अलग-अलग बातें कही जाती हैं। एक मान्यता के मुताबिक, गुजराती शब्द 'मत्सर' समय के साथ बदलकर 'मच्छर' या 'मच्छर' हो गया, जिसका संबंध ईर्ष्या या जलन से बताया जाता है। एक दूसरी धारणा यह है कि मच्छरों की अधिकता वाले इलाके में रहने वाले किसी परिवार को पहचान के तौर पर यह नाम मिला होगा। इसके अलावा, किसी दुबले-पतले या छोटे कद के व्यक्ति को मजाक में दिए गए नाम से भी यह सरनेम शुरू होने की बात कही जाती है। 'मच्छर' नाम से जुड़ा 1960 के दशक का एक किस्सा भी बताया जाता है। उस समय पूर्व सांसद जयसुखलाल हाथी का सम्मान एक 'मच्छर' सरनेम वाले व्यक्ति ने किया था। इस पर मजाकिया अंदाज में कहा गया था, 'क्या जमाना आ गया है, हाथी का सम्मान एक मच्छर कर रहा है। इसके अलावा, 'मच्छर' के एक अर्थ के तौर पर जोश या जुनून का भी उल्लेख मिलता है। इसका संदर्भ गुजराती भाषा के विश्वकोश 'भगवद गोमंडल कोश' के वॉल्यूम 7, पेज नंबर 6873 से दिया जाता है।
गुजराती नागर ब्राह्मणों के सरनेम क्यों हैं इतने अलग?
गुजराती नागर ब्राह्मणों, खासकर सौराष्ट्र के वडनगर नागरों के सरनेम बाकी ब्राह्मण समुदायों से काफी अलग सुनाई देते हैं। जहां शर्मा, मिश्रा, त्रिपाठी, त्रिवेदी, भट्ट, दवे, व्यास और पांड्या जैसे सरनेम आम तौर पर सुनने को मिलते हैं, वहीं नागर समुदाय में हाथी, घोड़ा, मच्छर, मंकड़, मंकौड़ी और जुआ जैसे अलग तरह के सरनेम भी मिलते हैं। यही वजह है कि 'मच्छर' जैसे सरनेम को सुनकर लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।



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