Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: क्या आप जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री का असली नाम? जानें 10 रोचक तथ्य

Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: हर साल 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी के साथ देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी मनाई जाती है. लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था. उनका जीवन संघर्ष, देशसेवा और सादगी से जुड़ा रहा। उन्होंने छोटी उम्र में ही देश की आजादी के बारे में सोचना शुरू कर दिया था और 16 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़कर गांधीजी के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए। आजादी के बाद उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं और 9 जून 1964 को देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया और खाद्यान्न संकट के समय लोगों से उपवास रखने की अपील भी की। उनकी सादगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि परिवार के लिए कार खरीदने के लिए उन्होंने बैंक से 5 हजार रुपये का लोन लिया था, जिसे उनके निधन के बाद पत्नी ललिता देवी ने अपनी पेंशन से चुकाया। आइए, शास्त्री जी की 122वीं जयंती पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी 10 खास बातें -

Lal Bahadur Shastri Jayanti

1. डेढ़ साल की उम्र में खोया पिता का साथ

लाल बहादुर परिवार में सबसे छोटे थे, इसलिए उन्हें प्यार से 'नन्हें' कहा जाता था। उनके पिता स्कूल शिक्षक थे और जब वे महज डेढ़ साल के थे, तभी उनका निधन हो गया। इसके बाद उनकी मां तीनों बच्चों को लेकर अपने पिता के घर चली गईं।

2. नंगे पैर स्कूल जाते थे

गरीबी के बीच उनका बचपन बीता। हाई स्कूल की पढ़ाई के लिए वे वाराणसी में चाचा के साथ रहे और गर्मियों में भी बिना जूतों के कई किलोमीटर पैदल स्कूल जाते थे।

3. 16 साल में पढ़ाई छोड़ी

करीब 11 साल की उम्र से ही उनके मन में देश की आजादी का विचार था। 16 साल की उम्र में गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़ने के लिए उन्होंने पढ़ाई छोड़ने का फैसला किया।

4. 'शास्त्री' सरनेम नहीं, उपाधि थी

काशी विद्यापीठ से मिली स्नातक की उपाधि 'शास्त्री' थी। यही आगे चलकर उनके नाम का हिस्सा बन गई।

5. दहेज में लिया सिर्फ चरखा

1927 में ललिता देवी से शादी के समय उन्होंने दहेज में सिर्फ एक चरखा और कुछ गज हाथ से काता हुआ कपड़ा स्वीकार किया। इसके अलावा कुछ लेने से इनकार कर दिया।

6. स्वतंत्रता संग्राम में 7 साल जेल

1930 में गांधीजी के नमक कानून तोड़ने के आंदोलन के बाद शास्त्री जी स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय हो गए। उन्होंने कई आंदोलनों में हिस्सा लिया और ब्रिटिश जेलों में कुल करीब सात साल बिताए।

7. संसदीय सचिव से प्रधानमंत्री तक

आजादी के बाद वे उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव बने। 1951 में केंद्र की राजनीति में आने के बाद उन्होंने रेल, परिवहन एवं संचार, वाणिज्य एवं उद्योग और गृह जैसे मंत्रालय संभाले। 27 मई 1964 को नेहरू के निधन के बाद 2 जून को उन्हें कांग्रेस दल का नेता चुना गया और 9 जून 1964 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

8. 'जय जवान, जय किसान' का नारा

1965 के खाद्यान्न संकट के दौरान शास्त्री जी ने लोगों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की अपील की। उन्होंने पहले अपने परिवार में इसका प्रयोग किया, ताकि यह देखा जा सके कि उनके बच्चे भी एक दिन बिना भोजन के रह सकते हैं या नहीं। परिवार के इस प्रयोग के बाद उन्होंने देशवासियों से भी उपवास और भोजन बचाने की अपील की। उन्होंने 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया और खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए हरित क्रांति को बढ़ावा दिया।

9. पत्नी ने पेंशन से चुकाया 5 हजार रुपए का लोन

परिवार के लिए फिएट कार खरीदने की कीमत 12 हजार रुपए थी, जबकि बैंक खाते में 7हजार रुपए थे। शास्त्री जी ने पंजाब नेशनल बैंक से 5 हजार रुपए का लोन लिया। उनके निधन के बाद पत्नी ललिता देवी ने पेंशन से यह कर्ज चुकाया। कार आज शास्त्री मेमोरियल में रखी है।

10. ताशकंद में रहस्मयी तरीके से हुआ निधन

11 जनवरी 1966 को ताशकंद में ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर के कुछ घंटे बाद शास्त्री जी का निधन हो गया। आधिकारिक तौर पर मौत की वजह हार्ट अटैक बताई गई, लेकिन परिवार की ओर से जहर दिए जाने की आशंका जताई गई और उनकी मौत को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

Story first published: Friday, October 2, 2026, 11:30 [IST]
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