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धनतेरस पर 13 दीपक क्यों जलाए जाते हैं? प्रदोष काल में पढ़ें यमदीपदान की कथा
धनतेरस के दिन सोना-चाँदी और बर्तन खरीदने की परंपरा तो सब जानते हैं, पर संध्या के समय 13 दीपक जलाने के पीछे की मान्यता कम लोग जानते हैं। यह परंपरा परिवार की सुरक्षा, अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और समृद्धि से जुड़ी है।

13 की संख्या का महत्व
धनतेरस कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। त्रयोदशी यानी तेरहवीं तिथि, इसीलिए इस दिन 13 दीपक जलाने की परंपरा चली आ रही है। इनमें से एक दीपक विशेष रूप से यमदीपम कहलाता है।
यमदीपदान की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार राजा हेम के पुत्र की कुंडली में लिखा था कि विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से उसकी मृत्यु हो जाएगी। विवाह के चौथे दिन नवविवाहिता पत्नी ने अपने पति को सोने नहीं दिया। उसने द्वार पर अपने सारे आभूषण और सोने-चाँदी के सिक्कों का ढेर लगा दिया और चारों ओर असंख्य दीपक जला दिए। फिर वह पूरी रात कथाएं और गीत सुनाकर पति को जगाए रखती रही।
जब यमराज सर्प का रूप धरकर पहुँचे, तो दीपकों और आभूषणों की चमक से उनकी आँखें चौंधिया गईं और वे भीतर प्रवेश नहीं कर सके। वे उसी ढेर पर बैठकर गीत सुनते रहे और सुबह होते ही लौट गए। इस प्रकार राजकुमार के प्राण बच गए। तभी से धनतेरस की संध्या को यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा शुरू हुई। मान्यता है कि इससे परिवार में अकाल मृत्यु का भय टल जाता है।
धनतेरस से जुड़ा एक और तथ्य
इसी तिथि पर समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे आयुर्वेद के देवता और आरोग्य के प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए इस दिन स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना भी की जाती है, और दीपक इसी आस्था का प्रतीक हैं।
दीपक जलाने की विधि
- समय: प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद का समय, सबसे शुभ माना जाता है।
- दीपक: मिट्टी के 13 दीपक लें और उन्हें साफ पानी से धोकर सुखा लें।
- तेल और बाती: सरसों के तेल या तिल के तेल में रुई की बाती डालें। यमदीपम के लिए चार मुख वाला दीपक पारंपरिक माना जाता है।
- यमदीपम: यह दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें, क्योंकि दक्षिण को यम की दिशा माना जाता है।
- बाकी 12 दीपक: इन्हें पूजा घर, तुलसी के पास, रसोई, आँगन, छत, बालकनी, पानी रखने के स्थान और घर के अन्य कोनों में रखें, ताकि कोई स्थान अँधेरा न रहे।
- मंत्र: यमदीपम जलाते समय प्रार्थना करें कि यमराज प्रसन्न हों और परिवार को अकाल मृत्यु के भय से बचाएं।
- ध्यान रखने योग्य बातें
- घर की साफ-सफाई पहले ही कर लें, क्योंकि स्वच्छ घर में ही लक्ष्मी का वास माना जाता है।
- दीपकों को हवा से बचाकर रखें और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें, खासकर बच्चों के पास।
- परंपराओं और विधियों में क्षेत्र और परिवार के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए अपने कुल की रीति या किसी विद्वान पंडित की सलाह का पालन करें।
13 दीपक सिर्फ रोशनी नहीं, बल्कि सुरक्षा, आरोग्य और समृद्धि की प्रार्थना हैं। जैसे उस राजकुमारी ने दीपकों के उजाले से अपने पति की रक्षा की, वैसे ही हम भी इस दिन दीप जलाकर परिवार के लिए सुख और दीर्घायु की कामना करते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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