Latest Updates
-
Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री, विधि और नियम -
World Mental Health Day 2026: कब और क्यों मनाया जाता है विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस? जानें इस बार की थीम -
Sarva Pitru Amavasya 2026: सर्वपितृ अमावस्या पर इन 5 जगहों पर जलाएं दीपक, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद -
Navratri 2026 Vrat Niyam: नवरात्रि व्रत में क्या करें और क्या न करें? जानें व्रत रखने के जरूरी नियम -
'खुद की चीयरलीडर बनो', प्रेग्नेंसी के बाद बढ़े वजन को लेकर ट्रोलिंग पर पहली बार बोलीं कैटरीना कैफ -
Evil Dead...नाना पाटेकर के निधन पर तनुश्री दत्ता ने दिया विवादित बयान, सोशल मीडिया पर मचा बवाल -
World Egg Day 2026: अंडे के साथ भूलकर भी नहीं खानी चाहिए ये 5 चीजें, सेहत को हो सकता गंभीर नुकसान -
World Post Day 2026: कब और कैसे हुई विश्व डाक दिवस की शुरुआत? जानें दुनिया के सबसे ऊंचे पोस्ट ऑफिस के बारे में -
Sarva Pitru Amavasya 2026: 9 या 10 अक्टूबर, सर्वपितृ अमावस्या कब है? जानें तिथि, कुतुप-रौहिण मुहूर्त और महत्व -
Indian Air Force Day 2026: दुनिया की सबसे ताकतवर एरयफोर्स में से एक है भारतीय वायुसेना, जानें 10 खास बातें
बढ़े हुए प्रोस्टेट का मतलब कैंसर नहीं, जानें बढ़े हुए प्रोस्टेट, प्रोस्टेटाइटिस और प्रोस्टेट कैंसर में अंतर
उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं। बार-बार पेशाब आना, पेशाब करने में परेशानी या पेशाब की धार कम होना जैसे लक्षण दिखने पर कई पुरुष इसे प्रोस्टेट कैंसर समझकर डर जाते हैं। हालांकि, ये लक्षण हर प्रोस्टेट कैंसर का लक्षण नहीं होते। प्रोस्टेट का बढ़ना, प्रोस्टेट में सूजन और प्रोस्टेट कैंसर, तीन अलग-अलग स्थितियां हैं। इनके कुछ लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर यह पता लगाना संभव नहीं है कि समस्या किस वजह से है। आज इस लेख में से डॉ. गोकुलकृष्णन पी जे, लीड कंसल्टेंट और HOD, यूरोलॉजी विभाग, एस्टर व्हाइटफ़ील्ड हॉस्पिटल, से जानते हैं कि इन तीनों में क्या अंतर है -

बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) क्या है?
बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने की एक गैर-कैंसर वाली स्थिति है। यह समस्या आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे विकसित होती है। प्रोस्टेट ग्रंथि मूत्राशय से पेशाब को बाहर ले जाने वाली नली यानी यूरेथ्रा के आसपास होती है। जब प्रोस्टेट का आकार बढ़ता है, तो यह यूरेथ्रा पर दबाव डाल सकती है और पेशाब के प्रवाह में रुकावट पैदा कर सकती है। इसकी वजह से पेशाब की धार कमजोर या रुक-रुककर आना, पेशाब शुरू करने में परेशानी, बार-बार या तुरंत पेशाब लगना और रात में कई बार पेशाब के लिए उठना जैसे लक्षण हो सकते हैं। ध्यान रखें कि BPH होने का मतलब प्रोस्टेट कैंसर होना नहीं है।
प्रोस्टेटाइटिस के लक्षण
प्रोस्टेटाइटिस में प्रोस्टेट ग्रंथि में सूजन हो जाती है। यह समस्या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण हो सकती है, जबकि कुछ मामलों में इसका संबंध बैक्टीरिया से नहीं होता। इसके लक्षण BPH से अलग भी हो सकते हैं। प्रोस्टेटाइटिस में पेशाब करते समय दर्द या जलन, पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में दर्द, पेशाब करने में परेशानी और स्खलन के दौरान दर्द हो सकता है। अगर व्यक्ति को एक्यूट बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस है, तो बुखार और ठंड लगने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण
प्रोस्टेट कैंसर प्रोस्टेट की कोशिकाओं की असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि से होता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में कई पुरुषों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। जब लक्षण सामने आते हैं, तो वे BPH जैसे हो सकते हैं। इनमें पेशाब करने में परेशानी, बार-बार पेशाब आना या रात में पेशाब के लिए उठना शामिल हो सकता है। इसलिए कई बार पेशाब से जुड़ी समस्या होने या कोई लक्षण न होने पर भी प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है।
PSA बढ़ने का मतलब हमेशा कैंसर नहीं
प्रोस्टेट से जुड़ी जांच में PSA टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन PSA एक नॉन-स्पेसिफिक मार्कर है। इसका स्तर प्रोस्टेट कैंसर के अलावा BPH और प्रोस्टेटाइटिस जैसी स्थितियों में भी बढ़ सकता है। इसलिए PSA बढ़ने का सीधा मतलब कैंसर होना नहीं है। डॉक्टर PSA रिपोर्ट को व्यक्ति की उम्र, लक्षण, जांच और अन्य जरूरी कारकों के साथ देखते हैं।
एक से अधिक समस्याएं साथ हो सकती हैं
डॉ. मल्लिकार्जुन सी, मैनेजिंग डायरेक्टर, चीफ कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट और रोबोटिक सर्जन, एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी, हैदराबाद, बताते हैं कि "BPH, प्रोस्टेटाइटिस और प्रोस्टेट कैंसर एक-दूसरे से पूरी तरह अलग होने के बावजूद एक ही व्यक्ति में एक साथ भी हो सकते हैं। इसलिए पेशाब से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और न ही खुद से किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना चाहिए। लक्षणों के आधार पर डॉक्टर यूरिन टेस्ट, PSA टेस्ट, शारीरिक जांच, इमेजिंग और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी की सलाह दे सकते हैं। सही कारण की पहचान के लिए यूरोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है। पेशाब की समस्या होने पर घबराने के बजाय समय पर जांच कराना बेहतर है। हर बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि कैंसर नहीं होती, लेकिन लक्षणों को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
