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World Alzheimer's Day 2026: भूलने की आदत कहीं अल्जाइमर का शुरुआती संकेत तो नहीं, जानें इसके लक्षण और इलाज
World Alzheimer's Day 2026: अल्जाइमर को आमतौर पर लोग भूलने की बीमारी मानते हैं, लेकिन यह इससे कहीं अधिक गंभीर और जटिल स्थिति है। यह मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली एक प्रगतिशील बीमारी है, जिसमें समय के साथ याददाश्त के साथ-साथ सोचने-समझने, भाषा, निर्णय लेने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते। विश्व अल्जाइमर्स दिवस के मौके पर डॉ। उत्कर्ष भगत, निदेशक एवं वरिष्ठ सलाहकार-न्यूरोसर्जरी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम से जानते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ होने वाली सामान्य भूलने की समस्या और अल्जाइमर के लक्षणों में क्या अंतर है -

अल्जाइमर में कौन-सी याददाश्त प्रभावित होती है?
डॉ। उत्कर्ष भगत बताते हैं कि हमारी याददाश्त कई तरह की होती है और अल्जाइमर में सभी यादें एक साथ प्रभावित नहीं होतीं। बीमारी के शुरुआती चरण में व्यक्ति को नई जानकारी याद रखने में परेशानी हो सकती है। वह अभी हुई बातचीत, हाल की घटना या रखी हुई चीज को भूल सकता है और एक ही सवाल बार-बार पूछ सकता है। वहीं, बचपन या कई साल पुरानी घटनाएं लंबे समय तक याद रह सकती हैं। बीमारी बढ़ने पर दूसरी मानसिक क्षमताएं भी प्रभावित हो सकती हैं। व्यक्ति को सही शब्द खोजने में परेशानी, परिचित जगह पर रास्ता भूलना, पैसे या दवाइयां संभालने में कठिनाई और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो सकती है।
अल्जाइमर की पहचान कैसे करें?
उम्र बढ़ने के साथ कभी-कभी किसी का नाम भूल जाना या कोई चीज कहां रखी है, यह तुरंत याद न आना सामान्य हो सकता है। चिंता तब होती है जब भूलने की समस्या लगातार बढ़ने लगे और इसका असर व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगे। अगर कोई व्यक्ति बार-बार एक ही सवाल पूछता है, परिचित रास्ते पर भटक जाता है, रोज इस्तेमाल होने वाली चीजों का इस्तेमाल भूलने लगता है, बिल या दवाइयां संभाल नहीं पाता या बातचीत के दौरान सामान्य शब्दों को लगातार भूलता है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। चिड़चिड़ापन, सामाजिक गतिविधियों से दूरी और पहले पसंद की जाने वाली चीजों में रुचि कम होना भी ध्यान देने योग्य बदलाव हो सकते हैं।
सही जांच है जरूरी
हर याददाश्त की समस्या अल्जाइमर के कारण नहीं होती। नींद की कमी, तनाव, अवसाद, कुछ दवाइयां, विटामिन की कमी और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं। डॉक्टर मरीज और परिवार से लक्षणों की शुरुआत और उनकी प्रगति के बारे में जानकारी लेते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार संज्ञानात्मक मूल्यांकन (cognitive assessment), ब्लड टेस्ट, ब्रेन इमेजिंग या अन्य जांच की जा सकती हैं।
क्या अल्जाइमर का इलाज संभव है?
डॉ। उत्कर्ष भगत के मुताबिक, "फिलहाल अल्जाइमर को पूरी तरह खत्म करने वाला इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, कुछ दवाएं लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं। कुछ मरीजों में बीमारी को बदलने वाले इलाज (disease-modifying treatments) पर भी विचार किया जा सकता है। इनका इस्तेमाल मरीज की स्थिति और विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर किया जाता है। इसके अलावा, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, सामाजिक जुड़ाव और ब्लड प्रेशर, डायबिटीज व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना भी मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
परिवार की भूमिका भी जरूरी
अल्जाइमर का असर केवल मरीज पर नहीं, बल्कि परिवार और केयर गिवर्स पर भी पड़ता है। मरीज के बार-बार एक ही बात पूछने या किसी काम से मना करने को हमेशा जिद नहीं समझना चाहिए। बीमारी के कारण उसकी समझ और प्रतिक्रिया करने की क्षमता बदल सकती है। अगर भूलने की समस्या लगातार बढ़ रही है, रास्ता भूलने, बातचीत, निर्णय लेने या रोजमर्रा के कामों में परेशानी होने लगी है, तो समय पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर जांच और देखभाल की योजना मरीज और परिवार दोनों के लिए आगे की स्थिति को समझना आसान बना सकती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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