लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी

World Spine Day 2026: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग घंटों मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर पर समय बिताते हैं। इसका असर उनकी रीढ़ की हड्डी पर भी पड़ रहा है। पहले कमर दर्द की समस्या को ज्यादातर बड़े-बुजुर्गों या मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों में देखने को मिलती थी. लेकिन आजकल ऑफिस में काम करने वाले और पढ़ाई करने वाले युवा भी इस समस्या से परेशान हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना और गलत तरीके से बैठना रीढ़ से जुड़ी समस्याओं की वजह बन सकता है। विश्व स्पाइन दिवस के मौके पर डॉक्टरों ने लोगों को रीढ़ की हड्डी की सेहत को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

World Spine Day

लंबे समय तक बैठने से क्यों होता है कमर दर्द?

शैलबी इंटरनेशनल हॉस्पिटल के जॉइंट रिप्लेसमेंट एवं स्पाइन सर्जन डॉ. ललित कुमार बताते हैं कि कई लोगों को लगता है कि भारी सामान नहीं उठाने से उन्हें कमर दर्द नहीं होगा। लेकिन जब उनकी दिनचर्या देखी जाती है, तो पता चलता है कि वे रोजाना 8 से 9 घंटे तक बिना हिले-डुले कुर्सी पर बैठे रहते हैं। परेशानी सिर्फ बैठने से नहीं, बल्कि लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से होती है। रीढ़ की हड्डी हड्डियों, डिस्क और मांसपेशियों से मिलकर बनी होती है। यह शरीर को सहारा देने और उसे लचीला बनाए रखने में मदद करती है। जब हम लंबे समय तक गलत तरीके से बैठते हैं, तो पेट और कूल्हों की मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं, जबकि जांघों की आगे वाली मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ सकता है। इससे कमर के निचले हिस्से में दर्द और अकड़न की समस्या हो सकती है।

गर्दन झुकाकर मोबाइल चलाने से बढ़ रहा टेक्स्ट नेक का खतरा

मोबाइल या लैपटॉप को नीचे रखकर घंटों देखने से गर्दन पर दबाव बढ़ता है। इससे गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है और दर्द होने लगता है। इस समस्या को डॉक्टर 'टेक्स्ट नेक' कहते हैं। यह परेशानी सिर्फ बड़ों में ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले और मोबाइल पर गेम खेलने वाले बच्चों में भी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शारीरिक गतिविधियां कम होने का असर सिर्फ कमर और गर्दन तक सीमित नहीं रहता। इससे मोटापा, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

रीढ़ को फिट रखने के 5 आसान तरीके

1. 30 मिनट का नियम: हर आधे घंटे बाद कुर्सी से उठें, थोड़ा टहलें या स्ट्रेच करें
2. सीधा बैठें: पैर जमीन पर रखें, पीठ को कुर्सी का पूरा सपोर्ट दें
3. स्क्रीन सीधी रखें: लैपटॉप-मॉनिटर आंखों के लेवल पर हो, ताकि गर्दन न झुके
4. रोज एक्टिव रहें: वॉक, साइकिल, स्विमिंग या कोई भी खेल अपनी दिनचर्या में जोड़ें
5. हल्के व्यायाम: डॉक्टर से पूछकर प्लैंक, ब्रिज और बर्ड-डॉग जैसे एक्सरसाइज करें

ये लक्षण दिखें तो न करें नजरअंदाज

डॉ. ललित कुमार के मुताबिक, अगर दर्द थोड़ी देर चलने-फिरने से ठीक हो जाए तो घबराने की बात नहीं। लेकिन अगर दर्द हफ्तों तक बना रहे, पैरों में जाए, झटके लगे, सुन्नता या कमजोरी हो, या बुखार के साथ हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। बिना वजह वजन गिरने के साथ पीठ दर्द होना भी जांच का संकेत है। अपनी मर्जी से लंबे समय तक दर्द की दवा न लें। पहले कारण पता करें। डॉ. कुमार कहते हैं कि रीढ़ की हर तकलीफ का इलाज ऑपरेशन नहीं है। सही एक्सरसाइज, एक्टिव रहना और छोटी-छोटी आदतें बदलने से 80% मामलों में आराम मिल जाता है। इसलिए सबसे जरूरी है - एक जगह पर घंटों चिपके न रहें।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Friday, October 16, 2026, 16:01 [IST]
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