दिवाली पर घी, सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाना है शुभ? आचार्य वसंत विजय महाराज से जानें सही नियम

दिवाली पर कितने दीपक जलाएं और उनमें कौन-सा तेल या घी इस्तेमाल करें, यह सवाल हर घर में उठता है। कोई घी के दीपक को श्रेष्ठ मानता है, तो कोई सरसों या तिल के तेल को। इस लेख में हम आचार्य वसंत विजय महाराज के बताए सुझावों के अनुसार तीनों दीपकों का महत्व और जलाने की सही विधि सरल भाषा में समझा रहे हैं। इन्हें अपनाकर आप श्रद्धा के साथ दीपावली मना सकते हैं।

Diwali Diya Significance

दीपक का महत्व
दीपक अंधकार को हटाकर प्रकाश फैलाने का प्रतीक है। दिवाली पर जलाए गए दीप माँ लक्ष्मी के स्वागत और घर में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए माने जाते हैं। मान्यता है कि जिस दीपक में जो पदार्थ डाला जाता है, उसका अलग प्रभाव और उद्देश्य होता है।

1. घी का दीपक: आरोग्य, समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक

घी का दीपक सबसे पवित्र और सात्विक माना जाता है। आचार्य जी के अनुसार यह आरोग्य, समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक है।

कहाँ जलाएं: पूजा घर में लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति के सामने, तुलसी के पास और घर के मंदिर में।
दिशा: दीपक को उत्तर या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है।
बाती: घी के दीपक में रुई की सफेद बाती उपयुक्त मानी जाती है।
विशेष बात: शुद्ध देसी घी का प्रयोग करें, क्योंकि पूजा के दीप में शुद्धता का विशेष महत्व है।

2. सरसों के तेल का दीपक: बुरी नज़र और नकारात्मकता से रक्षा

आचार्य जी के अनुसार सरसों के तेल का दीपक बुरी नज़र, तंत्र-मंत्र और नकारात्मक ऊर्जा से आपकी और आपके घर की रक्षा करता है। इसीलिए इसे सुरक्षा का दीपक कहा जा सकता है।

कहाँ जलाएं: मुख्य द्वार, दहलीज़, आँगन, छत, बालकनी और घर के बाहरी हिस्सों में।
लाभ: यह दीपक घर के प्रवेश द्वार पर रखने से बाहर की नकारात्मकता को भीतर आने से रोकने वाला माना जाता है।
विशेष बात: सरसों का तेल ज्यादा देर तक जलता है और हवा में भी दीपक आसानी से नहीं बुझता, इसलिए खुले स्थानों के लिए यह व्यावहारिक भी है।

3. तिल के तेल का दीपक: शत्रु से बचाव और संकटों का निवारण

तिल के तेल का दीपक शत्रु बाधा और संकटों को परास्त करने वाला बताया गया है। कई परिवार इसे विशेष मनोकामना और कठिन समय से राहत के लिए जलाते हैं।

कहाँ जलाएं: घर के पूजा स्थल, पीपल या तुलसी के पास, और संध्या के समय आँगन में।
लाभ: मान्यता है कि यह दीपक मन की चिंताओं को कम करता है और जीवन की रुकावटें दूर करने में सहायक होता है।
विशेष बात: शनिवार को और दिवाली की रात तिल के तेल का दीपक जलाना कई परंपराओं में शुभ माना जाता है।
दिवाली पर कितने दीपक जलाएं?

इसकी कोई एक निश्चित संख्या सभी के लिए अनिवार्य नहीं है। परंपरा के अनुसार कुछ बातें प्रचलित हैं:

  • सामान्य मान्यता: कम से कम 5, 7, 11 या 21 दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
  • यम दीपक: धनतेरस पर 13 दीपक और एक यमदीपम की परंपरा है।
  • दिवाली की रात: कई परिवार 21, 51 या 101 दीपक जलाते हैं।
  • सबसे ज़रूरी बात: संख्या से ज्यादा महत्व श्रद्धा और स्वच्छता का है। यदि सामर्थ्य सीमित है, तो भी एक सच्चे मन से जलाया गया दीपक पर्याप्त माना जाता है।

दीपक जलाते समय ध्यान रखें

  1. नए मिट्टी के दीपक लें। पहले इन्हें पानी में भिगोकर सुखा लें, इससे वे तेल कम सोखते हैं।
  2. साफ-सफाई करें। घर स्वच्छ हो, तभी माँ लक्ष्मी का आगमन शुभ माना जाता है।
  3. दीपक को सही जगह रखें। पूजा के दीप को सीधे ज़मीन पर रखने के बजाय थाली या चावल/अक्षत पर रखें।
  4. सुरक्षा का ध्यान रखें। दीपक पर्दों, कपड़ों और बच्चों की पहुँच से दूर रखें, और रात को सोने से पहले जलते दीप की निगरानी कर लें।
  5. मिलाकर भी जला सकते हैं। कई घरों में पूजा स्थल पर घी, और द्वार-आँगन पर सरसों या तिल के तेल के दीप सजाए जाते हैं।

आचार्य वसंत विजय महाराज के सुझावों के अनुसार घी का दीपक आरोग्य और समृद्धि के लिए, सरसों का दीपक सुरक्षा के लिए और तिल का दीपक संकट निवारण के लिए जलाया जाता है। पूजा स्थल पर घी, द्वार पर सरसों और विशेष मनोकामना के लिए तिल का दीप जलाकर आप तीनों का लाभ ले सकते हैं। अंत में, दीपक की संख्या और तेल से अधिक महत्व आपकी श्रद्धा और शुद्ध भावना का है।

Story first published: Saturday, November 7, 2026, 21:16 [IST]
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