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Pitru Paksha 2026: बेटा न हो तो क्या बेटी कर सकती है श्राद्ध और पिंडदान? अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने दिया जवाब
Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पितरों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का विशेष समय माना जाता है। इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर को समाप्त होंगे। पितृपक्ष के दिनों परिवार के लोग अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और दान-पुण्य करते हैं। लेकिन अगर किसी परिवार में पुत्र न हो, तो अक्सर यह सवाल उठता है कि पितरों का श्राद्ध और पिंडदान कौन करेगा? क्या बेटी अपने पिता या परिवार के किसी अन्य सदस्य का श्राद्ध कर सकती है? आइए, जानते हैं इस बारे में शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं में क्या कहा गया है -

माता सीता ने किया था राजा दशरथ का पिंडदान
महिला या बेटी के पिंडदान करने की बात होती है तो गया में माता सीता से जुड़ी कथा का जिक्र जरूर आता है। प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने भी अपनी एक कथा में इसका जिक्र किया। उन्होंने बताया कि माता सीता ने फल्गु नदी के किनारे अपने ससुर राजा दशरथ का पिंडदान किया था। गया स्थित सीता कुंड को भी इसी घटना से जोड़कर देखा जाता है। प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण गया पहुंचे थे। वहां राजा दशरथ के लिए श्राद्ध कर्म किया जाना था। इसी बीच श्रीराम और लक्ष्मण जरूरी सामग्री लेने के लिए वहां से चले गए। मान्यता है कि उस समय राजा दशरथ ने माता सीता से पिंड की इच्छा जताई। पूजा की सामग्री मौजूद न होने पर माता सीता ने फल्गु नदी की रेत से पिंड तैयार किया और उसे राजा दशरथ को अर्पित किया। इसी वजह से गया का सीता कुंड और माता सीता के पिंडदान से जुड़ी यह कथा धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बेटी भी श्राद्ध और पिंडदान कर सकती है?
श्राद्ध से जुड़े नियम हर जगह एक जैसे नहीं होते। अलग-अलग क्षेत्रों, परिवारों और संप्रदायों में इसके तरीके और मान्यताएं अलग हो सकती हैं। सामान्य तौर पर पुत्र को श्राद्ध का मुख्य कर्ता माना जाता है। हालांकि, जिन परिवारों में पुत्र नहीं होता या कोई पुरुष उत्तराधिकारी उपलब्ध नहीं होता, वहां महिलाओं के श्राद्ध कर्म करने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है। कुछ परिवारों में विवाहित बेटी अपने माता-पिता के लिए श्राद्ध और पिंडदान करती है। वहीं, कुछ परंपराओं में पत्नी, बहू या परिवार के किसी दूसरे सदस्य द्वारा भी यह कर्म किए जाने की बात कही गई है। इसलिए इस मामले में परिवार में चली आ रही परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं को भी ध्यान में रखा जाता है।
श्राद्ध और पिंडदान में क्या अंतर है?
श्राद्ध एक व्यापक धार्मिक कर्म है। इसका उद्देश्य पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करना होता है। इसमें तर्पण करने, पिंड अर्पित करने, भोजन कराने और दान देने जैसी परंपराएं शामिल हो सकती हैं। वहीं, पिंडदान में पितरों के नाम से पिंड अर्पित किए जाते हैं। पितृ पक्ष में अलग-अलग तिथियों पर परिवार के दिवंगत सदस्यों के लिए उनकी मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है।
पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू होगा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पितृ पक्ष का प्रारंभ 26 सितंबर, शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ होगा। जबकि प्रतिपदा तिथि का पहला श्राद्ध 27 सितंबर, रविवार को किया जाएगा। इसके बाद पितृ पक्ष की अलग-अलग तिथियों पर संबंधित पितरों के लिए श्राद्ध कर्म किए जाएंगे। 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा।



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