Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ क्यों किया जाता है? जानें इसका महत्व

Durga Saptashati Path: शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की भक्ति और आराधना को समर्पित है। इस बार शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक चलेंगे। इन नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान घरों और मंदिरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ भी होता है। धार्मिक मान्यताओं, नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ देवी भगवती की उपासना का खास माध्यम माना जाता है। समस्त स्त्रोतों में दुर्गा सप्तशती को श्रेठ माना गया है। इसमें देवी भगवती के इतिहास का वर्णन है। इसलिए नवरात्रि के दौरान भक्त श्रद्धा के साथ इसका पाठ कर सुख-शांति और मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने की प्रार्थना करते हैं। आइए, जानते हैं दुर्गा सप्तशती का धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में -

Durga Saptashati Significance In Navratri

क्या है दुर्गा सप्तशती?

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा के साथ दुर्गा सप्तशती पढ़ने की भी परंपरा है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और देवी की आराधना करते हैं। दुर्गा सप्तशती देवी की शक्ति और असुरों पर उनकी विजय की कथाओं के लिए जाना जाता है। इसे देवी महात्म्य और चंडी पाठ भी कहा जाता है। दुर्गा सप्तशती में 13 अध्याय और करीब 700 श्लोक हैं, इसलिए इसका नाम सप्तशती पड़ा। यह मार्कंडेय पुराण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें मां भगवती के अलग-अलग रूपों, उनकी महिमा और असुर शक्तियों के साथ हुए युद्धों का वर्णन मिलता है। नवरात्रि में भक्त इन कथाओं और मंत्रों का पाठ कर देवी की उपासना करते हैं।

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ क्यों किया जाता है?

नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा के लिए समर्पित होते हैं। इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करने की भी परंपरा है, क्योंकि इसमें देवी की शक्ति और उनके पराक्रम से जुड़ी कथाएं विस्तार से बताई गई हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा के साथ इसका पाठ करने से मां भगवती का आशीर्वाद मिलता है। कई भक्त घर में सुख-शांति बनाए रखने, मन को शांत रखने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की कामना से इसका पाठ करते हैं। माना जाता है कि नियमित रूप से इसका पाठ करने से मन को शांति मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। कुछ लोग अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना के साथ नवरात्रि के दौरान नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती पढ़ते हैं।

दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों में क्या बताया गया है?

दुर्गा सप्तशती में कुल 13 अध्याय हैं। हर अध्याय में देवी से जुड़ी अलग-अलग कथाओं और प्रसंगों का वर्णन मिलता है। पहले अध्याय में मधु-कैटभ के वध की कथा है, जबकि दूसरे और तीसरे अध्याय में मां दुर्गा के प्राकट्य और महिषासुर के अंत का वर्णन किया गया है। चौथे अध्याय में देवताओं की ओर से देवी की स्तुति की गई है। पांचवें अध्याय में देवी की स्तुति के साथ शुंभ द्वारा दूत भेजने का प्रसंग आता है। छठे अध्याय में धूम्रलोचन, सातवें में चंड-मुंड और आठवें अध्याय में रक्तबीज के वध की कथा बताई गई है। नौवें अध्याय में निशुंभ और दसवें अध्याय में शुंभ के वध का वर्णन मिलता है। ग्यारहवें अध्याय में देवताओं द्वारा देवी की स्तुति और उनके वरदान देने का प्रसंग है। बारहवें अध्याय में दुर्गा सप्तशती के पाठ का माहात्म्य बताया गया है। वहीं, तेरहवें और अंतिम अध्याय में राजा सुरथ और समाधि वैश्य की कथा आती है, जिन्हें देवी से वरदान प्राप्त होते हैं। इस तरह दुर्गा सप्तशती के सभी 13 अध्यायों में देवी की महिमा, उनके पराक्रम और भक्तों से जुड़ी कथाओं का वर्णन मिलता है।

Story first published: Monday, October 12, 2026, 16:08 [IST]
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