Latest Updates
-
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें जरूरी नियम और पारण का समय -
Jitiya Vrat Katha: जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत में जरूर करें इस कथा का पाठ, पूरे साल सुरक्षित रहेगी संतान -
Jitiya Vrat 2025 Wishes: संतान की लंबी उम्र...जितिया व्रत के अवसर पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: क्या आप जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री का असली नाम? जानें 10 रोचक तथ्य -
Gandhi Jayanti 2026: गांधी जी को 'बापू' क्यों कहा जाता है? जानें किसने दी थी 'महात्मा' की उपाधि -
Gandhi Jayanti Wishes 2026: हाथ में लाठी थी...गांधी जयंती पर अपनों को ये खास मैसेज भेजकर दें शुभकामनाएं -
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम -
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि -
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय
International Yoga Day 2023: सेहत और भाग्य दोनों की बेहतरी के लिए करें राशिनुसार योग
योग हमारी संस्कृति का अहम् हिस्सा रहा है, जिससे ना केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मन-मस्तिष्क को भी शांत और स्वस्थ रखने में मदद करता है। पूरी दुनिया में योग के महत्व का प्रचार प्रसार करने में भारत ने बहुत अहम भूमिका निभाई है।
भारत के ही अथक प्रयासों का नतीजा है कि हर साल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष बुधवार को 8वां योग दिवस मनाया जाएगा। इस दिन दुनिया भर में योग शिविरों और सामूहिक योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
आप भी इस वर्ष से अपनी दिनचर्या में थोड़ा बदलाव कर योग को अपने जीवन में शामिल कर सकते हैं। हर राशि के अनुसार ही व्यक्ति का अचार व्यवहार निर्धारित होता है। अतः अपने व्यवहार की प्रवृति और राशि के अनुसार किसी व्यक्ति को कुछ ख़ास योग करने चाहिए। जानते हैं राशि के अनुसार कौन से योग आपके लिए रहेंगे सबसे लाभदायक -

मेष राशि
मेष राशि के स्वामी मंगल ग्रह होते हैं। इस राशि के जातक उत्साह व ऊर्जा के साथ साथ गुस्से से भी भरे होते हैं। इस वजह से उन्हें अक्सर सिरदर्द, तनाव जैसी परेशानियां होती हैं। इसलिए इस राशि के जातकों के लिए वीरभद्रासन और अधोमुख श्वानासन करने की सलाह दी जाती है।

वृषभ राशि
इस राशि के स्वामी बुध ग्रह होते हैं। इस राशि के जातक स्वभाव में जिद्दी और हठी स्वभाव के होते हैं और जीवन में शान्ति व सुख-सुविधाओं की तलाश में रहते हैं। जातकों को वृक्षासन करने की सलाह दी जाती है, जिससे ना केवल मांसपेशियों की मज़बूती बढ़ती है जिससे अपने लक्ष्यों की तरफ काम करने में सहायता मिलती है। वहीं साथ ही चेतना भी स्थिर होती है।

मिथुन राशि
बुध ग्रह इस राशि के स्वामी होते हैं। जातक मेधावी, तेज़ दिमाग के, आविष्कारक प्रवृति के और साफ़ दिल के होते हैं। इस राशि के जातकों को विशेष सलाह दी जाती है कि वे अपने श्वसन तंत्र पर ध्यान दें। हलासन इस राशि के जातकों के लिए महत्वपूर्ण आसन है जिसके द्वारा रीढ़ की हड्डी, पाचन तंत्र और श्वसन तंत्र का स्वास्थय बेहतर होता है।

कर्क राशि
चन्द्रमा स्वामी वाली इस राशि के जातकों जल तत्व महत्वपूर्ण होता है। जातकों को अकसर पेट या जल संबंधित बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस राशि के अर्धचंद्रासन महत्वपूर्ण है। यह ना केवल शरीर और उसके भीतर के तत्वों का संतुलन ठीक करता है, बल्कि पेट व पैरों के दर्द जैसी समस्याओं का भी निवारण करता है।

सिंह राशि
इस राशि के स्वामी स्वयं सूर्य हैं। इस राशि के जातक महत्वाकांक्षी, निडर और सूर्य के सामान तेज व उर्जा से भरपूर होते हैं। अत्याधिक सोचने विचारने से संबंधित कार्यों को करने के कारण उन्हें सिरदर्द तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता रहता है। इस राशि के जातकों के लिए सबसे उत्तम योग सूर्य नमस्कार होता है। इससे सम्पूर्ण विकास होता है और हर अंग तक रक्त संचार बढ़ता है।

कन्या राशि
बुध ग्रह स्वामी वाली इस राशि में पैदा होने वाले जातकों को पाचन सम्बन्धी समस्याएं रहती हैं। इस राशि के जातकों को करणी और शीर्षासन करने की सलाह दी जाती है। करनी आसन जहां तनाव से राहत दिलाता है तो वहीं शीर्षासन पाचन क्रिया और रक्त संचार सुधारने में मदद करता है।

तुला राशि
शुक्र ग्रह इस राशि के स्वामी होते हैं। जातकों को श्वसन, कमर और सिरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साँसों के संतुलन और कमर की सही मुद्रा बनाए रखने के लिए नाड़ी शोधन प्राणायाम करना चाहिए।

वृश्चिक राशि
इस राशि के स्वामी मंगल ग्रह और केतु होते हैं। जातकों में रोगों से लड़ने की क्षमता अच्छी होती है, परन्तु फिर भी गुर्दे/किडनी संबंधित समस्याएं सामने आती रहती है। वृश्चिक राशि के जातकों को उष्ट्रासन करने की सलाह दी जाती है। इससे मांसपेशियां मज़बूत व लचीले होते हैं और आँतों, गुर्दे और किडनी की सेहत अच्छी रहती है।

धनु राशि
गुरु यानी बृहस्पति ग्रह इस राशि के स्वामी माने जाते हैं। इस राशि के जातकों को मत्स्येन्द्रासन करने की सलाह दी जाती है। इससे पीठ के दर्द और तनाव से राहत मिलती है।

मकर राशि
शनि देव स्वामी होने के कारण जातक शनि प्रकोप व कई बीमारियों से ग्रसित रहते हैं। उत्कटासन से मकर राशि के जातकों को फायदा मिलता है। इस आसन में शरीर कुर्सी की मुद्रा में होता है और शरीर को ताकत व आरोग्यता में सहायता करता है।

कुम्भ राशि
इस राशि के स्वामी शनि देव और राहु होते हैं। जातकों को ब्लड प्रेशर एवं पाचन तंत्र सम्बन्धी समस्याएं होती रहती हैं। कुम्भ राशि के जातकों को अर्धमत्स्येन्द्रासन और भुजंगासन करने की सलाह दी जाती है। इन आसनों से रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ, रक्तसंचार, पाचन तंत्र में सुधार होता है।

मीन राशि
बृहस्पति ग्रह स्वामी वाली इस राशि के नर्वस तंत्रिका, अनिद्रा और तनाव सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हलासन और प्राणायाम करने से तंत्रिका तंत्र और अनिद्रा व तनाव से निपटने में सहायता मिलती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



Click it and Unblock the Notifications
