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28 दिन बाद लगेगा सूर्य ग्रहण, 2 मिनट 18 सेंकड के लिए छा जाएगा अंधेरा, क्या भारत में दिखेगा ये नजारा
Surya Grahan 2026: आज से ठीक 28 दिन बाद आसमान में एक दुर्लभ नजारा देखने को मिलेगा। जी हां, साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने जा रहा है जो एक खगोलीय घटना है। ये पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा जो करीब 2 साल बाद लगने जा रहा है। इस दौरान कुछ समय के लिए धरती पर दिन में ही अंधेरा छा जाएगा। जो लोग अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखते हैं उनके लिए ये दिन बहुत ही खास होने वाला है। सूर्य ग्रहण के बाद रात में उल्काओं यानी टूटते तारों की बारिश होगी जो इस दिन को और भी खास बनाता है। आइए जान लेते हैं कि सूर्य ग्रहण क्या है और उल्काओं की बारिश से क्या मतलब है साथ ही ये दुर्लभ नजारा भारत में दिखाई देगा या नहीं?

क्या होता है सूर्य ग्रहण ?
सबसे पहले जान लेते हैं कि सूर्य ग्रहण क्या होता है? दरअसल, ये एक खगोलीय घटना है जिसमें सूर्य औरर चंद्रमा धरती की सीध में आ जाते हैं। ऐसे में चंद्रमा के सीध में होने के कारण वो सूर्य की डिस्क को ढक लेताहै और इस वजह से सूर्य दिखाई नहीं देता और धरती पर अंधेरा छा जाता है। सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण दोनों ही दो प्रकार के यानी पूर्ण या आंशिक होते हैं। लेकिन 12 अगस्त को लगने वाला ग्रहण पूर्ण है।
सूर्य ग्रहण के दौरान 2 मिनट 18 सेंकड के लिए छा जाएगा अंधेरा
12 अगस्त को लगने वाला सूर्य ग्रहण पूर्ण ग्रहण होगा। ये पूर्ण ग्रहण 2 साल बाद लग रहा है और इस दौरान धरती पर 2 मिनट 18 सेंकड के लिए छा जाएगा अंधेरा। 29 दिन बाद लगने वाले इस सूर्य ग्रहण को देखने के लिए अंतरिक्ष प्रेमी बहुत उत्सुक हैं।

इस देश में 72 साल बाद लगेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण
ये सूर्य ग्रहण बहुत ही खास होने वाला है। NASA के बताए अनुसार,यह सूर्य ग्रहण यूरोप में दिखने वाली खगोलीय घटनाओं में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि स्पेन में ये सदी का पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और आइसलैंड में 1954 के बाद यानी पूरे 72 सालों के बाद पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है।
क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
बता दें कि 12 अगस्त को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ये यूरोप में दिखेगा तो ऐसे में इस ग्रहण के न तो भारत में दीदार होंगे और न ही सूतक काल मान्य होगा।
रात में होगी टूटते तारों की बारिश
दिन में सूर्य ग्रहण लगेगा तो उसी दिन रात को उल्काओं की बौछार होगी यानी आसमान से टूटते तारों की बारिश होगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि एक ही दिन में सूर्य ग्रहण और रात में उल्काओं की बौछार होना एक ऐसा संयोग है जो सैंकड़ों सालों बाद होने जा रहा है।
क्या होती है उल्काओं की बारिश?
जिन लोगों को नहीं पता वो ये जान लें कि उल्काओं की बारिश (Meteor Shower) एक ऐसी खगोलीय घटना होती है जिसमें रात के समय आसमान से तारे टूटते नजर आते हैं और आकाश में एक रौशनी वाली लाइन बनाते हैं। वास्तव में तारे नहीं होते, बल्कि अंतरिक्ष में मौजूद छोटे-छोटे पत्थर और धूल के कण (Meteoroids) होते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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