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Myths vs Facts: 'कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स' लेने से बढ़ जाताहै वजन, गर्भनिरोधक गोलियों से जुड़े 6 झूठ और सच
Contraceptive Myth Facts : दुनियाभर की लाखों महिलाएं अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कॉन्ट्रासेप्शन पिल्स का इस्तेमाल करती हैं। जिनमें से ज्यादातर महिलाएं कई तरह के मिथकों के संपर्क में कभी न कभी आती ही हैं। क्या यह पिल्स वजन बढ़ने का कारण बनती हैं?
क्या इन्हें रोजाना एक ही समय पर लेना जरूरी है? क्या इनको एंटीबायोटिक्स के साथ खाया जा सकता है? गर्भनिरोधक दवाइयों का इस्तेमाल काफी आम है, और इसलिए इनसे कई तरह के मिथक भी जुड़े हैं। अगर आप भी अक्सर इसी तरह के मिथकों का सामना करती हैं, तो आपको यह आर्टिकल जरूर पढ़ना चाहिए।
क्या है ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स?
ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स (गोली) हार्मोनल गोलियां हैं, जिसका आमतौर पर महिलाएं गर्भ को रोकने के लिए इस्तेमाल करती हैं। इनमें या तो डबल हार्मोन प्रोजेस्टोजन और एस्ट्रोजन एक साथ होते हैं या एक हार्मोन प्रोजेस्टोजन मौजूद होता है। ओव्यूलेशन को दबाने के साथ-साथ, डबल हार्मोन कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स शुक्राणु प्रवेश को रोकने और उसे विफल करने के लिए गर्भाशय ग्रीवा बलगम को गाढ़ा करने का काम करती है।
आइए जानते हैं पिल्स से जुड़े कुछ मिथक और उनका सच-

Myth: कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन को रोक सकती हैं?
Fact: हर्पीस जैसे यौन संचारित संक्रमण जननांगों या किसी अन्य शारीरिक संपर्क में आने से फैलते हैं। कोई भी गर्भनिरोधक, जो लोगों के बीच स्पर्श संपर्क को प्रतिबंधित नहीं करता है, यह STI (Sexually transmitted infections) को नहीं रोक सकता है। हालांकि, कंडोम को एसटीआई के जोखिम को कम करने के लिए एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है, जो कि पूरी तरह प्रभावी नहीं है।
Myth: कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स खाने से फर्टिलिटी पर असर पड़ता है?
Fact: कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स, आपके मासिक धर्म चक्र को प्रभावित जरूर करती हैं, लेकिन ऐसा कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है, जिससे यह साबित होता हो कि कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के इस्तेमाल से प्रजनन क्षमता प्रभावित होता है। इसके डोज़ को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जब आप गोलियों के सेवन को बंद करते है, तो साइकिल 2-3 माह में अपनी जगह पर आ जाता है। इसलिए इस बात पर विश्वास न करें कि ये आपकी फर्टिलिटी को प्रभावित करता है।
Myth: गर्भनिरोधक गोलियां से वजन बढ़ता है या घटता है?
Fact: ज्यादातर गर्भनिरोध गोलियां एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का मिश्रण होता है। एस्ट्रोजन के ज्यादा सेवन से पानी इकट्ठा होता है और शरीर में फुलावट आती है, जिससे वजन बढ़ जाता है। वैसे आजकल गोलियों में इन हार्मोन्स की मात्रा कम ही आती है ताकि महिलाओं का वजन न बढ़े, लेकिन जिन महिलाओं को पाचन या मोटापे से संबन्धित समस्या है, उन्हें इन गोलियों का साइड-इफेक्ट हो सकता है।
Myth: गर्भनिरोधक गोलियों से पीरियड्स देर से आते हैं?
Fact: कुछ हद तक आपके मासिक धर्म के क्रम को ये गोलिय़ां प्रभावित कर सकती हैं लेकिन दूसरी तरफ यह हार्मोन्स असंतुलन को ठीक भी करती हैं, इसलिए जो लोग पहले से अनियमित पीरियड की समस्या से गुजर रहे हैं, वह ठीक हो जाती है।
Myth: गर्भनिरोधक गोलिया अनचाहे गर्भ को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय हैं?
Fact: गर्भनिरोधक गोलिया अनचाहे गर्भ को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय होता है। अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो सभी तरह के बर्थ कंट्रोल प्रभावी परिणाम देते हैं। लेकिन सही ढंग से इस्तेमाल न किये जाने पर गर्भनिरोधक गोलियां, हार्मोनल पैच, कॉपर टी, अंतर्गर्भाशयी डिवाइस (आईयूडी) सभी के इस्तेमाल के बाद भी प्रेग्नेंट हो सकती हैं। गर्भनिरोधक गोलियां, हार्मोनल पैच, कॉपर टी, अंतर्गर्भाशयी डिवाइस (आईयूडी) आदि का फेलियर रेट 1 प्रतिशत से कम होता है। अगर कंडोम का सही ढंग से बिना फटे इस्तेमाल होता है तो यह 98 प्रतिशत तक प्रभावी माने जाते हैं। बर्थ कंट्रोल पिल्स यानी गर्भनिरोधक गोलियां, पैच आदि भी 91 प्रतिशत प्रभावी माने जाते हैं।
Myth: बिना डॉक्टर की सलाह के कर सकती हैं इनका इस्तेमाल
Fact: यह बात कुछ हद तक सही है। आप कंडोम या गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल खुद से कर सकती हैं लेकिन इसके अलावा जिन महिलाओं को स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतें होती हैं उन्हें इनके इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। साथ ही अन्य कई तरह के गर्भनिरोधक उपाय हैं जिन्हें आप बिना चिकित्सक की सलाह नहीं ले सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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