रात में लाइट जलाकर सोते हैं? आपकी ये आदत दिल पर पड़ सकती है भारी, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

Sleeping In Increase Heart Disease Risk: कई लोगों को रात में टीवी, नाइट लैंप या कमरे की हल्की रोशनी में सोने की आदत होती है। कुछ लोगों को टीवी की आवाज सुनते हुए नींद जल्दी आ जाती है। लेकिन रात के समय कमरे में मौजूद रोशनी आपकी नींद के साथ-साथ दिल की सेहत को भी प्रभावित कर सकती है। एक नई स्टडी में रात के समय रोशनी और दिल की संरचना में बदलाव के बीच संबंध पाया गया है। रिसर्च के अनुसार, जो लोग पूरी तरह अंधेरे की बजाय हल्की रोशनी में सोते थे, उनमें दिल के चैंबर बड़े होने और दिल की दीवारें मोटी होने की संभावना अधिक देखी गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, समय के साथ यह बदलाव हार्ट फेलियर का खतरा भी बढ़ा सकता है।

Sleeping With Lights On At Night

रात की रोशनी से क्यों हो सकती है परेशानी?

हमारे शरीर में एक प्राकृतिक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है। यह शरीर को दिन और रात के हिसाब से काम करने में मदद करती है। जब रात में अंधेरा होता है, तो दिमाग मेलाटोनिन नामक हार्मोन बनाता है। यह हार्मोन शरीर को सोने के लिए तैयार करता है और अच्छी नींद लेने में मदद करता है।
रात में टीवी, मोबाइल, लैंप या कमरे की दूसरी कृत्रिम रोशनी इस प्राकृतिक प्रक्रिया में बाधा डाल सकती है। इससे नींद प्रभावित हो सकती है और लंबे समय में इसका असर सेहत पर भी पड़ सकता है।

क्या कहती है नई स्टडी?

European Heart Journal में प्रकाशित एक स्टडी में ब्रिटेन के 11,071 लोगों को शामिल किया गया। इन लोगों को कलाई पर एक ऐसी घड़ी पहनाई गई, जिसमें रोशनी को मापने वाला सेंसर लगा था। करीब तीन साल बाद इन लोगों का कार्डियक MRI किया गया। रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों के आसपास रात में 3 लक्स से ज्यादा रोशनी थी, उनके दिल की संरचना में कुछ बदलाव देखे गए।

शोध में पाया गया कि जिन लोगों के कमरे में रात के समय 3 लक्स से अधिक रोशनी थी - यानी एक अंधेरे कमरे में छोटे टीवी की हल्की रोशनी के बराबर भी - उनके दिल की संरचना में अंतर था।

दिल के बाएं हिस्से का वजन (Left Ventricular Mass) 2।4% अधिक
दिल की दीवारों की मोटाई 1।5% अधिक
दिल की पंप करने की क्षमता (Myocardial Contraction Fraction) 1।9% कम

चिकित्सकों ने इस स्थिति को 'कॉन्सेंट्रिक कार्डियक रीमॉडलिंग' बताया है, यानी दिल को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ रही है।

सिर्फ टीवी ही नहीं, इन चीजों से भी हो सकती है रोशनी

इस विषय पर शेल्बी इंटरनेशनल हॉस्पिटल, गुरुग्राम के कार्डियोलॉजी विभाग के हेड डॉ। (कर्नल) अनिल ढल बताते हैं, "यह स्टडी दिखाती है कि रात में अधिक रोशनी का संबंध दिल की संरचना में बदलाव से है। इसे गंभीरता से लेना चाहिए। यह समस्या सिर्फ टीवी तक सीमित नहीं है, बल्कि लैंप, स्ट्रीट लाइट या किसी भी प्रकार की तेज रोशनी इसका कारण बन सकती है।"

स्टडी में यह भी पाया गया कि रात की रोशनी और दिल की संरचना के बीच संबंध का करीब 24 से 49 प्रतिशत हिस्सा कम नींद से जुड़ा था। यानी रात में रोशनी के कारण नींद की अवधि या गुणवत्ता प्रभावित होना भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। डॉ। ढल आगे बताते हैं, "असली चिंता टेलीविजन नहीं है, बल्कि रात के प्राकृतिक माहौल का बिगड़ना है -रोशनी, टूटी हुई नींद और हमारी बॉडी क्लॉक पर उसका असर।"

बचाव के लिए क्या करें?

अगर आपको टीवी देखते हुए सोने की आदत है, तो इसे धीरे-धीरे बदलने की कोशिश करें। इसके लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं:

टीवी का स्लीप टाइमर लगाएं: टीवी देखते हुए नींद आती है तो स्लीप टाइमर का इस्तेमाल करें, ताकि कुछ देर बाद टीवी अपने आप बंद हो जाए।

कमरे में अंधेरा रखें: सोते समय कमरे में जितना संभव हो उतना अंधेरा रखें। बाहर की रोशनी आती है तो मोटे पर्दे या आई मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें: कोशिश करें कि सोने से कम से कम 30 मिनट पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप का इस्तेमाल कम कर दें।

जरूरत होने पर हल्की रोशनी रखें: अगर रात में रोशनी की जरूरत पड़ती है, तो बहुत तेज बल्ब की जगह कम रोशनी वाली नाइट लाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Monday, September 28, 2026, 18:00 [IST]
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