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चश्मा आपकी पर्सनालिटी में दाग लगा रहा है, तो कॉन्ट्रा विजन सर्जरी अपनाएं
चश्मा स्टाइल स्टेटमेंट जरूर बनता है, लेकिन कभी-कभार शौकिया पहना जाए तभी। यदि दूर या पास का देखने में दिक्कत है, तो डॉक्टर आंखों की जांच करके आपको हर वक्त चश्मा पहनने की सलाह देंगे।
अब बताएं जब रोजाना चश्मा पहनेंगे, तो आपको अपने चश्मे वाले चेहरे से ऊब हो जाएगी। ऐसे में आपके लिए वरदान से कम नहीं है - कॉन्ट्रा विजन सर्जरी।

क्या है कॉन्ट्रा विजन सर्जरी
कॉन्ट्रा विजन सर्जरी लेज़र विजन करेक्शन द्वारा स्पेक्स रिमूवल के लिए एक प्रकार की सर्जरी है। कॉन्ट्रा विजन किसी की स्पेक पावर में सुधार के अलावा कॉर्नियल अनियमितता को भी ठीक करती है।
ब्लॉक एक्सिस पर काम करते हुए यह एक बहुत ही शार्प रिजल्ट देता है, जो लेसिक और मुस्कान से अलग है।
इस सर्जरी की खास बातें
यदि यह सर्जरी लेसिक से हो रही है, तो इस प्रक्रिया में कॉर्निया में माइक्रोकरेटोम (ब्लेड ) या फेम्टोसेकन्ड द्वारा फ्लेप बनाया जाता है। उसके बाद एक्साईमर लेसर द्वारा चश्मे के नंबर को हटाया जाता है और फिर फ्लेप को अपनी जगह पर वापस रख दिया जाता है।
ज्यादातर पेशेंट को अगले दिन से ही साफ दिखाई देने लगता है लेकिन यह सिर्फ नंबर को हटाता है एब्रेजन (छोटी त्रुटि) को नहीं। इस प्रक्रिया से स्फीयर व सिलेंडर दोनों तरह के नंबरों को हटाया जा सकता है।

क्यों खास है कॉन्टूरा
नारंग आई इंस्टीट्यूट के डॉ एस के नारंग ने बताया यदि आप यह सर्जरी लेसिक से करवा रहे हैं, तो इस प्रक्रिया में टोपोलाइज़र द्वारा आंखों का कस्टमाइज्ड मैप बनाया जाता है इस कस्टमाइज मैप में 22,000 पॉइंट्स को कंप्यूटर द्वारा ठीक किया जाता है। यह केवल नंबर को ही नहीं एब्रेजंस को भी हटाने में सहायता देता है जिससे कलर कंट्रास्ट व क्लेरिटी बेहतर होती है।
यदि यह सर्जरी स्माइल के जरिए हो रही है, तो स्माइल में फ्लेप की जरूरत नहीं होती। इसमें एक छोटे से इंसीजन द्वारा लेंटीक्यूल को पुतली से निकाला जाता है एवं इसमें फेम्टोसेकन्ड लेजर का इस्तेमाल होता है। इस प्रक्रिया में स्फीयर को हटाया जा सकता है पर सिलेंडर को बहुत अच्छी तरह से नहीं निकाला जा सकता इस प्रक्रिया में रिफाईनमेंट की और जरूरत है।
डॉक्टर की एडवाइस
इस प्रक्रिया से 10 से 12 स्फेयर व 4 से 5 सिलेंडर तक का नंबर हटाया जा सकता है। जिन पेशेंट्स में लेसिक या स्माइल नहीं हो सकता है उन पेशेंट्स में आईसीएल सर्जरी के लिए एडवाइज किया जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कस्टमाइज़्ड लेंस मरीज के नेचुरल लेंस के ऊपर प्रत्यारोपित किया जाता है। इस प्रक्रिया से हम बड़े से बड़े नंबर को सफलतापूर्वक हटा सकते हैं।

कब हॉस्पिटल से घर जाएं
नारंग आई इंस्टीट्यूट के डॉ एस के नारंग ने बताया इन सभी प्रक्रियाओं के बाद आंखों में एक से डेढ़ महीने तक दवाइयों को डालने की जरूरत होती है। आंखों में पानी 2 हफ्ते तक नहीं लगाना होता है, आंखों को मलना वह मसलना नहीं होता है। आंखों में ड्राइनेस 3 से 6 महीने तक रह सकती है। आंखों के लिए कन्वर्जंस एक्सरसाइज बताया जाता है, पेशेंट अपना काम 3 दिन बाद वापस से शुरू कर सकते हैं। लेजर का रिजल्ट 95 फीसदी तक सटीक होता है। यह प्रक्रिया 18 से 40 वर्ष की आयु के बीच लोगों के लिए चश्मा रहित काम करने व जीवन व्यतीत करने में अति लाभदायक होता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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