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JN.1 Variant: कोरोना के इस सब-वैरिएंट को WHO ने 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' घोषित किया, जानें इसके बारे में सबकुछ
JN.1 Variant: कोरोना का नया वेरिएंट JN.1 मिलने की वजह से हर जगह हड़कंप मचा हुआ है। ये वेरिएंट दुनियाभर में सबसे ज्यादा कोविड संक्रमण मामलों का कारण बन रहा है। केरल सहित देशभर में कोविड-19 के नए वैरिएंट यानी JN.1 का संक्रमण तेजी फैलने के संकेत मिले हैं। देशभर में कोविड-19 के मामलो में तेजी देखने को मिल रहे हैं।
इस वैरिएंट के खतरे को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने बुजुर्गों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। साथ ही खांसी, बलगम और बुखार वाले लोगों को भी यह हिदायत दी है। इसी बीच WHO ने भी JN.1 को "वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट" घोषित कर दिया है।

आइए जानते हैं कि ये वैरिएंट कितना खतरनाक हैं और 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' का मतलब क्या होता है।
JN.1 वैरिएंट खतरनाक है?
अभी तक जो भी रिसर्च है, उसके मुताबिक JN.1 ओमिक्रॉन के बराबर की संक्रामक है। यह उनकी ही तेजी से फैलने वाला है। यही वजह है कि यह चिंता का विषय बना हुआ है और डब्ल्यूएचओ ने भी इसे "वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट" घोषित किया है। हालांकि, यह भी कहा गया कि इससे लोगों को ज्यादा खतरा नहीं है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि अब तक मिले आंकड़ों और हालात को देखते हुए JN.1 के वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम को फिलहाल कम ही माना जा रहा है।
वैरिएंट के हैं तीन कैटेगरी
सेंटर्स ऑफ डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने कोरोना के वैरिएंट्स का वर्गीकरण करने के लिए तीन श्रेणियां बनाई हैं-
- वैरिएंट ऑफ इंट्रस्ट
- वैरिएंट ऑफ कंसर्न
- वैरिएंट ऑफ हाई कॉनजिक्वेंस
वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' का क्या मतलब?
इसका मतलब है कि इसे 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' के रूप में वर्गीकृत करने से पहले स्वास्थ्य संगठन इस वैरिएंट की प्रकृति और संक्रामकता शक्ति की निगरानी करता रहेगा। इससे पहले वैरिएंट्स की प्रकृति के आधार पर डब्ल्यूएचओ अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा को 'वेरिएंट ऑफ कंसर्न' के रूप में वर्गीकृत कर चुका है। लैम्ब्डा वैरिएंट को 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
इसका मतलब है कि वायरस में कुछ जेनेटिक चेंज या म्यूटेशन हुए हैं जिनकी निगरानी स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञों द्वारा की जा रही है। WHO कई मानदंडो को ध्यान में रखने के बाद ही किसी वैरिएंट को 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' कैटेगरी में नामित करता है।
जैसे वैरिएंट की पहचान नई होनी चाहिए और वह उभरता हुआ दिखना चाहिए। जैसे JN.1 स्ट्रेन लगातार बढ़ रहा है जिसके कारण कई लोग अस्पताल में भी भर्ती हो गए हैं। वैरिएंट पर तब ज्यादा गौर किया जाता है जब यह लगता है कि वो वैरिएंट आगे चलकर और खतरनाक साबित हो सकता है और एक बड़े लेवल पर समाज को नुकसान पहुंचा सकता है।
कहां मिले कितने मामले
केरल में 8 दिसंबर को JN.1 वैरिएंट का पहला मामला मिला था। INSACOG के आंकड़ों से पता चलता है कि देशभर में कोविड-19 सब-वेरिएंट JN.1 के 21 मामले पाए गए हैं, जिनमें से 18 गोवा में और बाकी मामले केरल और महाराष्ट्र में पाए गए हैं। केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को देश में कोविड-19 मामलों में वृद्धि और नए सब-वेरिएंट JN.1 का पता चलने के बीच निरंतर निगरानी बनाए रखने के लिए कहा है। हालांकि देशभर में अभी कोविड-19 के 2,311 एक्टिव मामले हैं।
JN.1 के लक्षण
भारत में JN.1 मामले में इंफ्लुएंजा जैसी बीमारी के लक्षण दिखे हैं। ये लक्षण हल्के हैं। इनमें अचानक बुखार आना, बदन दर्द, थकान, खांसी और गले में सूजन जैसे लक्षण शामिल हैं। इस तरह के लक्षण इंफ्लुएंजा वायरस के अलावा राइनोवायरस या एडेनोवायरस के कारण भी हो सकते हैं। ये लक्षण आम सर्दी-जुकाम से थोड़े ज्यादा गंभीर होते हैं।
ये सावधानियां बरतें
- हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं।
- साबुन-पानी ना होने पर कम से कम 60% अल्कोहल वाले हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
भीड़-भाड़ वाली बाहरी और अंदरुनी जगहों पर मास्क पहनें।
- नाक और मुंह को मास्क से अच्छी तरह ढकें।
घर से बाहर के व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
- जब संभव हो तो खिड़कियां और दरवाजे से अच्छा वेंटिलेशन बनाएं।
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिशू या अपनी कोहनी से ढकें।
- जुकाम और बुखार से पीड़ित लोगों से दूरी बनाकर रखे।
- इस्तेमाल किए गए टिश्यू का उचित तरीके से डिस्पॉज करें और हाथों को तुरंत धोएं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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