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जानें, पीरियड के रंग से कैसे पता चलती है बीमारियां
मासिक धर्म या पीरियड्स महिलाओं की जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यह महीने महिलाओं को कम से कम 6-7 दिनों तक परेशान करता है। इस दौरान पेट, कमर और पैरों में दर्द की वजह से कई लड़कियों का मूड खराब रहता है।
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इन दिनों पीरियड्स के दौरान निकलने वाले ब्लड के रंग में भी परिवर्तन देखने को मिलते हैं। क्या आप जानती हैं कि पीरियड के रंग से कई प्रकार की बीमारियों का भी पता लगाया जा सकता है? अगर नहीं तो जरुर पढ़ें ये जानकारी...

जानें, पीरियड के रंग से कैसे पता चलती है बीमारियां
ब्राउन कलर- डार्क ब्राउन रंग पुराने रक्त का प्रतीक है। यह रक्त लंबे समय तक गर्भाशय में संग्रहीत था, जो कि लंबे समय के बाद बहा। इस टाइप का रक्त आम तौर पर सुबह-सुबह देखने को मिलता है।

लाल रंग- यह रक्त नया होता है जा कि शरीर से तुरंत निकलता है। इस तरह का रक्त काफी हल्का होता है जो कि हैवी ब्लीडिंग के साथ बिना गहराए निकलता है।

मध्यम लाल या क्रैनबेरी कलर- पीरियड्स के लिये यह एक स्वस्थ और अच्छा रंग माना जाता है। यह पीरियड के दूसरे दिन दिखाई देता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि जिन्हें लंबी पीरियड साइकिल होती है, उन्हें यह रंग देखने को मिलता है। बाद में यह क्रैनबेरी शेड बदल कर थोड़ा डार्क हो जाता है, जो कि एक नॉमर्ल बात है।

काला या ग्रे रंग- यह रंग एक घातक सूचना देता है, जिसे बिल्कुल भी इगनोर नहीं करना चाहिये। ग्रे या काले रंग का रक्त, यूट्रस में इंफेक्शन या मिसकैरेज का संकेत देता है। हांलाकि अगर काले रंग का पीरियड ब्लड माहवारी के चौथे दिन पर आए और उसमें हल्का सा लाल रंग भी मिक्स हो तो, चिंता की कोई जरुरत नहीं है।

नारंगी रंग- यह रंग तब देखने को मिलता है जब रक्त गर्भाशय ग्रीवा के साथ मिक्स हो जाता है। ब्राइट ऑरेंज कलर का रक्त कभी कभी संक्रमण का भी संकेत होता है।
तो अगर आपने पीरियड्स के दौरान लाल के अलावा किसी और रंग का देखा हो तो, समय आ गया है कि आप अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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