Latest Updates
-
देश में डेंगू का तांडव, टूटा 5 साल का रिकॉर्ड! जानें Dengue के लक्षण और बचाव के उपाय -
Mother's Day 2026: मिलिए उन 7 जांबाज 'सुपर मॉम' से जिन्होंने बच्चों के साथ क्रैक किया UPSC, बनीं IAS -
Mother's Day 2026 Wishes For Mother In Sanskrit: मदर्स डे पर देववाणी संस्कृत में कहें अपनी मां को धन्यवाद -
Happy Mother's Day 2026 Wishes: रब से पहले मां का नाम...मदर्ड डे पर अपनी मां को भेजें ये दिल छूने वाले मैसेज -
Aaj Ka Rashifal 10 May 2026: रविवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी सूर्य देव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेगा भाग्य -
इस Mother's Day मां को दें किचन से 'Off', बिना गैस जलाए 10 मिनट में बनाएं ये 3 लाजवाब डिशेज -
Mother's Day 2026: 50 की उम्र में चाहिए 30 जैसा ग्लो ! महंगे फेशियल नहीं आजमाएं ये 5 घरेलू नुस्खे -
Mother's Day Wishes for Chachi & Tai Ji: मां समान ताई और चाची के लिए मदर्स डे पर दिल छू लेने वाले संदेश -
क्या आपने कभी खाया है 'हरामजादा' और 'गधा' आम? मिलिए Mango की उन 14 किस्मों से जिनके नाम हैं सबसे अतरंगी -
Mother's Day 2026 Wishes for Bua & Mausi: मां जैसा प्यार देने वाली बुआ और मौसी को भेजें मदर्स डे पर ये संदेश
रात को जोर जोर से लेते हैं आप खर्राटे, इन योगासन से करें इनका इलाज
खर्राटे की समस्या को अक्सर लोग बेहद ही हल्के में लेते हैं, जबकि यह एक बेहद ही गंभीर समस्या है जो व्यक्ति को बेहद परेशान करती है। खर्राटों के कारण ना केवल व्यक्ति की नींद खराब होती है, बल्कि अन्य भी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। वास्तव में श्वसल मार्ग में एयर ब्लॉकेज के कारण खर्राटे आते हैं। कभी-कभी टॉन्सिल, सूजन या बढ़ती उम्र भी खर्राटों का कारण बन सकती है।

खर्राटे लेने से स्लीप क्वालिटी, स्लीप एपनिया या सांस लेने में अस्थायी रुकावट आती है। जिससे व्यक्ति को हांफना और दम घुटना आदि का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही साथ, गला ख़राब, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक जैसी क्रानिक डिसीज की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे में योगाभ्यास के जरिए इस समस्या को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही योगासनों के बारे में बता रहे हैं, जो खर्राटों की समस्या को दूर करने में मदद करेंगे-
सिंहासन
यह एक ऐसा योगासन है, जो आपके गले और चेहरे की मसल्स को मजबूत करने में मददगार है। जिसके कारण यह खर्राटों की संभावना को कम करता है। नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने से आपको जल्द ही अपनी स्थिति में बदलाव महसूस होगा।
• इस आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले आप मैट बिछाकर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं।
• अब आप अपनी हथेलियों को घुटनों पर रखें। साथ ही अपनी कमर को सीधा रखें।
• अब गहरी सांस लें और अपना पूरा मुंह खोलें। जहां तक संभव हो, अपनी जीभ भी बाहर निकालें।
• इस दौरान हा की ध्वनि के साथ मुंह से जोर से सांस छोड़ें।
• यथाशक्ति इस आसन का अभ्यास करें।
भुजंगासन
आमतौर पर भुजंगासन को कमर दर्द से राहत दिलाते के लिए जाना जाता है, लेकिन इससे आपको खर्राटों से भी काफी राहत मिलती है। दरअसल, यह आसन आपकी छाती को खोलता है और सांस लेने में सुधार करता है। जिससे एयर ब्लॉकेज को दूर करने में मदद मिलती है।
• भुजंगासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले अपने पेट के बल लेटें।
• साथ ही, अपनी हथेलियों को अपने कंधों के पास फर्श पर रखें।
• अब गहरी सांस लें और अपने ऊपरी शरीर को ऊपर उठाएं और ऊपर की ओर देखें। कुछ देर तक इसी मुद्रा में रहें और फिर वापिस प्रारंभिक अवस्था में लौट आएं।
• आप यथाशक्ति इस आसन का अभ्यास करें।
भ्रामरी प्राणायाम
भ्रामरी प्राणायाम ना केवल आपके मन को शांत करता है, बल्कि इससे आपके गले को खोलने में मदद मिलती है। जिससे खर्राटों की समस्या काफी हद तक दूर होती है।
• भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले सुखासन या पद्मासन की अवस्था में बैठें।
• अब अपनी आंखें बंद करें और धीरे से अपने अंगूठे से अपने कान बंद करें।
• साथ ही, अपनी उंगलियों को अपने माथे व आंखों पर रखें।
• अब गहरी सांस लें और सांस छोड़ते समय मधुमक्खी की तरह गुंजन करें।
• आप चाहें तो ऊँ का उच्चारण भी कर सकते हैं।
• इस तरह आप बार-बार इसका अभ्यास करें।
• इससे आपका मन भी शांत होगा। साथ ही साथ, गले को भी लाभ मिलेगा।
धनुरासन
धनुरासन ना केवल आपके पेट और पीठ की मसल्स को मजबूत करता है, यह ब्रीदिंग को भी रेग्युलेट करता है। यह आपकी चेस्ट मसल्स को ओपन अप करता है, जिससे खर्राटों की समस्या काफी हद तक दूर होगी।
• इस आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं।
• अब अपने घुटनों को मोड़ें और हाथों से टखनों को पकड़ें।
• अब सांस लेते हुए अपने सिर, छाती व जांघ को ऊपर की ओर उठाएं।
• जब आप इस पोजिशन में आते हैं तो इससे शरीर धनुष के समान नजर आएगा।
• अब कुछ देर इसी अवस्था में रुकें और धीरे-धीरे सांस लेते व छोड़ते रहें।
• अब धीरे-धीरे प्रारंभिक अवस्था में वापस लौट आएं।
• आप दो से तीन बार इस आसन को दोहराएं। याद रखें कि आप कभी भी खुद के साथ जबरदस्ती ना करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications