Ahoi Ashtami Vrat Me Pani Kab Piye: अहोई अष्टमी के व्रत में पानी पीना चाहिए या नहीं? जानें व्रत के जरूरी नियम

Ahoi Ashtami Vrat Me Pani Kab Piye: अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए रखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी का त्योहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल 1 नवंबर 2026, रविवार को अहोई अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन माताएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन के लिए दिन उपवास करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला रखा जाता है। इस दिन महिलाएं सुबह से व्रत शुरू करती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा और कथा करती हैं। इसके बाद आसमान में तारे दिखाई देने पर व्रत का पारण किया जाता है। हालांकि, कई महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि क्या अहोई अष्टमी के व्रत में पानी पी सकते हैं? आइए, जानते हैं इस बारे में क्या मान्यता है -

Drinking Water Rules In Ahoi Ashtami

क्या अहोई अष्टमी के व्रत में पानी पी सकते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला रखा जाता है। इसका मतलब यह है कि इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं पूरे दिन न तो भोजन करती हैं और न ही पानी पीती हैं। शाम को अहोई माता की पूजा और कथा करने के बाद आसमान में तारे देखकर व्रत खोला जाता है। इसके बाद महिलाएं पानी पीकर और भोजन करके व्रत का पारण करती हैं। हालांकि, हर घर में व्रत रखने का तरीका अलग हो सकता है। कुछ महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले चाय या अन्य चीजें लेती हैं, जबकि कुछ पूरे दिन कुछ भी नहीं खाती-पीती हैं। वहीं, कुछ परिवारों में अहोई माता की कथा सुनने के बाद पानी, चाय या जूस पीने की परंपरा भी है। इसलिए महिलाएं अपने परिवार की परंपरा और घर में चले आ रहे नियमों के अनुसार व्रत रख सकती हैं।

किन महिलाओं को अहोई अष्टमी व्रत में पानी पीने की छूट है?

अहोई अष्टमी का व्रत कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें पूरे दिन बिना भोजन और पानी के रहना पड़ता है। हालांकि, बुजुर्ग महिलाओं, बीमार महिलाओं और गर्भवती महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए। ऐसी स्थिति में पानी पीने से परहेज करना जरूरी नहीं है। हालांकि, व्रत के दौरान अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही, इस दिन दूध और दूध से बनी चीजों से भी परहेज करने की मान्यता बताई गई है।

अहोई अष्टमी व्रत के जरूरी नियम

अहोई अष्टमी पर निर्जला व्रत रखने की धार्मिक मान्यता है।
व्रत के दौरान पूरे दिन भोजन और पानी का सेवन नहीं किया जाता है।
अगर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण निर्जला व्रत रखना संभव न हो, तो फलाहार किया जा सकता है।
व्रत के दौरान अनाज खाने से बचने की मान्यता है।
इस दिन दूध और दूध से बनी चीजों का सेवन भी नहीं करने की परंपरा बताई गई है।
शाम को अहोई माता की पूजा और कथा करने के बाद तारों के दर्शन करके व्रत खोला जाता है।

Story first published: Saturday, October 31, 2026, 13:27 [IST]
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