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Bhadrapada Amavasya: जानें कुशोत्पाटनी अमावस्या पर कुश तोड़ने का नियम, जरूर पढ़ें ये मंत्र, पितृ भी होंगे खुश
Bhadrapada Amavasya Par Kusha Nikalne Ka Niyam: इस वर्ष कुशोत्पाटनी अमावस्या 14 सितम्बर को मनाई जायेगी। इसे कुश्ग्रहानी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन कुशा को उखाड़कर घर लाकर रखा जाता है और पूजा में शामिल किया जाता है। अमावस्या के दिन पितरों का दान किया जाता है।
वहीं कुशोत्पाटनी अमावस्या के दिन कुश यानी घास को घर में लाकर रखा जाता है जिससे परिवार पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। जानते हैं क्या है कुश के पीछे की कहानी, कैसे इस अमावस्या को कुश तोड़ें और क्या है इसका धार्मिक महत्व -

भगवान विष्णु से अवतरित हुआ था कुश
कुश जिसे दूब या घास के नाम से भी जाना जाता है दरअसल श्री हरी विष्णु से अवतरित हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर समुद्र तल में छिपे हिरण्याक्ष का वध किया और उसे हराकर समुद्र से बाहर निकले तब उन्होंने अपने बालों को फटकारा। उस समय उनके कुछ केश पृथ्वी पर गिरे और वही कुश के रूप में प्रकट हुए और तभी से उन्हें पवित्र माना जाने लगा।
कुशाग्रहणी अमावस्या के दिन कुशा कैसे निकालें?
कुशा को उखाड़ते वक़्त इस बात का ख्याल रखें कि वह स्थान साफ़ सुथरा हो। उखाड़ते समय अपना मुंह उत्तर या पूर्व की दिशा में ही रखें।
गलती से भी कुशा उखाड़ने के लिए लोहे का प्रयोग न करें। जड़ों को किसी लकड़ी से ढीला करें और एक बार में ही उखाड़ लें। बीच से टूटी हुई कुशा घर ना लाएं।
कुशा निकालते वक्त इन मंत्रों का करें जाप -
"विरंचिना सहोत्पन्न परमेष्ठिन्निसर्गज।
नुद सर्वाणि पापानि दर्भ स्वस्तिकरो भव।।"
"हूं फट स्वः।"
कुशग्रहणी अमावस्या के दिन कुशा का महत्व
कुशा का इस्तेमाल पितृपक्ष के दौरान पूजन और पितरों के तर्पण के लिए किया जाता है। स्नान दान के समय में भी कुशा को हाथ में लेकर संकल्प करने की परंपरा है। इस दिन घर लाई गई कुशा का प्रयोग वर्ष भर देवकार्य और पितृ कार्य में किया जा सकता है। इसे घर में रखने से पूरे घर की सुरक्षा बनी रहती है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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