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Bhalchandra Sankashti Chaturthi Katha: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, दूर होगी हर परेशानी
Bhalchandra Sankashti Chaturthi Vrat Katha: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। चैत्र माह में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन गणेश भगवान के अलावा चंद्र देव की भी पूजा की जाती है। वहीं, व्रती रात में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद अपना व्रत खोलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के सभी दुख दूर होते हैं। साथ ही, जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इस बार भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत 6 मार्च 2026, शुक्रवार को रखा जा रहा है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने के साथ-साथ व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। तो आइए, जानते हैं भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा के बारे में -

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
पुराणों के अनुसार, एक समय सभी देवता बड़े संकट में फंस गए और परेशान होकर भगवान शिव के पास सहायता मांगने के लिए पहुंचे। उस समय भगवान शिव, माता पार्वती और उनके दोनों पुत्र भगवान कार्तिकेय और श्री गणेश साथ में विराजमान थे। देवताओं ने शिवजी को सारी परेशानी बताई और उनसे समस्या का हल मांगा।
भगवान शिव ने देवताओं की बात सुनकर अपने दोनों पुत्रों की ओर देखा और उनसे पूछा कि तुम दोनों में से कौन देवताओं की इस परेशानी को दूर कर सकता है। तभी भगवान कार्तिकेय और गणेश जी ने ने एक साथ कहा कि वे इस कार्य को करने में सक्षम हैं। अब भगवान शिवजी और मां पार्वती के सामने यह समस्या आ गई कि इस जिम्मेदारी के लिए दोनों पुत्रों में से किसे चुना जाए। तब उन्होंने कार्तिकेय और गणेश जी से कहा कि तुम दोनों में से जो पहले पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके वापस आएगा, वही देवताओं की सहायता के लिए जाएगा।
भगवान शिव की यह बात सुनते ही भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए चल पड़े। लेकिन गणेश भगवान मन ही मन सोचने लगे कि मैं अपने वाहन मूषक पर पृथ्वी की परिक्रमा कैसे कर सकता हूं। कुछ देर विचार करने के बाद गणेश जी ने एक बुद्धिमानी भरा उपाय निकाला। अपनी जगह से उठकर भगवान गणेश ने माता पार्वती और शिवजी की सात बार परिक्रमा की। परिक्रमा पूरी करने के बाद वे फिर अपने स्थान पर आकर बैठ गए।
जब कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करके लौटे तो उन्होंने देखा कि गणेश जी पहले से ही वहां मौजूद हैं। जब भगवान शिव ने गणेश जी से परिक्रमा न करने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक है। भगवान गणेश का यह जवाब सुनकर शिव जी प्रसन्न हुए और उन्हें देवताओं के संकट दूर करने का कार्य सौंपा। साथ ही, यह वरदान भी दिया कि हर चतुर्थी तिथि के दिन जो व्यक्ति तुम्हारी पूजा और उपासना करेगा, उसके जीवन के सभी संकट दूर हो जाएंगे। कहते हैं कि भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के दिन इस कथा को पढ़ने या सुनने से भक्तों के जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं।



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