Latest Updates
-
Karwa Chauth Kab Hai 2026: करवा चौथ कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और चांद दिखने का सटीक समय -
डायबिटीज में नारियल पानी पिएं या नींबू पानी? जानें शुगर कंट्रोल के लिए क्या है बेहतर -
Papankusha Ekadashi Vrat Katha: पापांकुशा एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति -
Papankusha Ekadashi 2026 Wishes: विष्णु जी की कृपा...पापांकुशा एकादशी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
पार्टी में जल्दी बिगड़ जाता है मेकअप? केकी और पैची लुक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स -
दशहरा के बाद दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 200 के पार पहुंचा AQI, प्रदूषण से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स -
कुल्लू दशहरा में नहीं जलता रावण का पुतला, देवलोक से आते हैं देवी-देवता, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा -
Papankusha Ekadashi 2026: कब है पापांकुशा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Navratri Ke Baad Jau Ka Kya Kare: नवरात्रि समाप्त होने के बाद उगे हुए जौ का क्या करें? जानें सही नियम और उपाय -
दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह ने किया दूसरी बेटी के नाम का खुलासा, दशहरे पर दिखाई पहली झलक
क्या पीरियड्स में मुस्लिम महिलाएं नमाज पढ़ सकती हैं या नहीं? जानें कुरान और हदीस के नियम
Periods Me Namaz Padh Sakte Hain Kya: कोई अल्लाह को मानता है तो कोई भगवान को और कोई जीसस को, बेशक सभी एक ही हैं लेकिन उनकी पूजा का तरीका अलग-अलग होता है। इस्लाम में नमाज पढ़ी जाती है और इसका नियम है कि एक दिन में 5 बार की जाती है। हालांकि कुछ लोग इस नियम का पूरी तरह से पालन नहीं कर पाते। वहीं मुस्लिम महिलाओं के मन में सबसे आम सवालों में से एक है क्या पीरियड्स के दौरान नमाज पढ़ना जायज है या नहीं?
आजकल सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय, गलत जानकारी और बिना प्रमाण की बातें देखकर कई महिलाओं में भ्रम पैदा हो जाता है। लेकिन इस्लाम एक बहुत साफ, आसान और रहमत वाला धर्म है, जो औरत की सेहत और सुविधा का पूरा ध्यान रखता है। आज हम जानते हैं कि क्या मासिक धर्म के दौरान नमाज पढ़ सकते हैं या नहीं?

क्या पीरियड्स में नमाज पढ़ सकते हैं?
कुरान और सहीह हदीस में स्पष्ट तौर पर बताया गया है कि पीरियड्स यानी हैज के दिनों में महिलाओं पर नमाज फर्ज नहीं होती। इन दिनों में महिलाओं को नमाज अदा भी नहीं करनी चाहिए और न ही बाद में कजा करने की जरूरत होती है। यानी यह एक ऐसी छूट है जो सिर्फ आराम के लिए नहीं बल्कि अल्लाह की रहमत और आसानी का हिस्सा है। इस्लाम में इन दिनों को अशुद्धि या गुनाह की वजह नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया और महिला के शरीर की जरूरत माना गया है। इसलिए इस्लाम महिलाओं को मजबूरी में नहीं डालता, बल्कि उनकी सेहत की हिफाजत को प्राथमिकता देता है।
क्यों नहीं पढ़ी जाती नमाज़? इस्लाम क्या कहता है
1. कुरान में हैज को आराम के दिन बताया गया है
कुरान में हैज के दिनों को महिलाओं के लिए तकलीफ का दौर बताया गया है। इन दिनों महिलाओं को आराम और दूरी की सलाह दी गई है, ताकि वे पूरी तरह स्वस्थ रह सकें।
2. हदीस में साफ हुक्म - नमाज न पढ़ें और न कजा करें
हजरत आयशा (रजि.) बताती हैं कि पीरियड्स के दिनों में महिलाएं नमाज नहीं पढ़ती थीं और बाद में उसकी कजा भी नहीं करती थीं। यही हुक्म आज भी मौजूद है।
3. यह पाबंदी नहीं, बल्कि सुविधा है
कुछ लोगों को लगता है कि यह पाबंदी है, लेकिन असल में यह राहत है। इस्लाम महिलाओं को मजबूरी में इबादत नहीं करता, बल्कि आसान रास्ता देता है। अब सवाल ये उठता है कि क्या महिलाएं इन दिनों कुछ और इबादत कर सकती हैं? हां, पीरियड्स के दौरान महिलाएं कई नेकी के काम कर सकती हैं, जैसे दुआ करना, जिक्र करना, तस्बीह पढ़ना, इस्लामिक जानकारी पढ़ना, सदका देना, अच्छे काम करना, केवल नमाज और रोजे से छूट मिलती है।



Click it and Unblock the Notifications
