Ekadashi Udyapan Rules: क्या एकादशी व्रत का उद्यापन करना चाहिए या नहीं? जानें क्या कहता है शास्त्र?

Ekadashi Vrat Udyapan Niyam 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वोच्च स्थान दिया गया है। 27 मई 2026 को कमला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। कमला एकादशी के व्रत को बहुत ही खास माना जाता है जिसे पद्मिनी एकादशी भी कहा जाता है। ये एकादशी 3 साल में एक बार यानी अधिकमास की शुक्ल पक्ष में आती है। जो लोग एकादशी का व्रत रखते हैं उनमें से बहुत से लोगों का सवाल होता है कि एकादशी व्रत का उद्यापन कैसे किया जा सकता है? क्या एकादशी व्रत का उद्यापन करना चाहिए या नहीं? अगर एकादशी व्रत का उद्यापन करें तो कैसे करें? यदि आप भी एकादशी का व्रत रखते हैं तो जान लें कि एकादशी व्रत के उद्यापन से संबंधी नियम।

एकादशी का उद्यापन करना चाहिए या नहीं? क्या कहता है शास्त्र?

पौराणिक ग्रंथों और हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, किसी भी व्रत की पूर्णता तभी मानी जाती है जब उसका विधि-विधान से उद्यापन किया जाए। लेकिन एकादशी व्रत के संदर्भ में नियम अलग है। शास्त्रों का मत है कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से एकादशी का व्रत कर रहे हैं तो जरूरी नहीं कि आप उसका उद्यापन करें। वहीं यदि किसी श्रद्धालु ने किसी विशेष संकल्प या मन्नत के साथ एकादशी का व्रत शुरू किया था, तो उस मनोकामना के पूरे होने पर भगवान विष्णु और माता एकादशी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए उद्यापन किया जाता है।

अगर शारीरिक कष्ट हो तो करें उद्यापन

शारीरिक असमर्थता या वृद्धावस्था में जब व्यक्ति बढ़ती उम्र या खराब स्वास्थ्य के कारण आगे निर्जला या फलाहारी व्रत रखने में सक्षम नहीं रह जाता, तब वह व्रत के सुचारू समापन और पूर्ण फल की प्राप्ति के लिए उद्यापन करता है।

उद्यापन के लिए कौन सा समय होता है सबसे शुभ?

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत के उद्यापन के लिए चातुर्मास (आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी) के समय को वर्जित माना गया है क्योंकि इस दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में होते हैं। सूर्य के उत्तरायण रहने के दौरान, विशेषकर मार्गशीर्ष (अघन), माघ, या फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की किसी भी बड़ी एकादशी (जैसे मोक्षदा, जया या आमलकी एकादशी) पर उद्यापन करना सर्वोत्तम और अति फलदायी माना जाता है।

Story first published: Tuesday, May 26, 2026, 10:22 [IST]
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